एडवांस्ड सर्च

दिल्ली की राशन दुकानों से 'आजतक' की ग्राउंड रिपोर्ट

आजतक ने जमीनी हकीकत जानने के लिए अलग-अलग जगहों पर राशन की दुकानों का जायजा लिया, तो पता चला की आम जनता से लेकर राशन विक्रेता तक सभी सरकार और सिस्टम से परेशान हैं. इस दौरान दिल्ली के संगम विहार, गीता कॉलोनी, अम्बेडकर नगर और आनद परबत जैसे इलाकों में कई तथ्य सामने आए.

Advertisement
aajtak.in
राम कृष्ण/ स्मिता ओझा नई दिल्ली, 05 April 2018
दिल्ली की राशन दुकानों से 'आजतक' की ग्राउंड रिपोर्ट फाइल फोटो

दिल्ली की सीएजी रिपोर्ट में राशन को लेकर बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद राशन वितरण प्रणाली और राशन कार्ड के बनने से लेकर उससे जुड़ी तमाम खामियां और भष्टाचार उजागर हो गए हैं.

इस बीच आजतक ने जमीनी हकीकत जानने के लिए अलग-अलग जगहों पर राशन की दुकानों का जायजा लिया, तो पता चला की आम जनता से लेकर राशन विक्रेता तक सरकार और सिस्टम से परेशान हैं. आजतक की पड़ताल में दिल्ली के संगम विहार, गीता कॉलोनी, अम्बेडकर नगर और आनद परबत जैसे इलाकों में कई तथ्य सामने आए.

आजतक की ग्राउंड रिपोर्ट में ये तथ्य आए सामने

- सबसे ज्यादा दिक्कत राशन में लगी मशीनों से होती है. ज्यादातर मशीनें अंगूठे का निशान नहीं लेती हैं, जिसके चलते कई बार लोगों को घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ता है.

- राशन दुकानों पर पोर्टेबिलिटी हो जाने से लोगों को दिक्कतें भी हुईं और राहत भी मिली. इससे सबसे ज्यादा दिक्कत राशन विक्रेताओं को होती है, क्योंकि कई बार दूसरे इलाकों से भी लोग राशन लेने के लिए आ जाते हैं, जिससे उस इलाके के रहने वालों के लिए राशन कम पड़ जाता है और नुकसान इलाके के लोगों का होता है.

- राशन की दुकान चलाने वालों के मुताबिक अगर राशन कार्ड होल्डर्स की कायदे से जांच की जाए, तो 16 लाख राशन कार्ड धारकों में से सिर्फ दो-तीन लाख ही सही पाए जाएंगे, बाकी सब फर्जी हैं.

- संगम विहार में राशन की दुकान चलाने वाले अतुल का कहना है कि उनकी दुकान में कई बार लोग बड़ी गाड़ियों से राशन लेने पहुंचते हैं. कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिनके पास दो-तीन मंजिला मकान है और उनका दो से ढाई लाख रुपये किराया आता है. ऐसे लोग के राशन कार्ड बनने की वजह से जरूरतमंदों को कई दफा राशन नहीं मिल पाता है.

- दुकानदारों की अगर माने तो सबसे ज्यादा धांधली राशन कार्ड बनाने वालों की तरफ से होती है, जो जांच के लिए आता है, वो भी पैसे खाकर किसी के भी राशन कार्ड बना देता है. दिल्ली में सिर्फ 200 रुपये देकर अमीर से अमीर व्यक्ति भी अपना राशन कार्ड बनवा सकता है और गरीब अपने हक से वंचित रह जाते हैं.

- राशन की दुकान चलाने वालों का यह भी आरोप है कि सरकार से लेकर सरकारी कर्मचारी तक सभी भ्रष्ट हैं. छोटे-छोटे काम के लिए तक कमीशन लेते हैं. घूसखोरी की वजह से राशन की दुकान चलाने वाले भी खूब चोरी करते थे. पर अब POS मशीन आने से घूसखोरी और कालाबाजारी कम हो गई है.

CAG ने राशन वितरण प्रणाली में क्या खामियां पाई?

- आमतौर पर राशन कार्ड घर की महिला सदस्यों के नाम पर बनाया जाता है, लेकिन 13 मामलों में घर की सबसे बड़ी सदस्य की उम्र 18 साल से कम पाई गई. 12 हजार 852 मामलों में तो घरों में एक भी महिला सदस्य नहीं पाई गई.

- राशन का सामान ढोने वाली 207 गाड़ियों में से 42 गाड़ियां ऐसी थीं, जिनका रजिस्ट्रेशन परिवहन विभाग के पास था ही नहीं.

- आठ गाड़ियां ऐसी थीं, जिन्होंने 1500 क्विंटल से ज्यादा राशन ढुलाई की, लेकिन उनके रजिस्ट्रेशन नंबर बस, टू व्हीलर या थ्री व्हीलर के पाए गए.

- सभी राशन कार्ड धारकों को एसएमएस पर अलर्ट आने थे, लेकिन 2,453 मामलों में नंबर राशन दुकानदारों के ही निकले.

- राशन से जुड़ी समस्याओं को लेकर जो कॉल सेंटर बनाया गया, उनमें साल 2013 से साल 2017 के बीच आए तकरीबन 16 लाख कॉल में सिर्फ 42 फीसदी कॉल का जवाब दिया गया.

- सभी अधिकारियों को फील्ड इंस्पेक्शन करना था, लेकिन ऑडिट में ऐसे इंस्पेक्शन नहीं पाए गए.

- 412 राशन कार्ड ऐसे पाए गए, जिनमें परिवार के एक सदस्य का नाम ही कई बार लिखा गया था.

- राशन सिर्फ उन परिवारों को दिया जाता है, जो गरीब हैं, लेकिन एक हजार से ज्यादा कार्ड में नौकरों का नाम भी शामिल था यानी ऐसे उपभोक्ता भी हैं, जो नौकर रख सकते हैं. ऐसे लोग इनकम टैक्स भी नहीं देते हैं और न ही इनके पास दो किलोवाट से ज्यादा का बिजली कनेक्शन है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay