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प्रशासनिक अनुभव की कमी को पूरा करेंगे AAP के ईमानदार इरादेः अरविंद केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी देश की राजधानी में राजनीति का चेहरा बदलने को तैयार है. जनता के सामने कैबिनेट की बैठक, रामलीला मैदान में दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र, खर्च तय करने के लिए मासिक मोहल्ला सभाएं जैसी कई चीजें दिल्ली पहली बार देखेगी.

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राहुल कंवल [Translated By: कुलदीप मिश्र]नई दिल्ली, 25 December 2013
प्रशासनिक अनुभव की कमी को पूरा करेंगे AAP के ईमानदार इरादेः अरविंद केजरीवाल अरविंद केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी देश की राजधानी में राजनीति का चेहरा बदलने को तैयार है. जनता के सामने कैबिनेट की बैठक, रामलीला मैदान में दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र, खर्च तय करने के लिए मासिक मोहल्ला सभाएं जैसी कई चीजें दिल्ली पहली बार देखेगी.

जिसे नेताओं ने कुछ समय पहले 'एक मूर्ख का सपना' कहा था, वह अब हकीकत बनने जा रहा है. सोमवार को आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में सरकार बनाने का दावा पेश किया. अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री होंगे. इंडिया टुडे से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि वह रिवॉल्यूशनरी यानी 'क्रांतिकारी' मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं जो अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगा. उन्होंने कहा, 'देश में एक मान्यता है कि आप सत्ता में बने रहने के लिए समझौते करते हैं. लोग सोचते हैं कि कुर्सी पर रहते हुए क्रांतिकारी होना नामुमकिन है. मैं इससे सहमत नहीं हूं. सरदार पटेल और लाल बहादुर शास्त्री बहुत प्रैक्टिकल नेता थे, पर सत्ता में रहते हुए भी वे क्रांतिकारी थे.'

कंस्ट्रक्टिव सीएम बनना है, डिस्ट्रक्टिव नहीं
केजरीवाल लगे हाथ यह भी कह देते हैं कि रिवॉल्यूशनी होने का मतलब 'डिस्ट्रक्टिव' यानी सब कुछ तोड़ने वाला नहीं होता. उन्होंने कहा, 'मैं मिशनरी उत्साह से काम करना चाहता हूं पर इसका मतलब यह नहीं है कि मेरी अप्रोच डिस्ट्रक्टिव रहेगी. मैं कंस्ट्रक्टिव तरीके से काम करना चाहता हूं दिल्ली के लोगों को साथ लेकर. मुख्यमंत्री के लिए सबसे जरूरी है लोगों की सेवा का भाव. अगर इलाके में अन्याय हो रहा है तो मुख्यमंत्री को दर्द होना चाहिए. अगर जनता के दर्द से उसे दर्द नहीं होता तो वह बस फाइल ही क्लियर करता रह जाएगा.'

'चांद पर जो गया वह आम आदमी ही था'
कांग्रेस और बीजेपी के सीनियर नेता केजरीवाल को उनके बड़े-बड़े वादे पूरे करने की चुनौती दे रहे हैं. दोनों पार्टियों के नेताओं को यकीन है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली में प्रभावशाली सरकार नहीं चला सकेगी और लोकसभा चुनावों तक उसकी कलई खुल जाएगी. लेकिन राजनीतिक दिग्गजों को पहले भी गलत साबित कर चुके केजरीवाल इस मोर्चे पर भी आत्मविश्वास से लबरेज नजर आते हैं. उन्होंने कहा, 'सरकार चलाना कोई बड़ी बात नहीं है. कोई मुख्यमंत्री पैदा नहीं होता. हर किसी का पहला अनुभव होता है. राजनेताओं को यह नहीं सोचना चाहिए कि देश का आम आदमी कमजोर है. इस देश का आम आदमी खाना बनाना, कपड़े पहनना और घर बनाना जानता है. चांद पर जो गया वह आम आदमी ही था. आम आदमी अब सरकार चलाकर भी दिखाएगा.'

'कई एक्सपर्ट हमें सलाह देंगे'
केजरीवाल ने माना कि उनके विधायक गैर-अनुभवी हैं लेकिन दलील दी कि शासन चलाने का अनुभव न होने का यह मतलब नहीं है कि हम सरकार नहीं चला पाएंगे. उन्होंने कहा, 'शिक्षा मंत्री बनने से पहले अरविंदर लवली ने शिक्षा के क्षेत्र में क्या किया था? राजकुमार चौहान फूड मिनिस्टर थे. उन्होंने मंत्री बनने से पहले अपने इलाके में क्या किया था? हम एक ईमानदार सरकार बनाएंगे. कई एक्सपर्ट हैं जो सरकार को सुझाव दे सकते हैं. पानी की समस्या को ही ले लीजिए. सरकार उन विशेषज्ञों से संपर्क करेगी जो अलग-अलग इलाकों में काफी काम कर चुके हैं. पिछली सरकार की नीयत ईमानदार नहीं थी. इसलिए चीजें ठीक नहीं हो पाईं. मैं खुश हूं कि मेरे पास वैसा अनुभव नहीं है, जैसा नेताओं के पास है.'

