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निर्भया केस: तिहाड़ प्रशासन ने दोषियों से पूछा सवाल, नहीं मिला जवाब

निर्भया केस में तिहाड़ जेल प्रशासन ने चारों दोषियों से पूछा कि आप सभी अपने परिवार से कब मिलना चाहते हैं. अभी तक दोषियों ने तिहाड़ प्रशासन को कोई जवाब नहीं दिया है.

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aajtak.in
अरविंद ओझा नई दिल्ली, 14 January 2020
निर्भया केस: तिहाड़ प्रशासन ने दोषियों से पूछा सवाल, नहीं मिला जवाब निर्भया के चारों दोषी

  • दोषियों से परिवार से मिलने का समय पूछा गया
  • जवाब न मिलने पर 2 दिन पहले कराई जाएगी मुलाकात

निर्भया केस में तिहाड़ जेल प्रशासन ने चारों दोषियों से पूछा कि आप सभी अपने परिवार से कब मिलना चाहते हैं. दोषियों से वक्त और तारीख पूछी गई है. हालांकि, अभी तक दोषियों ने तिहाड़ प्रशासन को कोई जवाब नहीं दिया है. दोषियों को 22 जनवरी सुबह 7 बजे फांसी दी जाएगी.

दरअसल, फांसी से पहले नियम के मुताबिक, दोषियों से परिवार वालों की आखिरी मुलाकात करवाई जाती है. इसी नियम के तहत तिहाड़ प्रशासन ने निर्भया के दोषियों से पूछा था. अगर जवाब नहीं आता तो नियम के मुताबिक, 2 दिन पहले यानी 20 तारीख को दोषियों के परिवार वालों से आखिरी मुलाकात करवाई जाएगी.

तिहाड़ सूत्रों के मुताबिक, सभी दोषियों के परिवार वाले अक्सर मिलने आते हैं, लेकिन अक्षय का परिवार नवंबर से मिलने नहीं आया है. निर्भया के हत्यारों को 22 जनवरी की सुबह सात बजे फांसी पर लटका दिया जाएगा. इसके लिए दिन-रात तैयारियों में जुटे तिहाड़ जेल प्रशासन ने यूपी सरकार से बात कर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि पवन जल्लाद कम से कम दो दिन पहले यानी 20 जनवरी तक जेल में अनिवार्य रूप से पहुंच जाए.

तिहाड़ जेल प्रशासन के एक अधिकारी के मुताबिक, जेल प्रशासन को डेथ वारंट पर अमल के वास्ते जो कुछ तैयारियां करनी थीं, वे सब पूरी हो चुकी हैं. चारों मुजरिमों को एक साथ फंदे पर लटकाने के लिए एक कुआं (तहखाना) और एक तख्ता, पुराने फांसीघर में ही नया तैयार करा लिया गया है. तिहाड़ जेल में अब तक एक साथ सिर्फ दो लोगों को ही फांसी पर लटकाए जाने का इंतजाम था.

तिहाड़ जेल प्रशासन के अधिकारी ने कहा कि फांसी के बाद चारों मुजरिमों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के फॉंरेसिक साइंस विभाग से भी जल्दी ही संपर्क कर तमाम औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी, ताकि फांसीघर से पोस्टमॉर्टम हाउस में पहुंचे शवों का पोस्टमॉर्टम पैनल द्वारा कम से कम समय में कराके शवों को वारिसान के हवाले किया जा सके.

(आईएनएस के इनपुट के साथ)

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