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मंदी: रामलीला में पुरानी पोशाक से काम चलाएंगे राम-सीता, हनुमान भी हैं परेशान

दशहरे का पर्व देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है दशहरे से पहले देशभर में रामलीला का आयोजन किया जाता है. लेकिन आर्थिक मंदी के असर ने इस त्यौहार की चमक को भी फीका कर दिया है. मंदी के कारण रामलीला के आयोजकों ने बड़े स्तर पर कटौती की है. दिल्ली में 28 सितंबर से रामलीला शुरू होने वाली है. रामलीला कमेटियों का कहना है कि कलाकार, मंच और आयोजन का खर्च बढ़ रहा है.

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aajtak.in
सुशांत मेहरा नई दिल्ली, 17 September 2019
मंदी: रामलीला में पुरानी पोशाक से काम चलाएंगे राम-सीता, हनुमान भी हैं परेशान रामलीला कमेटियों पर मंदी की मार (फोटो-आजतक)

  • रामलीला कमेटी के चंदे में हुई कटौती
  • खर्चे कम करने पर मजबूर हुई कमेटियां
  • राम-सीता के लिए नहीं खरीदी जाएगी ड्रेस
दशहरे का पर्व देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है दशहरे से पहले देशभर में रामलीला का आयोजन किया जाता है. लेकिन आर्थिक मंदी के असर ने इस त्यौहार की चमक को भी फीका कर दिया है. मंदी के कारण रामलीला आयोजकों ने बढे स्तर पर कटौती की है. दिल्ली में 28 सितंबर से रामलीला शुरू होने वाली है. रामलीला कमेटियों का कहना है कि कलाकार, मंच और आयोजन का खर्च बढ़ रहा है.

पुरानी दिल्ली के लाल किले मैदान पर लव-कुश रामलीला कमेटी देश की सबसे पुरानी कमेटियों में से है. लव कुश रामलीला कमेटी के महामंत्री अर्जुन कुमार गुप्ता की मानें तो मंदी के कारण व्यापारी रामलीला कमेटियों को चंदा देने में असमर्थ हैं. अर्जुन कुमार बताते हैं कि पिछले साल जहां लव कुश रामलीला कमेटी ने 5000 मेंबर बनाए थे अबकी बार सिर्फ 12 सौ मेंबर ही बन पाए हैं. इसका असर चंदा संग्रह पर पड़ रहा है. कमेटी का कहना है कि व्यापारी चंदा देने से हिचकिचा रहे हैं.

अर्जुन कुमार ने बताया कि हर साल राम बारात शोभायात्रा निकली जाती है जिससमें 50 झांकियां होती हैं, अबकी बार शोभा यात्रा में 25 झाकियां ही होंगी. इसके अलावा जो कलाकार जो राम, रावण, सीता का किरदार निभाते हैं उनके लिए नई ड्रेस नहीं खरीदी गई है. ये कलाकार पुरानी ड्रेस से ही काम चलाएंगे. आतिशबाजी का खर्च भी कम किया गया है.

जो कमेटियां पहले आतंकवाद के खिलाफ पुतला दहन करती थीं वे इस बार मंहगाई का पुतला फूंकने की बात कर रही हैं. पिछले 26 साल से इंद्रप्रस्थ रामलीला कमेटी का आयोजन करने वाले सुरेश बिंदल का कहना है कि जब अर्थव्यवस्था चलाने वाले व्यापारियों के पास ही पैसा नहीं है तो ऐसे में वो चंदा क्या देगा? रामलीला कमेटियों का कहना है कि चंदा भले ही कम मिल रहा हो लेकिन खर्चे कम नहीं हो पा रहे हैं जिसकी वजह से जमा पूंजी को निकालना पड़ रहा है.

पूर्वी दिल्ली में हाईटेक रामलीला में शुमार बालाजी रामलीला कमेटी के प्रधान भगवत रस्तोगी के मुताबिक कलाकारों को जुटाना, साज-सज्जा करना, नई थीम चुनना काफी मुश्किल काम होता है, ताकि ज्यादा से ज्यादा भीड़ को आकर्षित किया जा सके, लेकिन इस बार मंदी के कारण सब कुछ सोचना पड़ रहा है. रामलीला की भव्यता कम की गई है ताकि खर्चे कम किए जा सके. इस बार हनुमान का हेलिकॉप्टर से संजीवनी बूटी लेकर आना या बड़ी बड़ी ट्रेनों के जरिए रावण द्वारा सीता का हरण करना यह सब इस बार रामलीला में हाईटेक तरीके से नजर नहीं आएगा.

पिछले कई सालों से रामलीला में रावण का पुतला बनाने वाले इकबाल ने बताया कि महंगाई बढ़ गई है कि लेकिन उनके काम का दाम नहीं बढ़ा है. इकबाल ने कहा कि उन्हें पिछले साल के रेट पर ही रावण का पुतला बनाना पड़ रहा है.

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