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पेरिस में बोले मोदी- फ्रांस की फुटबॉल टीम के यहां से ज्यादा भारत में समर्थक

जब फ्रांस ने 2018 में क्रोएशिया को हराकर फुटबॉल का वर्ल्ड कप जीता था, तो इसका जश्न भारत में जोर-शोर से मनाया गया था.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 23 August 2019
पेरिस में बोले मोदी- फ्रांस की फुटबॉल टीम के यहां से ज्यादा भारत में समर्थक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (ANI)

  • फ्रांस में मोदी ने लोगों को फुटबॉल के बहाने जीवन में गोल का महत्व बताया
  • पांच सालों में हमने ऐसे गोल रखे हैं जो पहले नामुमकिन माने जाते थे: मोदी

जी-7 सम्मेलन में हिस्सा लेने फ्रांस पहुंचे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित किया. फ्रांस दौरे के दूसरे दिने उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि भारत और फ्रांस की मित्रता पूरी तरह अटूट है. यह कोई नई नहीं है, बल्कि सालों पुरानी है. ऐसा कोई मौका या वैश्विक मंच नहीं होगा, जहां हमारे देशों ने एक-दूसरे का समर्थन न किया हो. इसलिए आज का दिन इस दोस्ती के नाम है. उन्होंने भारत-फ्रांस मित्रता को फीफा वर्ल्ड कप से भी जोड़ा. पिछले साल उसके विजेता बनने पर भारत में भी जश्न मना.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,' अच्छी दोस्ती का मतलब ये है कि सुख-दु:ख में एक-दूसरे का साथ देना, चाहे जो भी परिस्थिति हो. जब भारत या फ्रांस में कोई भी अच्छी उपलब्धि होती हो, तो हम एक-दूसरे के लिए खुश होते हैं. मुझे लगता है कि फ्रांस की फुटबॉल टीम के समर्थकों की संख्या शायद जितनी फ्रांस में है, उससे भी ज्यादा भारत में होगी. जब फ्रांस ने फुटबॉल विश्व कप जीता था, तो इसका जश्न भारत में जोर-शोर से मनाया गया था.'

उल्लेखनीय है कि फ्रांस ने 15 जुलाई 2018 को फीफा वर्ल्ड कप के 21वें संस्करण का खिताब अपने नाम किया था. मॉस्को में खेले गए फाइनल मैच में फ्रांसीसी टीम ने क्रोएशिया को 4-2 से मात दी थी. भारत में भी फीफा वर्ल्ड कप की खुमारी चरम पर थी. फुटबॉल प्रेमियों ने फ्रांस की खिताबी जीत का भरपूर आनंद उठाया था. फ्रांस 20 साल बाद विश्व फुटबॉल का सरताज बनने में सफल रहा था.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान जीवन में गोल के महत्व को भी समझाया. उन्होंने कहा, ' मैं फुटबॉल प्रेमियों के देश में आया हूं और जब फुटबॉल प्रेमियों के बीच में आया हूं तो...आप भलीभांति जानते हैं कि गोल का क्या महत्व होता है. और इसलिए 'अल्टीमेट अचीव' करना है तो गोल ही करना पड़ता है. हमने पिछले पांच सालों में ऐसे गोल रखे हैं, जो पहले नामुमकिन माने जाते थे. लेकिन टीम स्पिरिट की भावना से हमने लक्ष्यों को साकार कर दिखाया है.'

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