बिजली और पानी सबसे बड़ी चुनौती
केजरीवाल ने पार्टी के मेनिफेस्टो में किए गए वादों को पूरा करने के लिए पूरा प्लान बनाया है. उन्हें मालूम है कि उन्हें जो भी करना है, बहुत कम समय में करना होगा क्योंकि मार्च के बाद लोकसभा चुनावों के मद्देनजर आचार संहिता लागू हो जाएगी. पानी और बिजली, दो सबसे अहम मुद्दे साबित होने वाले हैं. केजरीवाल अगर बिजली-पानी से जुड़े अपने 50 फीसदी वादे भी पूरे कर पाए तो अगले चुनाव में इसका इनाम जनता उन्हें देगी. पिछले कुछ दिनों में दिल्ली जल बोर्ड और बिजली कंपनियों से रिटायर्ड कई अधिकारी केजरीवाल से मिले हैं और इन विभागों में चल रही गड़बड़ी की जानकारी दी. इन अधिकारियों ने केजरीवाल को अपनी ओर से कई सुझाव भी दिए.

'सारी बुद्धिमानी हमारे ही पास नहीं है'
आम आदमी पार्टी की सरकार 'स्वराज' की अवधारणा पर खड़ी होगी. केजरीवाल मानते हैं कि जनता तक जाने से राजनीति में क्रांतिकारी बदलाव आएगा. उन्होंने कहा, 'हमें फैसले लेने की प्रक्रिया में जनता को शामिल करना होगा. तभी चीजें सुधरेंगी. अगर बंद कमरे में बैठे चार लोग ये दावा करेंगे कि उनके पास सारी चीजों के जवाब हैं तो कुछ नहीं ठीक होगा. सारी बुद्धिमानी हमारे ही पास है, ऐसी कोई गलतफहमी हमने नहीं पाल रखी है. कई लोग हैं, जिनके पास जनता की समस्याओं का हल है. अगर आप उनसे मिलें और फैसले लेने में उन्हें शामिल करें तो कोई समस्या नहीं है जो नहीं सुलझ सकती.'

मोहल्ला सभाओं से होगा राजनीति का विकेंद्रीकरण
आम आदमी पार्टी पूरे प्रदेश में मोहल्ला सभाएं करने की तैयारी कर रही है. इन सभाओं में महीने के किसी एक रविवार को स्थानीय लोग जुटेंगे और इलाके की प्राथमिकताएं तय करेंगे. केजरीवाल कहते हैं, 'पहले लोग विधायक के पास जाने के लिए दौड़-भाग करते थे, अब विधायक जनता के बीच खुद जाएंगे. लोगों को सरकार के लिए महीने में बस एक दिन का समय निकालना होगा. मोहल्ला सभा इलाके के किसी पार्क में होगी, जहां लोग आएंगे और बताएंगे कि उनके इलाके में कौन सा काम करवाया जाना चाहिए. बहुमत जिस काम के पक्ष में होगा, वही होगा. ठेकेदारों को तब तक पेमेंट नहीं की जाएगी, जब तक स्थानीय लोग खुद काम की गुणवत्ता नहीं जांच लेते.'

'लोगों की भारी-भरकम उम्मीदों से डर जाता हूं'
केजरीवाल के कंधों पर जिम्मेदारी अब और भी बढ़ने वाली है. वह कहते हैं, 'कई बार तो मैं डर जाता हूं कि लोगों को मुझसे कितनी उम्मीदें हैं. मुझे नहीं पता कि हम सरकार चलाने में सफल होंगे या नहीं. मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि हम सफल हों. पर हमारा भाग्य हमारे वश में नहीं है. हालांकि हमारा काम हमारे वश में है. हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे हमें साहस और लगन दे कि हम लोगों की उम्मीदों पर खरा उतर सकें.'

'ईश्वर पर यकीन लौट आया है'
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आखिरी कुछ महीनों में ईश्वर में उनका विश्वास लौट आया है. उन्होंने बताया, 'मैं बहुत धार्मिक परिवार से आता हूं. लेकिन आईआईटी खड़गपुर में पढ़ाई के दौरान मेरा रवैया वैज्ञानिक हो गया और मैं नास्तिक हो गया. लेकिन पिछले तीन सालों में जो कुछ हुआ है, उससे दोबारा ईश्वर में मेरा विश्वास बना है. अन्ना अनशन पर बैठे और एक बड़े आंदोलन ने जन्म लिया. जो कुछ हुआ उससे मुझे अनुभव हुआ कि मैं कितना छोटा आदमी हूं. इस देश में कुछ चमत्कारिक हो रहा है. मुझे पूरा यकीन है कि मुझे बस अपना काम करते रहना है और बाकी सब कुछ ऊपर वाले पर छोड़ देना है.'

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