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सरपंच की अनूठी पहल, क्वारनटीन सेंटर में दिया मजदूरों को काम, बन रहे आत्मनिर्भर

गांव में चल रहे मनरेगा में काम में अभी क्वारनटीन में होने के वजह से दे पाना संभव नहीं था. इसलिए महिला सरपंच ने इन्हें काम देने के लिए योजना बनाई और श्रमिकों क्वारनटीन सेंटर में काम दिया.

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aajtak.in महासमुन्द (छत्तीसगढ़), 21 May 2020
सरपंच की अनूठी पहल, क्वारनटीन सेंटर में दिया मजदूरों को काम, बन रहे आत्मनिर्भर प्रतीकात्मक तस्वीर

  • ईंट बनाने के एवज में श्रमिकों को मिल चुका है 12 हजार रुपये तक का एडवांस
  • महासमुंद जिले के एक क्वारनटीन सेंटर में महिला सरपंच की अनूठी पहल

वैश्विक महामारी कोरोना से हुए लॉकडाउन से सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासी मजदूरों को उठानी पड़ रही है. दो वक्त की रोटी कमाने अन्य प्रदेश गए मजदूर सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर वापस लौट रहे हैं. वापस लौटने वाले प्रवासी मजदूरों लिए क्वारनटीन सेंटर बनाये गए हैं, जहां उन्हें 14 दिन के लिए रखा जा रहा है. देश के कई क्वारनटीन सेंटर से हंगामे की तस्वीरें सामने आ रही हैं तो वहीं छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के एक क्वारनटीन सेंटर से एक अच्छी तस्वीर निकलकर सामने आ रही है.

यहां क्वारनटीन सेंटर में रह रहे प्रवासी श्रमिकों को सेंटर में ही काम मिल रहा है जिससे श्रमिक क्वारनटीन अवधि पूरा करते हुए काम कर पैसे भी कमा रहे हैं और आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं. वैश्विक महामारी कोरोना की वहज से पूरे देश में 25 मार्च से लॉकडाउन लगा हुआ है. लॉकडाउन से काम, धंधे बंद हैं. ऐसे में सबसे ज्यादा परेशान प्रवासी मजदूर हैं. काम बंद होने के बाद जो पैसे मजदूरों के पास बचे थे राशन और अन्य जरूरी सामान खरीदने में खर्च हो गए.

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मजदूरों की हालत ये हो गई है कि खाली पेट, खाली जेब घर लौटें तो कैसे लौटें. सैकड़ों मजदूर कई किलोमीटर पैदल चलकर अपने गांव लौटे हैं. गांव लौटते ही उन्हें 14 दिन के लिए किसी स्कूल या किसी भवन में क्वारनटीन किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के एक क्वारनटीन सेंटर में रह रहे प्रवासी श्रमिकों को क्वारनटीन सेंटर में ही ईंट बनाने का काम मिल रहा है जिससे श्रमिकों क्वारनटीन अवधि पूरा करते हुए काम कर पैसे भी कमा रहे हैं और आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं.

ये संभव हुआ है महासमुन्द जिले के मानपुर पंचायत के महिला सरपंच ब्रिजेन बंजारे के सूझबूझ से, जिससे क्वारनटीन सेंटर में ही प्रवासी श्रमिकों को काम मिल गया है. दरअसल महासमुंद जिले के मानपुर पंचायत के 15 श्रमिक ईंट भट्ठा में काम करने छत्तीसगढ़ से ओडिशा गए थे. लॉकडाउन हो जाने से इनके सामने रोजी की समस्या उत्पन्न हो गई. जैसे-तैसे करके लॉकडाउन में अपने गृहग्राम मानपुर वापस लौटे. यहां पहुंचते ही शासन-प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार इन्हें क्वारनटीन कर गांव के स्कूल भवन में ठहराया गया.

आवास और भोजन की व्यवस्था तो पंचायत की ओर से कर दी गई. गांव में चल रहे मनरेगा के तहत काम में अभी क्वारनटीन होने की वजह से दे पाना संभव नहीं था. इसलिए महिला सरपंच ने इन्हें काम देने के लिए योजना बनाई और श्रमिकों से पूछा कि आप लोग क्या काम कर सकते हैं. श्रमिक ईंट बनाने का काम करते थे तो उन्हें ईंट बनाने की इच्छा जाहिर की तो महिला सरपंच ब्रिजेन बंजारे ने स्कूल प्रांगण में ही ट्रैक्टर से मिट्टी और रेत मंगवाई और ईंट बनाने का सांचा उपलब्ध करवाया और श्रमिकों को क्वारनटीन में रहते हुए क्वारनटीन सेंटर के मैदान में ईट बनाने का काम दिया.

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जहां अभी तक श्रमिकों ने कोई 20 तो कोई 25 हजार ईंट बना लिए हैं. ईंट बनाने के एवज में श्रमिकों को 10 से 12 हजार रुपये तक एडवांस दिया जा चूका है. क्वारनटीन सेंटर में मजदूर रमेश कुमार ने बताया कि काम करने ओडिशा गए थे. वह ईंट बनाने का काम कर रहे थे. लॉकडाउन हो जाने से काम बंद हो गया. मालिक ने पैसा देना बंद कर दिया. जो भी पैसा था राशन और जरूरी सामान खरीदने में ख़त्म हो गया. घर आने के लिए भी पैसे नहीं थे. कई किलोमीटर पैदल चलकर यहां पहुंचे हैं. आते ही क्वारनटीन कर गांव के स्कूल भवन में ठहराया गया.

दूसरे मजदूर माहेश्वरी ने बताया कि पूरे पैसे तो पहले ही खत्म हो गए थे. कुछ भी नहीं बचा था. खाने के लिए सरपंच ने व्यवस्था करा दी है. साथ ही सरपंच ने हमें ईंट बनाने का काम दिया है. लोगों का कहना कि क्वारनटीन में रह रहे लोगों को काम देकर उन्हें आत्म निर्भर बनाने की ये एक अच्छी पहल है. क्वारनटीन अवधि में भी श्रम करके आत्मनिर्भर होने का संभवतः यह छत्तीसगढ़ प्रदेश में पहला मामला है. जहां चाह वहां राह को चरितार्थ करते हुए इन श्रमिकों और महिला सरपंच ने अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है.

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