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MCD के ज़रिए दिल्ली में समानांतर सरकार की तैयारी में बीजेपी, PM को लिखा खत

महेश गिरी ने कहा कि उन्होंने सीधे पीएम से इस मामले में दखल देने की मांग की है, क्योंकि राजधानी होने के नाते दिल्ली में इन्फ्रास्ट्रक्चर और साफ-सफाई की दरकार ज्यादा है. यहां एमसीडी के कमज़ोर होने से ज़मीन पर हालत खराब है. दिल्ली सरकार जानबूझकर एमसीडी के काम रोकती है.

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aajtak.in
कपिल शर्मा नई दिल्ली, 31 July 2017
MCD के ज़रिए दिल्ली में समानांतर सरकार की तैयारी में बीजेपी, PM को लिखा खत दिल्ली में बीजेपी के बड़े नेता

दिल्ली में एमसीडी चुनाव हुए तीन महीने बीत गए हैं, लेकिन जीत के बाद बीजेपी एमसीडी में असहाय सी महसूस कर रही है. केंद्र में सरकार होने के बावजूद एमसीडी के जरिए दिल्ली में बीजेपी कोई भी काम कराने की हालत में नहीं है, यही नहीं अभी तक हाई पावर कमेटी यानी स्टैंडिंग कमेटी भी नहीं बन पायी हैं. एमसीडी और केंद्र के बीच दिल्ली सरकार है, जिससे बीजेपी का पंगा है, जाहिर है आपसी तनातनी के चलते दिल्ली में एमसीडी के काम ठप पड़े हैं. बीजेपी को ये पता है कि अगर ज्यादा दिन ऐसा ही चलता रहा, तो जनता के बीच बीजेपी नेताओं को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि चुनाव जीतने से पहले दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी समेत तमाम बड़े नेताओं ने जोरशोर से वादा किया था कि अगर फंड दिल्ली सरकार से नहीं मिला तो सीधे केंद्र से ले आएंगे, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी हालात में कोई बदलाव नहीं आया है.

अब पूर्वी दिल्ली के सांसद महेश गिरी ने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ही गृह मंत्री राजनाथ सिंह और उपराज्यपाल अनिल बैजल को खत लिखा है. इसमें महेश गिरी ने तीनों एमसीडी को एक करने के साथ ही एमसीडी को अधिकारों के मामले में भी ताकतवर बनाने की मांग की है. इस चिट्ठी के जरिए दिल्ली सरकार के एमसीडी से जुड़े तमाम अधिकार भी वापस लेने की कवायद शुरु हो गई है. इस चिट्ठी में गिरी ने एमसीडी की बदहाल व्यवस्था और खराब माली हालत का हवाला देकर एमसीडी को रेवेन्यू के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की बात कही है. साथ ही एमसीडी से ट्राइफरकेशन के पहले छीने गए अधिकार भी वापस दिलाने की वकालत की है.

महेश गिरी ने कहा कि उन्होंने सीधे पीएम से इस मामले में दखल देने की मांग की है, क्योंकि राजधानी होने के नाते दिल्ली में इन्फ्रास्ट्रक्चर और साफ-सफाई की दरकार ज्यादा है. यहां एमसीडी के कमज़ोर होने से ज़मीन पर हालत खराब है. दिल्ली सरकार जानबूझकर एमसीडी के काम रोकती है, एमसीडी को सालों-साल राजनीतिक वजहों से कमज़ोर किया जाता रहा है, लेकिन अब दिल्ली वालों की भलाई के लिए ज़रूरी है कि एक ही एमसीडी हो और उसके पास भी काम करने का अधिकार हो. साथ ही फंड के मामले पर भी एमसीडी अगर दूसरी एजेंसियों या सरकार पर निर्भर रहेगी, तो दिल्ली का विकास प्रभावित होगा.

दरअसल इस मांग के पीछे बीजेपी की मंशा भी साफ है, वो केंद्र से एमसीडी के लिए ज्यादा अधिकार लेकर दिल्ली में समानांतर सरकार चला सकती है. क्योंकि एमसीडी का कार्यक्षेत्र पूरी दिल्ली में फैला हुआ है और अगर केंद्र की तरफ से एमसीडी को अगर ज्यादा अधिकार मिल जाते हैं, तो तीनों एमसीडी में बीजेपी की सत्ता होने की वजह से पार्टी दिल्ली सरकार के समानांतर अपनी सत्ता का इस्तेमाल कर सकती है.

 

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