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GST को और सरल बनाएगी बिहार सरकार, सुशील मोदी ने करोबारियों से मांगे सुझाव

सुशील मोदी ने कहा कि जीएसटी लागू होने के पहले महीने बिहार के एक लाख 85 हजार करदाताओं में से एक लाख 35 हजार यानी 72 प्रतिशत ने रिटर्न दाखिल किया जबकि अगस्त में 55 और सितम्बर में मात्र 41 प्रतिशत ही रिटर्न दाखिल कर पाए.

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aajtak.in
सुजीत झा पटना, 02 November 2017
GST को और सरल बनाएगी बिहार सरकार, सुशील मोदी ने करोबारियों से मांगे सुझाव कारोबारियों के साथ सुशील मोदी की बैठक

जीएसटी नेटवर्क में आ रही दिक्कतों को जानने के लिए बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने व्यापारिक और उद्यमी संगठनों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना. उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि आने वाले दिनों में कम्पोजिट स्कीम में शामिल व्यापारियों के टर्न ओवर की सीमा को डेढ़ करोड़ तक किया जा सकता है.

सुशील मोदी ने कहा कि सैद्धांतिक रूप से इस पर सहमति बनी है. निबंधन में संशोधन के लिए कोर और नॉन कोर सेक्टर में सुविधा प्रारंभ कर दी गई है. इस मौके पर उन्होंने प्रतिनिधियों के सुझावों को भी सुना. मोदी ने कहा कि जीएसटी लागू होने के पहले महीने बिहार के एक लाख 85 हजार करदाताओं में से एक लाख 35 हजार यानी 72 प्रतिशत ने रिटर्न दाखिल किया जबकि अगस्त में 55 और सितम्बर में मात्र 41 प्रतिशत ही रिटर्न दाखिल कर पाए. रिटर्न दाखिल करने के फार्म को और सरल किया जायेगा. विलम्ब शुल्क को समाप्त कर दिया गया है और जुलाई, अगस्त और सितम्बर तक का शुल्क वापस हो जायेगा.   

जीएसटी-2 ऑफलाइन वर्जन के अन्तर्गत करदाता बगैर इंटरनेट कनेक्टिविटी के जीएसटीआर-2 का मिलान कर सकते हैं. साथ ही उसे स्वीकार, अस्वीकार या संशोधन के बाद इंटरनेट पर उपलब्ध होने के बाद अपलोड कर सकते हैं. कम्पाउंडिंग स्कीम के करदाताओं को कर देने के लिए विकल्प की सुविधा अगले 31 मार्च तक दी गई है. डेढ़ करोड़ तक रसीद पर बिक्री के समय ही कर देना पड़ेगा. अगले साल 31 मार्च तक रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म को स्थगित कर दिया गया है. 20 लाख तक के सेवा प्रदाता को अन्तर राज्य कर योग्य सर्विस के बावजूद निबंधन की जरूरत नहीं होगी.  

सुशील मोदी ने बताया कि जीएसटी दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्क है जिसके अन्तर्गत एक घंटे में एक लाख तो एक दिन में 12 लाख तक रिटर्न दाखिल हुए हैं. 37 राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों और केन्द्र की वैट प्रणाली को जीएसटी के अन्तर्गत एक जगह एकट्ठा किया गया है. जीएसटी काउंसिल करदाताओं को हर संभव राहत देने के लिए प्रयासरत है.

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