एडवांस्ड सर्च

न LG से बहस, न मोदी सरकार पर ठीकरा, चुनाव हारने के बाद बदल गए केजरीवाल के तेवर

नजीब जंग से लेकर मौजूदा उपराज्यपाल अनिल बैजल तक, किसी भी एलजी से अरविंद केजरीवाल की नहीं बनी. यहां तक कि डोर-टू डोर राशन योजना की फाइल पास न करने के मुद्दे पर तो केजरीवाल पूरी कैबिनेट को लेकर उपराज्यपाल के कार्यालय में धरने पर बैठ गए और कई दिनों तक वहीं डटे रहे.

Advertisement
aajtak.in
जावेद अख़्तर नई दिल्ली, 09 July 2019
न LG से बहस, न मोदी सरकार पर ठीकरा, चुनाव हारने के बाद बदल गए केजरीवाल के तेवर उद्घाटन समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और CM केजरीवाल (फोटो-ट्विटर)

मोदी जी की दिल्ली पुलिस...मोदी जी के उपराज्यपाल...मोदी जी की सीबीआई...ये तमाम आरोप दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगाते रहे हैं. 2015 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता संभालने वाले आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने कोई भी मौका नहीं छोड़ा, जब दिल्ली सरकार के कामकाज में रोड़ा अटकाने का आरोप केंद्र की मोदी सरकार पर नहीं लगाया. यहां तक कि 2019 का लोकसभा चुनाव तो आम आदमी पार्टी ने दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे के मुद्दे पर ही लड़ा ताकि दिल्ली सरकार जनता के लिए सारे फैसले खुद ले सके. लेकिन इन तमाम आरोप-प्रत्यारोप और जुबानी जंग के बावजूद केजरीवाल की पार्टी एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सकी और 23 मई को नतीजे आने के बाद से ही उनके अंदाज बिल्कुल बदले नजर आ रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल ने अब पूरी तरह से अपनी लाइन बदल ली है. वो बार-बार केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने की बात कह रहे हैं. पीएम मोदी को जीत पर बधाई देने के साथ केजरीवाल ने सहयोग की मांग उठाने का जो बीड़ा उठाया वो लगातार चल रहा है. बीते 21 जून को लंबे वक्त बाद जब केजरीवाल और पीएम मोदी की बैठक हुई तो उसमें केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से मोहल्ला क्लिनिक और दिल्ली के सरकारी स्कूल देखने का आग्रह किया.

modi-kejriwal_070919113338.jpgपीएम मोदी से अरविंद केजरीवाल की मुलाकात (फाइल फोटो)

इसके बाद हाल ही में जब अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में सीसीटीवी का उद्घाटन करने पहुंचे तो उन्होंने मीडिया से बातचीत में फिर केंद्र सरकार के साथ मिलकर दिल्ली की भलाई के लिए काम करने की बात कही.

उपराज्यपाल से केजरीवाल की मुलाकात

नजीब जंग से लेकर मौजूदा उपराज्यपाल अनिल बैजल तक, किसी भी एलजी से अरविंद केजरीवाल की नहीं बन पाई. यहां तक कि डोर-टू डोर राशन योजना की फाइल पास न करने के मुद्दे पर तो केजरीवाल पूरी कैबिनेट को लेकर उपराज्यपाल के कार्यालय में धरने पर बैठ गए और कई दिनों तक वहीं डटे रहे. लेकिन इसी हफ्ते अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल के आवास पहुंचकर करीब 25 मिनट तक उनसे मुलाकात की और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चर्चा की.

kejriwal-lg_070919113444.jpgएलजी अनिल बैजल से मुलाकात के दौरान अरविंद केजरीवाल

उद्घाटन समारोह पर टकराव

अक्टूबर 2018 में दिल्ली के आईटीओ स्थित स्काईवॉक के उद्घाटन के मौके पर केंद्र और केजरीवाल सरकार में ठनी रही. अंतत: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने उपराज्यपाल के साथ मिलकर उद्घाटन कर दिया और केजरीवाल सरकार को आमंत्रित ही नहीं किया गया.

केजरीवाल सरकार की तरफ से इसका पलटवार किया गया और अगले ही महीने नवंबर 2018 में यमुना नदी पर बने सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन अरविंद केजरीवाल ने कर दिया. इस समारोह में केंद्र सरकार को नहीं बुलाया गया. लेकिन दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी पहुंच गए और वहां धक्का-मुक्की की भी नौबत आ गई.

उद्घाटन समारोह में आए साथ

इन तमाम खटासों के बाद मंगलवार को केंद्र और दिल्ली सरकार की साझा तस्वीर सामने आई जब ओखला में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उद्घाटन किया गया. इस कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दोनों मौजूद रहे. केजरीवाल ने इसके लिए मोदी सरकार का धन्यवाद भी किया और ट्वीट में लिखा कि केंद्र सरकार के सहयोग के लिए बहुत बहुत शुक्रिया. मुझे विश्वास है कि हम मिलकर यमुना नदी को जल्द साफ करने में ज़रूर कामयाब होंगे.

वहीं, जब पिछले महीने महीने दिल्ली के अंदर 24 घंटे में 9 मर्डर हुए तो आम आदमी पार्टी नेताओं समेत खुद केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस से ट्विटर पर सवाल पूछे. लेकिन अगले ही मीडिया को दिए बयान में उन्होंने फिर केंद्र और दिल्ली सरकार द्वारा मिलकर काम करने की बात कही. हालांकि, बात जहां तक दिल्ली पुलिस की है तो अब तक केजरीवाल ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात नहीं की है, जिनके अधीन दिल्ली पुलिस आती है.

इस तरह लोकसभा चुनाव नतीजों के बाद से ऐसे कई मौके देखने को मिले हैं, जब केजरीवाल के बयानों में मोदी सरकार के प्रति न सिर्फ सहजता नजर आई है बल्कि वो बार-बार सहयोग की बात भी कर रहे हैं. चार साल से ज्यादा के कार्यकाल में केजरीवाल का ऐसा रुख पहली बार देखने को मिला है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay