एडवांस्ड सर्च

बिजली के मुद्दे पर कांग्रेस-AAP आमने सामने, केजरीवाल ने जारी किए शीला सरकार के आंकड़े

केजरीवाल सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों में साल 2010 से 2013 के दौरान बिजली के बिल में मासिक बढ़त दिखाई गई है. उस वक्त दिल्ली की सत्ता में शीला सरकार थी.

Advertisement
पंकज जैन [Edited By: सना जैदी]नई दिल्ली, 12 June 2019
बिजली के मुद्दे पर कांग्रेस-AAP आमने सामने, केजरीवाल ने जारी किए शीला सरकार के आंकड़े दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)

राजधानी दिल्ली में कांग्रेस बिजली के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार को घेर रही है. राजधानी में बिजली की समस्या के मुद्दे पर दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने आज यानी बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की. मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद एक तरफ जहां दिल्ली कांग्रेस के वर्किंग प्रेसिडेंट हारून यूसुफ ने दावा करते हुए कहा कि केजरीवाल ने बिजली के बिल के फिक्स चार्ज वापस लेने की बात कही है तो वहीं दूसरी तरफ  केजरीवाल सरकार ने शीला सरकार के बिजली बिल के आंकड़े जारी किए हैं.

केजरीवाल सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों में साल 2010 से 2013 के दौरान बिजली के बिल में मासिक बढ़त दिखाई गई है. उस वक्त दिल्ली की सत्ता में शीला सरकार थी. इसके अलावा दिल्ली सरकार ने बताया कि साल 2016-17 में बिजली के लिए खर्च की गई सब्सिडी 1574.94 करोड़ रुपये थी. 2017-18 में 1444.06 करोड़  रुपये और 2018-19 में बिजली पर सब्सिडी 1699.29 करोड़ रुपये खर्च हुई. सब्सिडी के आंकड़े जारी करते हुए सरकार ने सवाल पूछा कि कांग्रेस के पास 7400 करोड़ का आंकड़ा कहां से आया?

bill-2_061219030931.jpgकेजरीवाल सरकार ने जारी किए आंकड़े

केजरीवाल सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक शीला सरकार में साल 2010 में 200 यूनिट के लिए हर माह 539 रुपये देने पड़ते थे जो 2013 में 72 फीसदी तक बढ़कर 928 रुपये हो गया. दिल्ली सरकार के मुताबिक जिस तरह 2010 से 2013 के बीच बिजली में बढ़त देखी गई है. उस हिसाब से अगर आज शीला सरकार होती तो 2019 में 200 यूनिट के लिए मासिक बिजली बिल 2679 रुपये देना पड़ता.

bill_061219030902.jpgकेजरीवाल सरकार ने जारी किए आंकड़े

वहीं केजरीवाल सरकार ने आंकड़े दिखाते हुए दावा किया है कि जहां 2015 में 200 यूनिट के लिए 550 रुपये बिजली बिल देना होता था, वहीं 2019 में 477 रुपये हर माह पड़ते देने हैं. आंकड़े दिखाकर दावा किया गया है कि शीला सरकार के मुकाबले केजरीवाल सरकार ने 200 यूनिट के खर्च पर 2013 से 2019 तक लोगों के हर माह 2202 रुपये की बचत कराई है.

केजरीवाल सरकार के मुताबिक दिल्ली में 91 फीसदी उपभोक्ता सब्सिडी का इस्तेमाल करते हैं. जिनमें 0 से 200 यूनिट तक सब्सिडी खर्च करने वालों का आंकड़ा 67 फीसदी है जबकि 200 से 400 यूनिट तक सब्सिडी खर्च करने वालों का आंकड़ा 24 फीसदी है.

ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले चुनावों में बिजली के मुद्दे पर कांग्रेस का आम आदमी पार्टी को घेरना कितना फायदेमंद या नुकसानदायक होगा.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay