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नंबर दो पर आने से कांग्रेस में जगी आस, दिल्ली जीतने के लिए कर रही उम्मीदवारों की तलाश

आम चुनाव में दिल्ली में तीसरे नंबर से दूसरे नंबर पर आई कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. शीला दीक्षित ने जिला और ब्लॉक अध्यक्षों से कहा कि आने वाले 10 दिनों में हर विधानसभा से तीन-तीन नाम उम्मीदवारों के पेश किए जाएं.

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मणिदीप शर्मा [Edited By: कुबूल अहमद]नई दिल्ली, 12 June 2019
नंबर दो पर आने से कांग्रेस में जगी आस, दिल्ली जीतने के लिए कर रही उम्मीदवारों की तलाश दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित

लोकसभा चुनाव में हार से हताश कांग्रेस जहां नए कार्यकारी अध्यक्ष की तलाश में हैं. वहीं, आम चुनाव में दिल्ली में तीसरे नंबर से दूसरे नंबर आई कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. लोकसभा चुनाव की हार से सबक लेते हुए कांग्रेस ने सभी जिला अध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों को आदेश दिया है कि वह हर विधानसभा से तीन-तीन नाम उम्मीदवारों के पेश करें.

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने मंगलवार को जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों की बैठक बुलाई थी, जिसमें विधानसभा के लिए उम्मीदवारों के नाम को लेकर चर्चा हुई. शीला दीक्षित ने जिला और ब्लॉक अध्यक्षों से कहा कि आने वाले 10 दिन में हर विधानसभा से तीन-तीन नाम पेश किए जाएं. साथ ही शीला ने कहा कि तीन नामों में से एक नाम महिला का हो ऐसा भी ख्याल रखा जाए.

कांग्रेस पार्टी अपनी इस पूरी मुहिम को जमीन से जोड़ने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है. दिल्ली कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया के मुताबिक कांग्रेस का मानना है कि इस पूरी कवायद के जरिए पार्टी के 70 चेहरे जल्दी तैयार हो जाएंगे और जमीन पर विधानसभा चुनाव के लिए जल्दी संघर्ष शुरू हो जाएगा.

राजेश लिलोठिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ब्लॉक अध्यक्षों के जरिए नाम मांगकर जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं की आवाज को विधानसभा में पहुंचाना चाह रही है ताकि जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को पारदर्शी तरीके से टिकट दिया सके.

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने सबसे आखिर में अपने 7 उम्मीदवारों का ऐलान किया था, जिसके चलते लोकसभा उम्मीदवारों को महज 12 दिन का प्रचार करने के लिए समय मिला. इससे सबक लेते हुए पार्टी ने जल्दी ही विधानसभा के लिए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. जबकि दिल्ली विधानसभा चुनाव में अभी करीब 8 महीने का समय बचा हुआ है.

बता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस भले ही दिल्ली में एक भी सीट न जीत सकी हो, लेकिन सात में 6 सीटों पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही है और सत्ताधारी आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर खिसक गई है. 2014 के चुनाव में कांग्रेस को 15.2 फीसदी वोट मिला था, लेकिन 2019 में उसका वोट शेयर बढ़कर 22.51 फीसदी हो गया है. जबकि 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बुरी तरह से हार का मुंह देखना पड़ा था और एक भी सीट उसे नहीं मिली थी.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के बढ़े ग्राफ से दिल्ली में वापसी की उम्मीद नजर आने लगी है. उन्हें लगता है कि कांग्रेस अगर समय से पहले उम्मीदवार उतारकर तैयारी में जुटती है तो अच्छे नतीजे उनके हक में आ सकते हैं.

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