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अनोखा सरकारी स्कूल: 2 कमरों में लगती हैं 8 क्लास, एक साथ पढ़ाते हैं 2 टीचर

बिहार के वैशाली जिले में एक स्कूल ऐसा भी है जो केवल दो कमरों में चलता है और इन कमरों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे पढ़ाई करते हैं. हैरानी तब और ज्यादा होती है जब एक ही ब्लैक बोर्ड पर 2 शिक्षक एक साथ दो कक्षा के छात्रों को पढ़ाते हैं.

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aajtak.in
रोहित कुमार सिंह वैशाली, 19 September 2019
अनोखा सरकारी स्कूल: 2 कमरों में लगती हैं 8 क्लास, एक साथ पढ़ाते हैं 2 टीचर वैशाली का सरकारी स्कूल

  • दो कमरों में 8 कक्षाएं, एक कमरे में दो शिक्षक
  • बोरे पर बैठकर पढ़ते हैं छात्र, स्कूल में नहीं है टेबल

बिहार के वैशाली जिले में एक स्कूल ऐसा भी है जो केवल दो कमरों में चलता है और इन कमरों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे पढ़ाई करते हैं. हैरानी तब और ज्यादा होती है जब एक ही ब्लैक बोर्ड पर 2 शिक्षक एक साथ दो कक्षा के छात्रों को पढ़ाते हैं.

राजधानी पटना से महज 40 किलोमीटर की दूरी पर वैशाली के लालगंज इलाके के बसंता टोला गांव में स्थित है राजकीय मध्य विद्यालय जो पिछले कई वर्षों से केवल दो कमरों में चल रहा है. इन दो कमरों में कक्षा 1 से 8 तक के  तकरीबन 250 बच्चे एक साथ पढ़ाई करते हैं.

संसाधनों की बात की जाए तो कक्षा 1 से 4 तक के बच्चे सबसे बदनसीब हैं क्योंकि स्कूल में बैठने के लिए इनके पास टेबल और कुर्सी तक नहीं है. इन 4 कक्षाओं के छात्रों को हमेशा स्कूल आने से पहले अपने बैठने का इंतजाम भी साथ लेकर आना पड़ता है यानी कि घर से यह सभी छात्र एक बोरी साथ आते हैं जिसे जमीन पर बिछाकर पढ़ाई करते हैं.

आजतक की टीम जब स्कूल पहुंची तो पाया कि दो कमरों के स्कूल पर कक्षा 5 से 6 कक्षा 7 से 8 तक के बच्चों ने कब्जा कर रखा है. ऐसे में कक्षा 1 से 2 के छात्रों के पास एक ही विकल्प बचता है और वो ये कि कक्षा 1 से 2 ते छात्रों को दो कमरों के बाहर बरामदे पर ही बोरी बिछा कर पढ़ाई करना. यहां बरामदा और जमीन ही इन बच्चों का क्लास रूम है.

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एक छात्र ने कहा, 'हमारे पास क्लास में बैठने के लिए बेंच और टेबल नहीं है. इसी वजह से हमें घर से ही बैठने के लिए बोरा लेकर आना पड़ता है.'

स्कूल का दोनों कमरा फुल और बरामदा भी फुल, ऐसे में कक्षा 3 से 4 के बच्चों के लिए स्कूल के पास एक छोटा सा कमरा है जो इनके लिए आवंटित है. इस छोटे से कमरे में कक्षा 3 से 4 के बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करते हैं. बारिश का मौसम होने के कारण जिस जगह पर बच्चे बैठ कर पढ़ाई करते हैं वहां जलजमाव भी देखने को मिला. अब सवाल यह उठता है कि इस कमरे में जलजमाव कैसे हो गया तो इसकी वजह समझ लीजिए.

दरअसल इस कमरे का छत पूरी तरीके से टूटी हुई है जिसकी वजह से बारिश का पानी लगातार कमरे में गिरता रहता है और जलजमाव के बीच ही बच्चे बैठकर पढ़ाई करते हैं. कमरे में दरवाजे और खिड़कियों के लिए जगह तो बनाया गया है मगर ना ही दरवाजा है ना ही खिड़कियां.

बात की जाए अब कक्षा 5 और 6 के बच्चों की. एक ही क्लास में एक तरफ जहां 5वी के बच्चे बैठते हैं तो दूसरी तरफ छठी के बच्चे बैठते हैं. क्लास रूम छोटा होने की वजह से टेबल और बेंच लगाने की दिक्कत है जिसकी वजह से कुछ लोग ब्लैक बोर्ड की तरफ देख कर पढ़ाई करते हैं तो कोई दूसरी दिशा में बैठकर.

कक्षा 7 और 8 की हालत सबसे ज्यादा चौंकाने वाली है. जहां एक ही क्लास रूम में ब्लैक बोर्ड पर दो टीचर दो अलग-अलग विषय पढ़ाते हुए देखे गए. इस क्लासरूम की हालत तो इतनी खराब थी कि सातवीं और आठवीं के बच्चों को अलग-अलग बैठाया भी नहीं गया है. सब एक साथ समूह बनाकर इस क्लास रूम में बैठते हैं और कंफ्यूज होते रहते हैं कि आखिर किस विषय के बारे में जानकारी लें.

आजतक की टीम जब इस कमरे में पहुंची तो देखा कि 7वीं क्लास के बच्चों को शिक्षक रामानुज प्रसाद सामान्य विज्ञान पढ़ा रहे थे तो ब्लैक बोर्ड के दूसरे हिस्से में रिचा कुमारी नाम की शिक्षिका आठवीं के बच्चों को गणित पढ़ा रही थीं. इस क्लास में भी आधे बच्चे ब्लैक बोर्ड की तरफ देख कर पढ़ाई करते हैं तो आधे दूसरी दिशा में देखकर.

रामानुज प्रसाद शिक्षक ने कहा, 'स्कूल में संसाधनों की काफी कमी है जिसकी वजह से हमें इस तरीके से बच्चों को पढ़ाना पड़ता है.'

यह देखकर और हैरानी हुई जब पता चला कि स्कूल में बिजली का कनेक्शन तो है मगर किसी भी कमरे में पंखा तक नहीं लगा हुआ है. बच्चों को गर्मी के मौसम में बिना पंखे के ही कक्षा में बैठकर पढ़ाई करनी होती है.

रिचा कुमारी शिक्षिका ने कहा, 'स्कूल में ना तो बिजली है ना पंखा है. इस बात की जानकारी हम लोगों ने अपने अधिकारियों को कई बार दी मगर इसके बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं. हम इसी तरीके से पढ़ाने के लिए मजबूर है. हमें काफी दिक्कत होती है.'

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