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निर्भया कांड के चार साल, मां ने कहा- सरकार ने नहीं निभाई अपनी जिम्मेदारी

दिल्ली में निर्भया कांड को 4 साल बीत गए हैं, लेकिन वो आज भी हम सबके दिलों में जिंदा है. निर्भया गैंगरेप केस ने सड़क से संसद तक और देश से दुनिया तक, हर जगह तहलका मचा दिया. इसके चार साल पूरे होने पर 'आजतक' ने निर्भया के माता-पिता से खास बातचीत की. पेश है उनसे हुई बातचीत के खास अंश...

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अंजलि कर्मकार/ पूनम शर्मा नई दिल्ली, 16 December 2016
निर्भया कांड के चार साल, मां ने कहा- सरकार ने नहीं निभाई अपनी जिम्मेदारी निर्भया कांड के 4 साल पूरे

दिल्ली में निर्भया कांड को 4 साल बीत गए हैं, लेकिन वो आज भी हम सबके दिलों में जिंदा है. निर्भया गैंगरेप केस ने सड़क से संसद तक और देश से दुनिया तक, हर जगह तहलका मचा दिया. इसके चार साल पूरे होने पर 'आजतक' ने निर्भया के माता-पिता से खास बातचीत की. पेश है उनसे हुई बातचीत के खास अंश...

सवाल- चार साल पहले जब आंदोलन हुआ, तो पूरे देश से हजारों लोग आपके साथ खड़े थे, लेकिन आज निर्भया चेतना दिवस पर 200 लोग भी नहीं हैं?
-डर और अफसोस दोनों है कि अब लोग साथ नहीं है. जो 4 साल पहले थें, क्योंकि उन्हें पता है कि 4 साल पहले जो डंडे खाए थे. उसका कोई नतीजा नहीं निकला, लेकिन हमें न्याय तो अभी तक नहीं मिल पाया.

सवाल- लेकिन कुछ बदला क्यों नहीं समाज में आज भी?
-5 साल मे सरकार बदल जाती है, लेकिन 4 साल मे निर्भया को अभी तक न्याय नहीं मिला. समाज को नहीं फिलहाल न्याय व्यवस्था को बदलने और सुधरने की ज़रूरत है. शर्म और डर समाज से खत्म हो गए हैं. इसीलिए बदलाव भी नहीं आ पा रहा है.

सवाल- किसी भी आरोपी को फांसी नहीं हुई अब तक, जबकि ये काफी बड़े मीडिया में कवर किया गया मामला है?
-हर बार कोर्ट में रामायण और महाभारत की तरह पूरे केस को बताया जाता है, लेकिन सच तो ये है कि आज भी आरोपियों में से किसी को फांसी नहीं हुई है. इसी से बाकी अपराधियों के भी हौसले बढ़ते है कि एक दो साल जेल में रह लेंगे, कोई न कोई बचा लेगा और फिर बाहर आकर वही अपराध करेंगे.

सवाल- 4 साल बाद निर्भया को कैसे याद कर रहे है आज आप?
-निर्भया को हमने आज भी फोटो पर फूल माला नहीं पहनाई है, क्योंकि वो समाज और हमारे दिल में जिंदा है और हमेशा रहेगी. इस बात की नाराजगी है कि समाज को भी हमारी याद 16 दिसंबर को ही याद आती है. ये भी बदलने की जरूरत है.

सवाल- निर्भया के बाद भी न समाज के नजरिए में कुछ बदलाव आया है न रेप के मामलों में?
-जब भी इस तरह की घटनाएं होती है, तो सिर्फ-बाच्चियों पर ही सवाल खड़े किए जाते है. हम लोग तो फिर भी लड़ रहे हैं, लेकिन क्या सरकार ने अपनी जिम्मेदारी निभाई? क्या न्याय व्यवस्था ने अपना काम जिम्मेदारी से किया? जब तक ये नहीं होगा कुछ नहीं बदलने वाला, लेकिन हम फिर भी लड़ते रहेंगे.

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