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दिल्ली: कोडवर्ड में बिक रहा है 'मौत का मांझा'

दिल्ली में चाइनीज मांझा कोडवर्ड में बेचे जा रहे हैं. आजतक ने दिल्ली के कई इलाकों में इसका रियलटी चेक किया और पाया कि दुकानदार चोरी-छिपे चाइनीज मांझा बेच रहे हैं.

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aajtak.in
रामकिंकर सिंह/ अजीत तिवारी नई दिल्ली, 12 August 2018
दिल्ली: कोडवर्ड में बिक रहा है 'मौत का मांझा' चाइनीज मांझा

दिल्ली के बाजारों में प्रतिबंधित चाइनीज मांझा चोरी-छिपे बिक रहा है. इसे खरीदने वालों को थोड़ा पता करना पड़ेगा, थोड़ी कोशिश करनी पड़ेगी, थोड़े ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे, लेकिन मौत का ये मांझा दिल्ली के हर इलाके में आपको कहीं न कहीं मिल जाएगा. तो तय मानिए इस बार पतंगों के पेंच कटने के साथ साथ आपकी गर्दन पर इस मांझे की मार पड़ सकती है.

खरीदार दो चार ज्यादा पेंच के और दुकानदार दो चार सौ ज्यादा कमाने के लालच में मौत के इन मांझों से दिल्लीवालों की गर्दन काटने पर आमादा हैं. आजतक के संवाददाता ने दिल्ली के कई इलाकों का दौरा किया और पाया कि दिल्ली के कई इलाकों में चाइनीज मांझे बेचे जा रहे हैं. खासकर उन जगहों में जो मुख्य दिल्ली से दूर और अवैध इलाके हैं, जैसे... पटेल नगर, विकासपुरी, जनकपुरी, मायापुरी, शादीपुर, तिलक नगर, नरेला, अलीपुर, मुंडका, बवाना, कंझावला, किराड़ी, बेगमपुर, प्रेम नगर, मंगोलपुरी, सुल्तानपुरी.

आजतक की पड़ताल में पाया गया कि चाइनीज मांझा राजधानी की दुकानों में खुलेआम नहीं बल्कि ऑन डिमांड बेचा जा रहा है. रिपोर्टर और एक दुकानदार की पूरी बातचीत...

(जगह-जाफराबाद पतंग मार्केट की एक दुकान)

रिपोर्टर- पतंग वाला मांझा मिलेगा, प्लास्टिक वाला?

दुकानदार- वो तो बैन है?

रिपोर्टर- कहां मिल सकता है, थोक के भाव लेना है 15, 20?

दुकानदार- जितने भी ले लो उसका तो खेल खत्म है, हमारे पास डिमांड है हम नहीं बेच पा रहे, जिनके पास पड़ा है वहीं बेच रहे हैं. खाली मांझा नहीं मिलेगा, यहां मुश्किल है.

रिपोर्टर- थोक के भाव मांगेंगे तो भी नहीं दे पाएंगे?

दुकानदार- हम तो रिटेल करते हैं? लेकिन प्लास्टिक वाला मांझा नहीं रखते हैं?

इस बीच बातचीत सुन रहे व मांझा खरीदने आए युवक ने हमें बताया कि सुल्तानपुरी चले जाइए वहां पर मिलेगा, दुकानदार ने उसे आगे बोलने से मना कर दिया. बातचीत के बाद हमने पाया कि शायद मांझा अवैध या फिर कच्ची कॉलोनियों में मिल जाए. इसी शक पर हम किराड़ी इलाके की एक दुकान पर पहुंचे. जहां हमारा ऑपरेशन सफल हो गया.

(जगह किराड़ी इलाके में रिटेल पतंग बेचने वाला एक दुकानदार)

रिपोर्टर- मांझा है, हमें प्लास्टिक वाला चाहिए?

दुकानदार- होल सेल कोई नहीं रख रहा है, जो भी ला रहा है चुरा के ला रहा है, बेच रहा है.

रिपोर्टर- हमें 10-12 चाहिए.

दुकानदार- कहां बेचना है?

रिपोर्टर- करोलबाग में ले जाना है, कोई मंगा दो 10,12 मंगा दो, सेंपल मंगा दो. बहुत खोजा नहीं मिला. किसी ने बताया किराड़ी मिलेगा.

दुकानदार- 1 घंटे में सेंपल दिखा देंगे, सेंपल देख लेना पसंद आएगा तो मंगवा देंगे.

रिपोर्टर- अभी मंगवा दो.

दुकानदार- दुकान पर कोई जाने वाला नहीं.

