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बीजिंग से लंदन तक बजा बोल्ट का डंका, रियो में गोल्ड की हैट्रिक पर निगाहें

रियो में बोल्ट की नजर न केवल खिताब बचाने पर बल्कि एक ऐसा रिकॉर्ड कायम करने पर होगी जो आज तक केवल फिनलैंड के महान धावक पावो नुर्मी के नाम है.

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लव रघुवंशीनई दिल्ली, 03 August 2016
बीजिंग से लंदन तक बजा बोल्ट का डंका, रियो में गोल्ड की हैट्रिक पर निगाहें उसेन बोल्ट

दुनिया के सबेस तेज धावक उसेन बोल्ट रियो ओलंपिक में एक बार फिर जलवा दिखाने को तैयार हैं. ओलंपिक में बोल्ट के शामिल होने को लेकर शुरू में संशय था, लेकिन बाद में उन्हें जमैका की टीम में शामिल किया गया और वो रियो पहुंच चुके हैं.

पावो नुर्मी के रिकॉर्ड की बराबरी करेंगे बोल्ट?
रियो में बोल्ट की नजर न केवल खिताब बचाने पर बल्कि एक ऐसा रिकॉर्ड कायम करने पर होगी जो आज तक केवल फिनलैंड के महान धावक पावो नुर्मी के नाम है. दरअसल, ओलंपिक खेलों के एथलेटिक्स प्रतिस्पर्धा में सबसे ज्यादा व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने का रिकॉर्ड इसी फिनिश धावक ने पिछले 88 सालों के अपने नाम कर रखा है. नुर्मी के नाम 1920 से लेकर 1928 तक नौ गोल्ड मेडल जीतने का रिकॉर्ड है. रियो में अगर बोल्ट एक बार फिर बीजिंग और लंदन के प्रदर्शन को दोहराते हैं तो बेशक ये बेहद असाधारण प्रदर्शन होगा क्योंकि बोल्ड 100 और 200 रेस में गोल्ड जीतने की हैट्रिक भी बना देंगे.

ओलंपिक में छह, वर्ल्ड चैंपियनशिप में 11 गोल्ड
100 और 200 मीटर रेस के वर्तमान वर्ल्ड रिकॉर्डधारी उसेन बोल्ट पिछले दो ओलंपिक खेलों में इन दोनों रेस के साथ ही 4x100 मीटर के भी गोल्ड मेडलिस्ट हैं. ओलंपिक खेलों में छह गोल्ड के साथ ही वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी बोल्ट ने 11 गोल्ड जीते हैं. सात साल पहले उसेन बोल्ट ने बर्लिन वर्ल्ड चैंपियनशिप में 100 और 200 मीटर की रेस जिस तेजी से जीती वो आज भी कायम है. 2009 में वहां उन्होंने दोनों ही वर्गों में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया. जहां 200 मीटर की रेस उन्होंने 19.19 सेकेंड में जीती वहीं 100 मीटर तो महज 9.58 सेकेंड में पूरा कर डाला.

बीजिंग से लेकर लंदन तक गोल्ड ही गोल्ड
बोल्ट ने बीजिंग ओलंपिक में पहले 100 मीटर फिर 200 मीटर और उसके बाद 4x100 मीटर रिले दौड़ में न केवल गोल्ड जीता बल्कि वर्ल्ड रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया. पहली बार किसी एथलेटिक प्रतिस्पर्धा में वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ इन तीनों रेस का गोल्ड मेडल जीतने वाले बोल्ट दुनिया के पहले एथलीट बन गए. बोल्ट ने अपने हैरतअंगेज कारनामे को लंदन में भी बरकरार रखा और यहां एक बार फिर 100 मीटर और 200 मीटर और 4x100 मीटर रिले दौड़ का गोल्ड अपने नाम किया.

एथेंस ओलंपिक में पहले दौर से हुए बाहर
जमैका के शेरवुड कंटेंट गांव में जन्में बोल्ट की मां कहती हैं, ‘मुझे याद है 2002 का वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप. उस समय बोल्ट 15 साल का था और उस टूर्नामेंट से पहले वह वहां नहीं जाना चाहता था. वो रोया. मैंने उसे समझाया और वहां जाने के लिए साहस दिया और कहा कि जाओ अपना सबसे बढ़िया प्रदर्शन करो.’ उस चैंपियनशिप में बोल्ट ने 200 मीटर रेस जीती. बहुत कम लोग जानते होंगे कि बोल्ट ने 2004 के एथेंस ओलंपिक में भी शिरकत की थी. तब 17 साल की उम्र में वो पहले दौर से ही बाहर हो गए थे.

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