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PSE: दिल्ली में अरविंद केजरीवाल का जलवा बरकरार, CM पद के लिए पहली पसंद

11 से 17 अक्टूबर के बीच किए गए इंडिया टुडे पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचेंज सर्वे के मुताबिक दिल्ली में 47 फीसदी वोटर अरविंद केजरीवाल को ही मुख्यमंत्री के तौर पर आगे भी कमान संभालते देखना चाहते हैं. लोकप्रियता के मामले में वो अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से कहीं आगे हैं.

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aajtak.in
राम कृष्ण नई दिल्ली, 19 October 2018
PSE: दिल्ली में अरविंद केजरीवाल का जलवा बरकरार, CM पद के लिए पहली पसंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फोटो- फेसबुक)

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री के लिए लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. साथ ही उनकी सरकार के कामकाज से लोग संतुष्ट ज्यादा हैं और नाखुश कम हैं. इंडिया टुडे पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचेंज (PSE) के सातवें संस्करण के मुताबिक सर्वे में दिल्ली में 47 फीसदी प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री के लिए केजरीवाल को पहली पसंद बताया है.

11 से 17 अक्टूबर के बीच किए गए सर्वे के मुताबिक दिल्ली में 47 फीसदी वोटर अरविंद केजरीवाल को ही मुख्यमंत्री के तौर पर आगे भी कमान संभालते देखना चाहते हैं. लोकप्रियता के मामले में वो अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से कहीं आगे हैं.

शीला दीक्षित को सिर्फ 19 फीसदी वोटरों ने ही मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी पसंद बताया. बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन को 13 फीसदी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी को 9 फीसदी वोटरों ने मुख्यमंत्री के लिए अपनी पसंद बताया.

इंडिया टुडे-माई-इंडिया के PSE सर्वे के मुताबिक केजरीवाल के नेतृत्व वाली मौजूदा AAP सरकार के कामकाज से दिल्ली के 41 फीसदी वोटर संतुष्ट हैं. सर्वे के 35 फीसदी प्रतिभागियों ने केजरीवाल सरकार के कामकाज पर नाखुशी जताई. वहीं, 21 फीसदी वोटरों ने इसे औसत बताया.

दिल्ली के लोगों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा

सर्वे में दिल्ली के लोगों ने नाला, नाली और साफ-सफाई को सबसे बड़ा मुद्दा बताया. इसका बड़ा कारण ये भी हो सकता है, क्योंकि दिल्ली में AAP की सरकार है और तीनों MCD पर बीजेपी का कब्जा है. हाल में ईस्ट दिल्ली म्युनिसिपल कारपोरेशन के तहत आने वाले सफाईकर्मी अपने भत्तों का भुगतान न होने की वजह से हड़ताल पर रहे, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ा.

साफ-सफाई के बाद दिल्ली के वोटरों ने पीने के पानी, प्रदूषण और महंगाई को भी अन्य अहम मुद्दों के तौर पर गिनाया. सर्वे में ये पूछे जाने पर कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने के लिए कौन जिम्मेदार हैं, तो सर्वे में 38 फीसदी प्रतिभागियों ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया. पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के लिए केजरीवाल सरकार को सिर्फ 5 फीसदी वोटरों ने ही जिम्मेदार माना. वहीं, 22 फीसदी वोटर ऐसे रहे, जिन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों को ही इस मुददे पर समान रूप से जिम्मेदार ठहराया.  

राफेल डील पर दिल्लीवासियों की राय

राफेल डील के बारे में दिल्ली में 63 प्रतिभागियों ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में नहीं सुना. सिर्फ 37 फीसदी वोटरों को राफेल डील के बारे में जानकारी थी. जिन्होंने राफेल डील के बारे में सुन रखा था, उनमें से 19 फीसदी का मानना है कि राफेल डील में भ्रष्टाचार नहीं हुआ. वहीं, 18 फीसदी लोग मानते हैं कि डील में भ्रष्टाचार हुआ. सर्वे में 63 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि वो इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कह सकते.

क्यों कायम है केजरीवाल का जलवा

राजनीतिक विश्लेषक और पूर्व AAP नेता आशुतोष ने इस बात पर सहमति जताई कि केजरीवाल सरकार को सुविधाएं, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों की स्थिति बेहतर करने की वजह से जनसमर्थन हासिल किया है. आशुतोष ने कहा, 'AAP के पक्ष में चार बातें गई हैं- बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य. इन चारों सेक्टरों में, मैं समझता हूं कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने असाधारण काम किया है. बिजली और पानी ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले बड़े वर्ग को निश्चित रूप से संतुष्ट किया है. इससे बिहार और अन्य हिस्सों से आए लोगों को भी लाभ मिला है.'

उधर, चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव थोड़ी अलग राय रखते हैं. उनके मुताबिक AAP सरकार सीमित स्तर पर ही सफल रही है, लेकिन इसे किसी असली विपक्षी चुनौती का सामना नहीं है. यादव ने कहा, ‘मैं कहूंगा कि ये सीमित और थोड़ी बहुत कामयाबी ही है. बहुत मायने में, तथ्य यही है कि असल में कोई विपक्ष नहीं है. MCD चुनावों में बीजेपी को शानदार कामयाबी मिली. लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत मिली. आज उनके पास कोई नेता नहीं है. एजेंडा नहीं है...कांग्रेस फिर वापसी करती प्रतीत हो रही थी, लेकिन ये अपनी अंदरूनी चालबाज़ियों में उलझकर रह गई लगती है. ऐसे में राज्य में विपक्ष की ओर से असल में चुनौती ही नहीं है.’

बीजेपी ने AAP पर लगाया तानाशाही का आरोप

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने AAP पर कामकाज का तानाशाही अंदाज अपनाने का आरोप लगाया. पात्रा ने कहा, 'आम आदमी पार्टी को अंदर से ही विस्फोट का सामना करना पड़ रहा है. याद रखिए, भारत जैसे महान देश वाले लोकतंत्र में एक आदमी की पार्टी नहीं हो सकती.'

AAP नेता शास्त्री बोले- सरकार ने बुनियादी मुद्दों पर किया फोकस

AAP नेता आदर्श शास्त्री ने कहा कि उनकी पार्टी की सरकार ने बुनियादी मुद्दों पर अपना फोकस कर रखा है. शास्त्री ने कहा, 'लोकप्रियता के मायने हैं कि आप सरकार बनाएं और सत्ता में रहते हुए लगातार अच्छा करके दिखाएं. अहम बात ये है कि अरविंद केजरीवाल ने इस बात पर अपना फोकस बनाए रखा कि शहर के लोगों की जरूरत क्या हैं? बुनियादी ढांचे को ठीक करना, स्वास्थ्य सेवाओं को ठीक करना और बिजली-पानी की दिक्कतों को सुलझाना जैसे मुद्दों पर AAP सरकार ने पूरा ध्यान दिया.’

70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के लिए 2015 में हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ अपनी सरकार बनाई थी. इस चुनाव में आम आदमी पार्टी को 67 सीटों पर कामयाबी मिली थी. बीजेपी को सिर्फ तीन सीटों से ही संतोष करना पड़ा था. वहीं कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका था.

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