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शराबबंदी के बावजूद बिहार में बहार, पर्यटकों की संख्या 68 प्रतिशत बढ़ी

बिहार में शराबबंदी के बाद जो लोग यह सोच रहे थे कि राज्य में पर्यटन उद्योग को जबर्दस्त धक्का लगेगा, वे असल में मुगालते में हैं. बिहार सरकार पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में बिहार में देसी पर्यटकों के आगमन में 68 प्रतिशत और विदेशी पर्यटकों के आगमन में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 

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aajtak.in
सुजीत झा नई दिल्ली, 25 April 2017
शराबबंदी के बावजूद बिहार में बहार, पर्यटकों की संख्या 68 प्रतिशत बढ़ी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

बिहार में शराबबंदी के बाद जो लोग यह सोच रहे थे कि राज्य में पर्यटन उद्योग को जबर्दस्त धक्का लगेगा, वे असल में मुगालते में हैं. बिहार सरकार पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में बिहार में देसी पर्यटकों के आगमन में 68 प्रतिशत और विदेशी पर्यटकों के आगमन में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. गौरतलब है कि बिहार में शऱाबबंदी 1 अप्रैल 2016 से शुरू हई और पूर्ण शराबबंदी 5 अप्रैल से लागू है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इससे काफी उत्साहित लग रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग यह प्रचारित कर रहे थे कि बिहार में शराबबंदी के बाद पर्यटन उद्योग को भारी धक्का लगेगा, उनके लिए यह करारा जवाब है. आकड़ों के मुताबिक 2015-16 में बिहार में एक करोड़ 69 लाख पर्यटक आए थे, जबकि 2016-17 में यह बढ़कर 2 करोड़ 85 लाख तक पहुंच गया है.

नीतीश कुमार ने कहा कि शराबबंदी से राज्य के राजस्व पर भी ज्यादा प्रभाव नही पड़ा है. 2015-16 के मुकाबले 2016-17 में मामूली कमी आई है, वो भी शराबबंदी की वजह से नही बल्कि नोटबंदी का असर ज्यादा है. उन्होंने कहा कि नोटबंदी का रजिस्ट्री पर जबरदस्त असर पडा. इसके राजस्व में जबरदस्त कमी आई जिसका असर राज्य के सकल वसूली पर भी दिखा.

नीतीश कुमार ने ये भी कहा कि शराबबंदी की वजह से अन्य कंज्यूमर गुड्स की खरीद व बिक्री बढ़ी है, जिससे काफी हद तक शराबबंदी से हो रहे राज्य के राजस्व की भरपाई हो पाई है. बिहार में 1 अप्रैल 2016 को देसीशराब को बंद कर दिया गया. बाद में 5 अप्रैल को पूर्ण शराबबंदी यानि देसी, अंग्रेजी शराब पर भी कैबिनेट के फैसले के बाद प्रतिबंध लगा दिया गया.

 

शराब की किसी तरह तस्करी न हो इसके लिए विधानसभा में कड़े कानून बनाए गए, लेकिन 30 सितंबर को पटना हाईकोर्ट ने कानून को निरस्त कर दिया. लेकिन सरकार ने 2 अक्टूबर को न सिर्फ शराबबंदी का नया कानून लागू कर दिया, बल्कि पटना हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. नीतीश कुमार के शराबबंदी के फैसले को काफी सराहा गया.

शराब की तस्करी के आऱोप में 90 हजार से अधिक लोगों को जेल भेजा गया, तब विरोधियों ने कहना शुरू किया कि शराबबंदी से बिहार सरकार को राजस्व की जबरदस्त हानि होगी, क्योंकि शराब नीति के तहत राज्य सरकार की कमाई पांच हजार करोड़ रुपये थी, लेकिन नीतीश कुमार के मुताबिक नए कर लगा कर सरकार ने इसकी भरपाई कर ली है. पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हो ही रही है. ऐसे में अन्य राज्य भी नीतीश कुमार के शराबबंदी की नीति को अपना सकते है.

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