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हकीकत से कोसों दूर सुशील मोदी के दावे, खुले में शौच से मुक्त नहीं बिहार

सुशील मोदी ने यह भी दावा किया कि पिछले 5 सालों में केंद्र ने भारत को खुले में शौच से मुक्त करने का असंभव सपना महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के पहले ही पूरा कर दिया है.

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aajtak.in
रोहित कुमार सिंह पटना, 22 November 2019
हकीकत से कोसों दूर सुशील मोदी के दावे, खुले में शौच से मुक्त नहीं बिहार सुबह के वक्त खुले में शौच के लिए जाते लोग

  • 5 सालों में बिहार में एक करोड़ से ज्यादा शौचालय का हुआ निर्माण-सुशील मोदी
  • आज तक ने की दावों की पड़ताल, कई इलाकों में लोगों के पास नहीं शौचालय

'विश्व टॉयलेट डे' के अवसर पर उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने दावा किया कि बिहार के साथ साथ पूरा देश खुले में शौच से मुक्त हो गया है. सुशील मोदी ने ट्वीट करके दावा करते हुए कहा, 'पिछले 5 सालों में बिहार में एक करोड़ से ज्यादा शौचालय का निर्माण हुआ है और इसके लिए 70000 से भी ज्यादा राजमिस्त्री को प्रशिक्षित किया गया. मोदी ने दावा किया कि बिहार सरकार के इस पहल के बाद आखिरकार राज्य पूरी तरीके से खुले में शौच से मुक्त हो चुका है'.

सुशील मोदी का दावा

सुशील मोदी ने यह भी दावा किया कि पिछले 5 सालों में केंद्र ने भारत को खुले में शौच से मुक्त करने का असंभव सपना महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के पहले ही पूरा कर दिया है. उपमुख्यमंत्री के इन्हीं दावों की पड़ताल करने के लिए आज तक ने बुधवार को बिहार के 2 जिले वैशाली और भोजपुर जिले में रियलिटी चेक किया और जो बात सामने नजर आई वह काफी चौंकाने वाली थी.

रियलिटी चेक में पाया गया कि इन दो जिलों के कई इलाकों में सैकड़ों लोग सुबह के वक्त खुले में शौच करते दिखे. सुबह के वक्त वैशाली जिले के भगवानपुर प्रखंड में स्थित सतपुरा गांव के कई लोग खेतों की ओर शौच करते जाते दिखे.

वहीं सतपुरा गांव के निवासी एतवारी मांझी का कहना है, 'हम लोगों ने गांव में आज तक शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है इसी वजह से हम लोग रोज खेत में शौच करने जाते हैं. सरकार से हमें कोई मदद नहीं मिली है इसीलिए हम खेत में शौच करने जाते हैं.'

महिलाओं के लिए भी नहीं है शौचालय की व्यवस्था

हैरानी की बात यह है कि सुबह के वक्त पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी समूह बनाकर खुले में शौच के लिए जाते देखा गया. महिलाओं ने कहा कि उनके गांव में एक भी शौचालय नहीं है और अगर ऐसा होता तो वह फिर बाहर शौच के लिए कभी नहीं जाती.

सतपुरा गांव की निवासी फुलवा देवी ने कहा 'सरकार कुछ करती ही नहीं है इसीलिए हम महिलाओं को खेतों या पेड़ों के पीछे शौच करने के लिए जाना पड़ता है. हमारे गांव में एक भी शौचालय नहीं है इसलिए हम लोगों को बाहर जाना पड़ता है. दिन के वक्त हम लोगों को काफी दिक्कत होती है. घर में अगर शौचालय होता तो हम घर पर ही शौच जाते.'

सुशील कुमार मोदी के दावे कितने सही

गौरतलब है सुशील कुमार मोदी ने एक और दावा भी किया था कि बिहार में हाल के दिनों में आए बाढ़ की वजह से जो भी शौचालय क्षतिग्रस्त हो गए हैं या फिर टूट गए हैं उनको भी जल्द से जल्द बनवाने के लिए सरकार पहल कर रही है.

इसी को लेकर मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा 'बिहार सरकार निरंतर प्रयासरत है कि बाढ़ में क्षतिग्रस्त, अस्थाई घुमंतू लोग समेत जहां भी शौचालय निर्माण की जरूरत है उसे लगातार पूरा कर रही है. कोई पीछे नहीं छूट जाए इसकी खोज और सर्वेक्षण कर तत्काल शौचालय निर्माण कार्य पूरा हो रहा है.'

आजतक सुशील मोदी के इस दावे की भी सच्चाई जानने के लिए मधुबनी जिले के आजौल और गोपलखा गांव पहुंची. स्थानीय लोगों ने आजतक को बताया कि इस साल आए भीषण बाढ़ में कई घरों के शौचालय छतिग्रस्त हो गए मगर इसके बावजूद भी अब तक बिहार सरकार ने नए शौचालय निर्माण के लिए कोई कदम नहीं उठाया है.

सुशील मोदी द्वारा बिहार को खुले में शौच से मुक्त बताने के दावे पर आरजेडी ने उन पर पलटवार किया. उन्होंने कहा, 'उनके किए गए दावे सच्चाई से कोसों दूर है.' आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, 'सुशील मोदी का दावा पूरी तरीके से हवा हवाई और झूठ है. इस योजना का लाभ बिहार के सभी लोगों को अब तक नहीं मिल रहा है. सरकार झूठे दावे करके जनता को बरगला रही है.'

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