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बिहार: बीजेपी-जेडीयू ने लालू के मुस्लिम-यादव वोट बैंक में भी लगाई सेंध

बिहार में जातिवाद का फैक्टर हमेशा से बहुत अहम रहा है. लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के लिए पिछले तीन दशक से यादवों और मुस्लिमों को पारम्परिक वोट बैंक माना जाता रहा है, लेकिन इस लोकसभा चुनाव में डेटा बताते हैं कि इन दोनों समुदायों से वोटों का कुछ हिस्सा बीजेपी की अगुआई वाले NDA को भी गया.

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aajtak.in
रोहित कुमार सिंह / खुशदीप सहगल नई दिल्ली, 08 July 2019
बिहार: बीजेपी-जेडीयू ने लालू के मुस्लिम-यादव वोट बैंक में भी लगाई सेंध बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Courtesy- aajtak.in)

बिहार में महागठबंधन की ओर से NDA को कड़ी चुनौती देने की बात की जा रही थी, लेकिन साल 2019 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक सीट को छोड़कर राज्य की बाकी सभी 39 सीटों पर शिकस्त का मुंह देखना पड़ा. एक्सिस माई इंडिया सर्वे ने दिखाया कि बिहार में सभी जातियों और वर्गों ने हालिया लोकसभा चुनाव में एनडीए के लिए वोट किया.

देश की हिन्दी बेल्ट की राजनीति में, खास तौर पर बिहार में, जातिवाद का फैक्टर हमेशा से बहुत अहम रहा है. लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के लिए पिछले तीन दशक से यादवों और मुस्लिमों को पारम्परिक वोट बैंक माना जाता रहा है, लेकिन इस लोकसभा चुनाव में डेटा बताते हैं कि इन दोनों समुदायों से वोटों का कुछ हिस्सा बीजेपी की अगुआई वाले NDA को भी गया.

मुस्लिमों में 13% और यादवों में 27% ने बीजेपी-जेडीयू के पक्ष में वोट दिया. एससी वोटरों में 63%  और एसटी वोटरों में 62% का समर्थन एनडीए को मिला. अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), जिसे जेडीयू का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता रहा है, से 71% वोटरों ने NDA को वोट दिया. सवर्ण वोटरों (73%) का समर्थन बीजेपी-जेडीयू को मिला.  

दूसरी तरफ महागठबंधन यादवों और मुस्लिमों को छोड़कर अन्य जातियों को लुभाने में नाकाम रहा. यादवों में 56%  और मुस्लिमों में 65%  ने गठबंधन के पक्ष में वोट दिया. जहां तक अन्य जातियों का सवाल है, तो एससी में 18%, एसटी में 22%,  ओबीसी में 13% और सवर्णों में 10% का वोट महागठबंधन को गया.

सामाजिक सूचकांक और वोटरों की आर्थिक स्थिति की बात की जाए, तो एक्सिस माई इंडिया सर्वे ने दिखाया कि समाज के सबसे निचली पायदान पर खड़े यानी गरीबी रेखा से नीचे के वर्ग (बीपीएल) ने NDA को वोट दिया. बीपीएल परिवारों में से 53% जो सालाना 5,000 रुपये से भी कम कमाते हैं, ने NDA को वोट दिया. इसी तरह 6,000-10,000 रुपये सालाना आमदनी वाले वोटरों में से 53% ने NDA का साथ दिया. 11,000-20,000 और 21,000-30,000 आय वाले वर्गों में से 54%-54% वोटरों  ने NDA का साथ दिया. 31,000 रुपये से अधिक आमदनी वाले वर्ग में से 49% वोटरों ने NDA के समर्थन में वोट दिया.

जहां तक यूपीए का सवाल है, तो बीपीएल वोटरों में से सिर्फ 29%, 6000-10000 रुपये सालाना आय वर्ग में से 29%, 11000-20000 आय वर्ग में से 28%, 21000-30000 आय वर्ग में 29%  और 31,000 रुपए वाले आय वर्ग में से 33% ने गठबंधन के पक्ष में वोट दिया.  

लोकसभा चुनाव में निरक्षर से लेकर उच्च शिक्षित वर्गों में से बड़ी संख्या में NDA के लिए वोट दिया. एक्सिस-माई-इंडिया सर्वे के मुताबिक निरक्षरों में से 49%, आठवीं कक्षा तक पढ़े वोटरों में से 54% , दसवीं तक पढ़े वोटरों में से 56%,  बारहवीं तक पढ़े वोटरों में से 53%, ग्रेजुएट वोटरों में 54%, पोस्ट ग्रेजुएट वोटरों में 53% और प्रोफेशनल डिग्री रखने वालों में 50%  ने बिहार में बीजेपी-जेडीयू के समर्थन में वोट दिया.

वहीं महागठबंधन की बात की जाए तो शिक्षा के लिहाज से वर्ग कोई भी हो, राज्य के अधिकतर वोटरों ने उससे दूर रहना ही बेहतर समझा. निरक्षरों में से 32%, आठवीं तक पढ़े वर्ग में से 29%, दसवीं तक पढ़े वोटरों में से 27%,  बारहवीं तक पढे वोटरों में से 29%, ग्रेजुएट वोटरों में 27%, पोस्ट ग्रेजुएट वोटरों में 29% और  प्रोफेशनल डिग्री रखने वालों में 29%  ने बिहार में बीजेपी-जेडीयू के समर्थन में वोट दिया.

अगर विभिन्न आयु वर्गों की बात की जाए, तो 18 साल के वोटरों से लेकर 60+ आयु या उससे भी ऊपर के अधिकतर वोटरों ने NDA को वोट दिया. एक्सिस माई इंडिया सर्वे के मुताबिक 18-25 आयु वर्ग के वोटरों में से 49% ने NDA को वोट दिया. इसी तरह 26-35 वर्ष आयुवर्ग में से 53%, 36-50 वर्ष आयुवर्ग में 54%, 51-60 आयु वर्ग में 54% और 61 वर्ष और ऊपर के आयु वर्ग से ऊपर के 57% वोटरों ने बिहार में NDA को वोट दिया.

महागठबंधन का आयुवर्ग के मोर्चे पर भी प्रदर्शन लचर रहा. 18-25 आयु वर्ग के वोटरों में से 32% ने NDA को वोट दिया. इसी तरह 26-35 वर्ष आयुवर्ग में से 28%, 36-50 वर्ष आयुवर्ग में 28%, 51-60 आयु वर्ग में 27% और 61 वर्ष और ऊपर के आयु वर्ग से ऊपर के 27% वोटरों ने बिहार में NDA को वोट दिया.   

नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता में आने की स्थिति में 2 करोड़ रोजगार हर साल देने का वादा किया था, लेकिन इस मोर्चे पर अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बावजूद बेरोजगार वोटरों ने बिहार में NDA को वोट दिया. इसके अलावा महिलाओं, खास तौर पर गृहणियो ने भी NDA का समर्थन किया. इनके अलावा छात्रों, मजदूर वर्ग, कृषि मजदूरों ने भी NDA में विश्वास जताया.

एक्सिस माई इंडिया सर्वे के मुताबिक 49% बेरोजगारों, 58% गृहणियों, 48% छात्रों, 52% मजदूरों और 50% कृषि मजदूरों ने NDA के समर्थन में वोट दिया. जहां तक महागठबंधन का सवाल है तो 32% बेरोजगारों, 26% गृहणियों, 32% छात्रों, 30% मजदूरों और 32% कृषि मजदूरों ने NDA के समर्थन में वोट दिया.

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