एडवांस्ड सर्च

कैदी की पेंटिंग ने जीता सबका दिल, मिला पहला अवार्ड

आजीवन कारावास की सजा काट रहे कई कैदी अपनी प्रतिभाओं से जेल के साथी कैदियों की जिंदगी के अंदर रंग भर रहे हैं. ऐसे ही एक हैं राजाराम. जिसी पेंटिंग ने जीता है पहला इनाम.

Advertisement
aajtak.in
रामकिंकर सिंह नई दिल्ली, 11 December 2018
कैदी की पेंटिंग ने जीता सबका दिल, मिला पहला अवार्ड तिनका तिनका इंडिया अवार्ड

क्या कभी आपने सोचा है जिनके मां-बाप जेल में हों उनके बच्चे का पालन-पोषण कैसे होता होगा. भारत में इस समय करीब 1800  बच्चे ऐसे हैं जो माता या पिता के साथ जेल के अंदर आए हैं. ये किन परिस्थितियों में जेल में रह रहे हैं उसको पेंटिंग के जरिए उकेरा पंजाब की भटिंडा सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास पर बन्दी राजाराम ने. उनकी पेंटिंग में 2 बच्चे दिखाए गए हैं जिनमें से एक बच्चे के हाथ में लैपटॉप और दूसरा बच्चा खाना खा रहा है. सपने देखते बच्चे शीर्षक की यह पेंटिंग एक अमीर औऱ एक गरीब बच्चे के जरिए जेल में बंद उन बच्चों की गाथा को कहती है जो अपने माता या पिता के साथ जेल के अंदर आए हैं. इस साल तिनका तिनका इंडिया अवार्ड की पेंटिंग श्रेणी में प्रथम पुरस्कार दिया गया है.

जेल में सीखी पेंटिंग

केंद्रीय जेल बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के बन्दी शोभाराम पिछले 8 साल से जेल में है और आजीवन कारावास में है. जेल में आने से पहले वो एक किसान था. उसने पेंटिंग जेल में आने के बाद सीखी. नासिक केंद्रीय जेल, महाराष्ट्र में बन्द 36 साल के सुदीप की पेंटिंग कुछ भी स्थाई नहीं को इस साल पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है. कॉमर्स, फाइन आर्ट्स. फैशन फोटोग्राफी और इंजीनियरिंग की डिग्री पा चुके सुदीप पाल इस समय जेलों के अंदर रंग भरने की कोशिश कर रहे हैं.

4.50 लाख में बिकी पेटिंग

46 वर्ष के चिंतन विद्यासागर उपाधयाय महाराष्ट्र की केंद्रीय जेल, ठाणे में बंद हैं. जेल में आने से पहले वो एक विजुअल आर्टिस्ट थे. अब वो आजीवन कारावास में हैं. उनकी बनाई एक तस्वीर को जानी- मानी फ़िल्म प्रोड्यूसर किरण राव ने 4.50 लाख में खरीदा था. उपाध्याय अब जेल में कैदियों को पेंटिंग की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं.

कैदी समाज को दे रहे नई दिशा

बिलासपुर की केंद्रीय जेल में आजीवन कारावास की सजा काट कर रहे 42 वर्षीय रवि शंकर पिछले 12 साल से जेल में हैं और जेल के अधिकारी उन्हें जेल के लिए उन्हें एक बहुत बड़ी ताकत मानते हैं. उन्होंने अपनी जिंदगी को पूरी तरह से बदलकर आध्यात्म अपना लिया है और जेल के बंदियों को आध्यात्म से जोड़ रहे हैं. उनकी वजह से जेल की जिंदगी में बेहद बदलाव आया है. मॉडल जेल चंडीगढ़ के वासुदेव को जेल की रसोई के प्रति उनके विशेष योगदान है. जेल अधिकारियों के मुताबिक वासुदेव आंगनवाड़ी के लिए भी एक बड़ी मदद है. पश्चिम बंगाल से 39 वर्षीय अमृता मंडल को जेल के अन्दर बन्दियों को जूट का काम सीखने के लिए और अपने काम शुरू करने की प्रेरणा देने के लिए चुना गया है. वो भी आजीवन कारावास पर हैं.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay