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बिहार में इस सिस्टम से किसानों को 48 घंटे में मिल रहा है भुगतान

बिहार में इस सिस्टम से किसानों को 48 घंटे में मिल रहा है भुगतान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
सुजीत झा [Edited By: राम कृष्ण]पटना, 14 February 2018

बिहार में किसानों को 48 घंटे के अंदर उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए ऑनलाइन एजवाइस सिस्टम की शुरुआत की गई है. इसका किसानों को फायदा भी मिलने लगा है. इससे पहले किसान की उपज राज्य खाद्य निगम और बिस्कोमान के माध्यम से खरीदी जाती थी, जिससे किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा था.

इस समस्या से किसानों को छुटकारा दिलाने के लिए बिहार सरकार ने इस बार सहकारिता विभाग को किसानों की उपज खरीदने का जिम्मा दिया. इस पर सहकारिता विभाग ने अपने पैक्स और व्यापार मंडल के जरिए इसको सफल बनाया है. सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसमें दिलचस्पी दिखाते हुए ऐसी व्यवस्था की, जिससे किसानों को 48 घंटे के अंदर अपने अनाज की कीमत मिलने लगी है.

इस बार राज्य अंतर्गत खरीफ अधिप्राप्ति के लिए निबंधित किसानों से पैक्स द्वारा धान खरीदा गया. इसके लिए ऑनलाइन एडवाइस जेनरेट की जाती है, जिसको संबंधित नोडल पदाधिकारी से सत्यापित कराया जाता है. इसके बाद एडवाइस को संबंधित पैक्स के बैंक शाखा में जमा कराया जाता है. फिर आरटीजीएस/एनईएफटी के माध्यम से धनराशि संबंधित किसानों के खाते में 48 घंटे के भीतर ट्रांसफर कर दी जाती है.

सहकारिता विभाग ने पारदर्शी के लिए ई-प्रोक्यूरमेंट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है. इसमें किसानों का निबंधन ऑनलाइन कराने की व्यवस्था है और धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 48 घंटे के अंदर उपलब्ध कराया जाता है. राज्य के अधिकाधिक किसानों को लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से रैयती औरक गैर-रैयती किसानों को अधिप्राप्ति कार्य करने हेतु ऑनलाइन निबंधन कहीं से भी कराने की छूट दी गई है. ऑनलाइन निबंधन की व्यवस्था NIC के माध्यम से संचालित विभागीय पोर्टल द्वारा की गई है.

किसानों को निबंधन के लिए व्यक्तिगत सूचनाएं, फोटो लगा परिचय पत्र, बैंक खाता का विवरण, LPC और मालगुजारी रसीद (रैयती किसानों के लिए) और घोषणा पत्र (गैर रैयती किसानों के लिए) अनिवार्य है. वैसे किसान जो दूसरे की जमीन पर खेती करते हैं, उनके लिए प्रति किसान 50 क्विंटल अधिकतम् धान अधिप्राप्ति की मात्रा निर्धारित की गई. इन किसानों को धान बिक्री हेतु निबंधन के समय सिर्फ पहचान पत्र के अलावा जिस जमीन पर खेती करते हैं, उसका घोषणा पत्र उपलब्ध कराना है, जो वर्ष 2017 से लागू भी हो चुका है.

दूसरे की जमीन पर खेती करने वाले किसानों को इससे सुगमता पूर्वक बिक्री करने और उपज का वास्तविक लाभ मिलने लगा है. बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां की लगभग 80 फीसदी आबादी कृषि पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर है. कृषि विभाग के अनुसार राज्य में कुल 56 लाख हेक्टेयर (141 लाख एकड़) कृषि योग्य भूमि का उपयोग किया जाता है, जिसमें 33 लाख हेक्टेयर भूमि पर केवल धान की खेती की जाती है.

राज्य में धान कटनी के प्रारंभिक महीनों (अक्टूबर-नवंबर) में धान की नमी की मात्रा भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानक 17 प्रतिशत पहले थी. राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने इसे बढ़ाकर 19 प्रतिशत कर दिया है. इस वजह से लघु और सीमांत किसानों को अपने उपज को बेचने में सहूलियत हो रही है. इससे धान की अधिप्राप्ति पहले की तुलना में इस वर्ष बहुत बढ़ी है.

सहकारिता विभाग द्वारा नमी प्रबंधन हेतु पायलट प्रोजेक्ट अंतर्गत मुरादाबाद पैक्स (रोहतास) में ड्रायर की स्थापना की गई है. राज्य के अन्य सक्षम पैक्स, व्यापार मंडलों में भी ड्रायर की स्थापना के लिए कार्रवाई की जा रही है. अधिप्राप्ति कार्य हेतु राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2016-17 तक 600 करोड़ रुपये की राशि ऋण के रूप में उपलब्ध कराई गई है. इस राशि के अतिरिक्त राज्य सहकारी बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के स्वयं संसाधन से भी लगभग 400 करोड़ रुपये की राशि की व्यवस्था कर उसके चक्रीय उपयोग कर अधिप्राप्ति कार्य किया जाता है. 48 घंटे के अंदर किसानों को उनके उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सफलतापूर्वक उपलब्ध कराया जा रहा है.

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