एडवांस्ड सर्च

बिहार में यदुवंशियों और कुशवंशियों के गठजोड़ से कितनी मीठी बनेगी 'सियासी खीर'?

बिहार की राजनीति में एनडीए में बीजेपी सहयोगी दल आरएलएसपी की राह अलग होती दिख रही है. पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने यदुवंशियों और कुशवंशियों फॉर्मूले से 'सियासी खीर' बनाने के संकेत दिए हैं. इन दोनों के मिलने से खीर कितनी मीठी होगी ये तो वक्त ही तय करेगा?

Advertisement
aajtak.in
कुबूल अहमद नई दिल्ली, 27 August 2018
बिहार में यदुवंशियों और कुशवंशियों के गठजोड़ से कितनी मीठी बनेगी 'सियासी खीर'? उपेंद्र कुशवाहा और तेजस्वी यादव

बिहार की सियासत नई करवट लेती नजर आ रही है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार को बीजेपी साधने में जहां कामयाब हुई, वहीं अब आरएलएसपी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने 'सियासी खीर' बनाने का फॉर्मूला दिया है. इसके लिए उन्होंने यदुवंशियों और कुशवंशियों के गठजोड़ के संकेत दिए हैं. लेकिन सवाल ये है कि क्या दोनों के मिलन से खीर में मिठास घुल पाएगी?

बिहार की राजनीति में 2017 में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव का साथ छोड़कर दोबारा एनडीए में शामिल हो गए हैं. राज्य में बीजेपी नीतीश कुमार को बड़ा भाई भी मानने के लिए राजी नजर आ रही है. ऐसे में नीतीश और बीजेपी के बीच गहरी होती दोस्ती 2014 में मोदी के साथी बने उपेंद्र कुशवाहा को रास नहीं आ रही है. दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है की कहावत को चरितार्थ करने की कवायद बिहार में हो रही है.

मोदी सरकार में मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने दो दिन पहले ही पटना में बीपी मंडल की जन्मशती समारोह में इशारों-इशारों में आरजेडी के साथ गठबंधन के संकेत दिए हैं. कुशवाहा ने कहा, 'यदुवंशी (यादव) का दूध और कुशवंशी (कोइरी समाज) का चावल मिल जाए तो खीर बढ़िया होगी और उस स्वादिष्ट व्यंजन के बनने से कोई रोक नहीं सकता है.'

हालांकि, उन्होंने इसे और स्‍पष्‍ट करते हुए कहा कि यह खीर तब तक स्वादिष्ट नहीं होगी जब तक इसमें छोटी जातियों और दबे-कुचले समाज का पंचमेवा नहीं पड़ेगा. यही सामाजिक न्याय की असली परिभाषा है.

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट करते हुए उपेंद्र कुशवाहा के बयान का समर्थन किया है. तेजस्वी ने कहा है कि निसंदेह स्वादिष्ट और पौष्टिक खीर श्रमशील लोगों की जरूरत है. पंचमेवा के स्वास्थ्यवर्धक गुण न केवल शरीर बल्कि स्वस्थ समतामूलक समाज के निर्माण में भी ऊर्जा देते हैं. प्रेम भाव से बनाई गई खीर में पौष्टिकता, स्वाद और ऊर्जा की भरपूर मात्रा होती है और यह एक अच्छा व्यंजन है.

2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव इस बार यादव, मुस्लिम और दलित मतों के साथ-साथ ओबीसी मतों को भी अपने पाले में लाने की कवायद कर रहे हैं. जबकि वहीं एनडीए में नीतीश की एंट्री के बाद उपेंद्र कुशवाहा के लिए बहुत ज्यादा राजनीतिक जगह बची नहीं है. ऐस में कुशवाहा भी एक मजबूत सियासी साथी के तलाश में हैं.

उपेंद्र कुशवाहा और लालू प्रसाद यादव एक दूसरे के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं. उपेंद्र कुशवाहा कोइरी समाज से आते हैं, बिहार में इस समुदाय का करीब 3 फीसदी वोट हैं. जबकि लालू प्रसाद यादव का मूल वोट बैंक यादव और मुस्लिम हैं. बिहार की कुल जनसंख्या में 16 फीसदी मुस्लिम और 14.4 फीसदी यादव आबादी है. इसके अलावा दलित और पिछड़ों में अच्छा खासा लालू का जनाधार है.

ऐसे में कुशवाहा और लाल यादव साथ आते हैं तो राज्य के एक मजबूत सियासी समीकरण बन सकता है. इसी मद्देनजर तेजस्वी यादव लगातार उपेंद्र कुशवाहा की तारीफ करते रहे हैं. वहीं, कुशवाहा भी लालू यादव से अपने रिश्ते मजबूत करने के लिए वक्त-बे-वक्त मिलते रहे हैं.

बता दें कि 2014 के लिए जब बीजेपी ने नरेंद्र मोदी के नाम की घोषणा की तो नीतीश कुमार ने एनडीए से अलग होकर लालू यादव से हाथ मिला लिया. ऐसे में बीजेपी ने बिहार के छोटे छोटे दलों को अपने साथ लेकर 2014 के रण को फतह किया था.

इनमें उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) और रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी भी शामिल थी. बीजेपी के साथ गठबंधन का नतीजा ये रहा कि RLSP के तीन लोकसभा सदस्य जीतने में सफल रहे और जब मोदी सरकार बनी तो उपेंद्र कुशवाहा को मंत्री पद से नवाजा गया.

पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को महागठबंधन से अलग कर अपने साथ मिलाकर लालू यादव को बड़ी राजनीतिक मात दी थी. ऐसे में आरजेडी भी मोदी से हिसाब बराबर करना चाहती है. आरजेडी ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को एनडीए से निकालकर अपने साथ मिलाकर बीजेपी को झटका दे चुकी हैं.  

मांझी के बाद अब कोइरी समुदाय से आने वाले उपेंद्र कुशवाहा को मिलाकर आरजेडी बीजेपी से हिसाब बराबर करना चाहती हैं. वहीं, कुशवाहा भी नीतीश कुमार से अपनी राजनीतिक दुश्मनी का हिसाब करना चाहते हैं. लेकिन देखना होगा कि यदुवंशियों और कुशवंशियों के गठजोड़ से बनने वाली सियासी खीर कितनी मीठी होगी?

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay