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बिहार में आफत की बारिश को लेकर प्रशासन सतर्क

सितंबर का दूसरा हफ्ता बिहार के लिए आफत बनकर आ सकता है. मौसम विभाग की माने तो सितंबर के दूसरे हफ्ते से बिहार के उतर और पूर्व इलाकों में भारी बारिश की संभावना है. नेपाल के पहाडी क्षेत्रों में बादल फटने की भी आशंका है जिसका सीधा असर उत्तर बिहार पर पड़ेगा.

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aajtak.in
सुजीत कुमार झापटना, 06 September 2013
बिहार में आफत की बारिश को लेकर प्रशासन सतर्क

सितंबर का दूसरा हफ्ता बिहार के लिए आफत बनकर आ सकता है. मौसम विभाग की माने तो सितंबर के दूसरे हफ्ते से बिहार के उतर और पूर्व इलाकों में भारी बारिश की संभावना है. नेपाल के पहाडी क्षेत्रों में बादल फटने की भी आशंका है जिसका सीधा असर उत्तर बिहार पर पड़ेगा.

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद बिहार सरकार का आपदन प्रबंधन विभाग राहत और बचाव का इंतजाम करना भी शुरू कर दिया है. हांलाकि मौसम विभाग ने ये भी कहा है कि बादल फटने जैसी आशंकाओं पर वो 48 घंटे पहले सूचना दे सकता है लेकिन ऐतिहातन उतर बिहार के सभी जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है. बिहार सरकार ने एडीआरएफ की और टुकड़ियां भारत सरकार से मांगी है.

बिहार में गंगा नदी ने अपना विकराल रूप धारन किया है. सोन नदी गरज रही है. सरयू में पानी लबालब भरा है. यही हाल कोशी और गंडक नदियों का भी है. सब खतरे के निशान से उपर है. ऐसे में कैचमेंट एरिया में अगर बादल फटता है तो क्या होगा. ये चिन्ता सबको खाये जा रही है.

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार बिहार के उतरी और पूर्वी इलाकों हैवी भारी बारिश की संभावना है. 8 सितंबर से तीन चार दिनों तक लगातार बारिश हो सकती है. उतराखंड में जान माल की भारी तबाही को देखते हये मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है. भारतीय मौसम विज्ञान पटना के निदेशक ए के सेन ने कहा है बादल फटने की संभावना हिमालय के क्षेत्र में हो सकती है जो इलाका नेपाल में पडता है. बादल फटने के बाद पानी का जल स्तर नदियों में और बढ सकते है जो पहले से भरी नदियों में उफान ला सकता है.

बिहार में वैसे तो सितंबर का महीना हर साल आफत ले कर आती है. क्योंकि इन दिनों नदियों में बाढ़ का पानी लबालब भरा होता है. लेकिन इस बार स्थिति कुछ ज्यादा चिन्ताजनक है. पूरे देश में और खास उतर भारत में इस बार सामान्य से 11 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है. यही वजह है कि गंगा नदी की बाढ़ ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. ऐसे में अगर बिहार के नदियों के कैचमेंच एरिया जैसे नेपाल में भारी बारिश होती है तो स्थिति काफी भय़ावह हो सकती है.

पूरे देश में अगर सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है तो इस साल 31 अगस्त तक बिहार में सामान्य से 21 प्रतिशत कम बारिश हुई है. लेकिन सितंबर महीने में इस कमी को पूरा करने के लिए बारिश ने अपना रंग दिखाना शुरू दिया है. 1 से 5 सितंबर तक बिहार में सामान्य से 127 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है. जबकि पटना में 326 प्रतिशत ज्यादा बारिश रिकार्ड की गई है.

8 सितंबर से शुरू हो रही हैवी रैन की भविष्यवाणी की स्थिति से निपटने के लिए बिहार सरकार के आपदा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है. बिहार सरकार में आपदा के प्रधान सचिव ब्यास जी ने कहा कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान को लेकर प्रशासन सतर्क है. उन्होंने कहा कि राहत और बचाव के लिए तमाम उपाय किए जा रहे हैं. सारी स्थियों पर नजर रखी जा रही है. हालांकि बदल फटने जैसे बातों से वो इन्कार कर रहे है.

हालांकि थोड़ी राहत की बात ये है कि गंगा के जल स्तर में थोड़ी कमी आई है. लेकिन अगर मौसम विभाग का पूर्वानुमान अगर सही होता है तो निश्चित रुप से स्थिति की भयावहता का आकलन करना मुश्किल होगा. वैसे मौसम विभाग के मुताबिक इस आपदा का ज्यादा असर पटना पर ज्यादा नही पडेगा. लेकिन सरकार 1975 की बाढ़ की स्थिति को देखते हुये पूरी सतर्कता बरत रही है यानी खतरा अभी टला नही है.

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