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नक्सली हिंसा के खिलाफ ठोस रणनीति से बस्तर में हालात बदलने की उम्मीद

केंद्रीय गृहमंत्री ने सोमवार को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मुख्य सचिवों, पुलिस और प्रशासन के अफसरों की बैठक बुलाई थी. सुकमा नक्सल हमले के बाद केंद्र ने देश के 35 सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों के लिए एक समन्वित कार्य योजना बनाई है. बैठक में नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने और जान-माल की क्षति कम करने के लिए बनाई गई नई 8 बिंदुओं की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई.

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aajtak.in
सुनील नामदेव रायपुर, 09 May 2017
नक्सली हिंसा के खिलाफ ठोस रणनीति से बस्तर में हालात बदलने की उम्मीद गृह मंत्री की प्रभावित राज्यों के CM के साथ बैठक

दिल्ली में यूनिफाइड कमांड की बैठक में लिए गए फैसलों से छत्तीसगढ़ में तैनात पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानो के लिए अच्छी खबर आई है. बैठक में गोली का जवाब गोली से देने के निर्देश के बाद जवानों का मनोबल काफी बढ़ गया है. यही नहीं नक्सल मोर्चे पर आलोचना झेल रही छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार के काम-काज को लेकर भी आम लोगों की राय में कुछ नरमी आयी है. लोगों को उम्मीद है कि यूनिफाइड कमांड की बैठक में लिए गए फैसलों को अगर ईमानदारी के साथ लागू किया जाता है तो बस्तर में जमीनी हालात बदलेंगे. खासतौर पर नक्सली खौफ के चलते जीवन यापन कर रही एक बड़ी आबादी को काफी राहत मिलेगी.

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निर्देश दिए है कि उग्र वामपंथियों को गोली का जवाब अब गोली से ही दिया जाये. राजनाथ सिंह ने कहा कि नक्सल मोर्चे पर अब हमारी केवल एक ही रणनीति होगी. वो है आक्रमण की रणनीति. साथ ही केंद्रीय सशस्त्र बलों और स्थानीय पुलिस के बीच भी जिम्मेदारियों को लेकर बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए गए हैं.

केंद्रीय गृहमंत्री ने सोमवार को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 10 राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मुख्य सचिवों, पुलिस और प्रशासन के अफसरों की बैठक बुलाई थी. सुकमा नक्सल हमले के बाद केंद्र ने देश के 35 सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिलों के लिए एक समन्वित कार्य योजना बनाई है. बैठक में नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने और जान-माल की क्षति कम करने के लिए बनाई गई नई 8 बिंदुओं की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई.

गृह मंत्रालय के आकड़ों के मुताबिक पिछले 20 वर्षों में 12 हजार लोगों ने नक्सल हमले में अपनी जान गंवाई है. जिसमें 2700 जवान और 9300 निर्दोष नागरिक शामिल हैं. नक्सलियों के निशाने पर सिर्फ सुरक्षा बलों के जवान नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति भी है. इसलिए वह सड़क, अस्पताल, स्कूल, मोबाइल टॉवर, पंचायत भवनों को निशाना बना रहे हैं. गृहमंत्री ने बैठक में कहा कि LWE इलाकों में विकास की गंगा बहाने के लिए हमें नक्सल मोर्चे पर आक्रमक रणनीति अपनाने की जरूरत है. राजनाथ सिंह ने यह भी हिदायत दी कि अब कोरी बयानबाजी नहीं की जाए, बल्कि आपके एक्शन से जनता में संदेश जाने चाहिए कि नक्सल मोर्चे पर सरकारें मजबूती से काम कर रही है.

बताया जा रहा है कि यूनीफाइड कमांड के फैसलों को जल्द से जल्द लागू करने के लिए मुख्यमंत्री रमन सिंह बस्तर से बैठक करने वाले हैं. इस बैठक में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के आला अफसरों समेत गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. बैठक में बारिश के पहले ही नक्सलयों के खिलाफ बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने के सभी पहलुओं पर चर्चा होगी. सुरक्षा बलों की कोशिश है कि बस्तर के वो इलाके जो बारिश के मौसम में चार माह तक बाढ़ और अत्यधिक पानी के कारण जंगली नदी-नालों में बदल जाते है और संपर्क विहीन हो जाते हैं, उन इलाकों को पहले पूर्ण रूप से नक्सल मुक्त किया जाए.

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