रिपोर्टर- हमारे साथ गाड़ी में किसी को भेज दो, नहीं भेज सकते?

रिपोर्टर- लंच करने के बाद मिलते हैं.

(1 घंटे बाद दुकानदार का लड़का बैंग में बंद करके चाइनीज मांझे का सेंपल लाया.)

रिपोर्टर- कितना दाम है इसका.

दुकानदार- वो बोला सेंपल दिखा दो पसंद आए फिर माल मंगवा देंगे और दाम बताएंगे.

रिपोर्टर- हमें ज्यादा चाहिए.

दुकानदार- माल 14 तक (अगस्त) मिलेगा, बड़ी चरखी 800 और छोटी 500 की. अगर मिल गया तो मैं आपको थोक में दे दूंगा. बैन लगा रखा है, गैर कानूनी है, माल बेच नहीं सकते. गली में माल बेच लेगा. मेन रोड वाले चाइनीज मांझे की दुकानदारी नहीं करते, माल अगर मिलता तो सस्ता लगा देते. जो आदमी ले के आता है वो यहां नहीं है किसी के हाथ भिजवाया है. माल लाकर आपको फोन करूंगा, 14 तक उम्मीद है कि आए.

'वेस्ट दिल्ली में खुलेआम नहीं ऑर्डर पर बिक रहा चाइनीज मांझा'

चाइनीज मांझे की बिक्री की हकीकत जानने के लिए आजतक दिल्ली के तमाम इलाकों में पहुंचा. वेस्ट दिल्ली के टैगोर गार्डन इलाके में रियलिटी चेक में पाया कि वहां बरेली का मांझा बिक रहा है. बरेली का मांझा देशी तरीके से तैयार मांझा होता है और काफी मजबूत माना जाता है. इसकी बिक्री पर कोई रोक नहीं है. लेकिन जब हमने प्लास्टिक वाला मांझा, मजबूत मांझा जैसे कोडवर्ड कहकर चाइनीज मांझा मांगा तो दुकानदार ने साफ मना कर दिया कि वो प्लास्टिक वाले माझे नहीं रखता है.

हमें इस बात का यकीन नहीं हुआ इसलिए हमने इलाके में सेंट्रल स्कूल के पास की कुछ और दुकानों का रुख किया जहां पर एक शख्स ने हमें ये बतया की मांझा खुलेआम नहीं बिकता बल्कि ऑर्डर पर दिया जाता है. उसने कहा हम रखते नहीं हैं, पर मंगवा देंगे. दुकानदार ने हमें एक घंटे बाद आकर माल देखने को कह दिया. एक घंटे बाद जब हम पहुंचे तो हमें सैंपल के तौर पर चाइनीज मांझे की दो चर्खियां दिखाई गईं. दुकानदार ने सैंपल दिखा कर कहा कि अगर ये पसंद है तो 14 अगस्त तक थोक भाव में मिल जाएगा, लेकिन उसकी भी गारंटी नहीं. यानी साफ है कि पाबंदी का डर तो है और थोड़ा असर भी, लेकिन बिक्री फिर भी जारी है. हमने दुकानदार से कहा कि 11 अगस्त तक दिला दो, तो उसने कहा कोशिश करेगा.

चाइनीज मांझे के बाजार में हैं ये कोडवर्ड

पुरानी दिल्ली की पतंग और मांझे की सबसे बड़ी मंडी माना जाना वाला लाल कुआं में भी कहीं भी चाइनीज मांझा खुले में नहीं बिकता दिखा. चाइनीज मांझे की चपेट में आने से गर्दन नाक और चेहरा कटने की कई घटनाएं हो चुकी हैं. वारदात लगातार हो रही हैं. दिल्ली की सैकड़ों दुकानों में चाइनीज मांझा दबे पांव बेचे जा रहे हैं. रियलटी चेक में पता चला कि अवैध कॉलोनियों में मांझा की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है. खरीदने वाला दुकानदार को सिर्फ 'मज़बूत' कोड वर्ड कहता है और दुकानदार खुद ही माझा दे देता है. एक और कोड है चीनी मांझे का वो है 'प्लास्टिक'. चाइनीड मांझा कस्टमर को सीधे नहीं दिया जाता, बल्कि कुछ देर खड़ा रखने के बाद पैकेट में रखकर उन्हें दिया जाता है. तो इतनी सारी तिकड़मों के साथ चाइनीज मांझे की बिक्री राजधानी में जारी है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती प्रशासन और पुलिस के लिए है कि कैसे इस पाबंदी को सख्ती से सुनिश्चित किया जा सके, ताकि दिल्लीवालों की गर्दन महफूज रह सके.

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