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रविदास मंदिर टूटने पर दिल्ली विधानसभा में भी हंगामा

संत रविदास मंदिर तोड़े जाने के खिलाफ सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक विरोध किया जा रहा है. इस मुद्दे पर बीजेपी के विधायक ओपी शर्मा ने सदन में बोलते हुए कहा कि संत रविदास सर्वधर्म के थे. किसी एक वर्ग के नहीं. ऐसे में रविदास मंदिर के मसले पर विपक्ष का आरोप छुद्र राजनीति से प्रेरित है.

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रामकिंकर सिंहनई दिल्ली, 22 August 2019
रविदास मंदिर टूटने पर दिल्ली विधानसभा में भी हंगामा ओपी शर्मा (फाइल फोटो)

दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में रविदास मंदिर को तोड़े जाने का मामला शांत होता नहीं दिख रहा है. संत रविदास मंदिर तोड़े जाने के खिलाफ सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक विरोध किया जा रहा है. इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार के मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम का कहना है कि डीडीए ने ठीक से तथ्यों को कोर्ट में नही रखा. साथ ही उनका कहना है कि मनुस्मृति के हिसाब से देश नही चलाया जाता. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि हरदीप पुरी जी चाहते तो रविदास मंदिर बचा सकते थे.

गुरुवार को दिल्ली विधानसभा सत्र शुरू होते ही सत्ता पक्ष के सभी विधायकों ने वेल में पहुचकर हंगामा किया और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के खिलाफ नारे लगाने लगे. दो बार सत्र स्थगित होने के बाद दिल्ली विधानसभा सत्र शुरू होते ही आप विधायक अजय दत्त ने अपनी कमीज फाड़ दी.

मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम ने कहा, 'रविदास मंदिर का अनावरण 1959 में बाबू जगजीवन राम ने किया. मंदिर समिति ने किसी भी ग्रीन बेल्ट को अतिक्रमण नहीं किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि ये मंदिर तोड़ना बीजेपी की मानसिकता को दर्शाता है. यही नहीं 2014 में सरकार बनने के बाद ही पुणे, गुजरात में दलितों के खिलाफ हुए मामले भी बीजेपी की मानसिकता को दर्शाता है.

आगे उनका कहना है कि 'रोहित वेमुला की हत्या सांस्थानिक हत्या है. ये राम मंदिर आस्था में आस्था का प्रूफ मानते है लेकिन यहां डॉक्यूमेंट्री सुबूत को नहीं मानते. बीजेपी का मंदिर, मंदिर है हमारा मंदिर नहीं.'

बीजेपी के विधायक ओपी शर्मा ने सदन में बोलते हुए कहा कि संत रविदास सर्वधर्म के थे. किसी एक वर्ग के नहीं. विधान सभा से 500 कदम दूर जहां भी अम्बेडकर ने प्रवास किया था, वहां पर भव्य स्मारक बनाया गया है. ऐसे में रविदास मंदिर के मसले पर विपक्ष का आरोप छुद्र राजनीति से प्रेरित है.

बता दें रविदास मंदिर का केस मंदिर बनाम डीडीए के साथ चल रहा था और इस मामले में डीडीए को कोर्ट में जीत हासिल हुई थी. इसके बाद मंदिर को तोड़ा गया, लेकिन इसके साथ ही एक नया बवाल शुरू हो गया. नाराज दलित समाज ने मंदिर तोड़े जाने के खिलाफ हजारों की संख्या में बुधवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली की.

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