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लगातार हार से बेजार टीम इंडिया की हार के कारण चार

स्लॉग ओवरों में धीमी बैटिंग, कैच टपकाना, रनआउट छोड़ना. इन सारे कारणों ने मिलकर टीम इंडिया की इस दुर्गति की जमीन तैयार की. अगर हम ये कहें कि रोहित शर्मा के दो शतक, कोहली के दो अर्धशतक और रहाणे के 89 रनों पर पानी फेरने वाले यही मुख्य कारण हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा.

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सूरज पांडेयनई दिल्ली, 15 February 2016
लगातार हार से बेजार टीम इंडिया की हार के कारण चार 300 के पार लगातार, फिर भी मिल रही हार

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई टीम इंडिया के बल्लेबाजों ने पहले दोनों वनडे में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. टीम ने दोनों मैचों में 300 प्लस स्कोर किया लेकिन फिर भी उसके हिस्से हार ही आई. लगातार हार से बेजार टीम इंडिया के इस प्रदर्शन के लिए सीधे तौर पर गेंदबाजों को दोषी बताना कहीं से भी गलत नहीं होगा. इसके अलावा स्लॉग ओवरों में धीमी बैटिंग, कैच टपकाना, रनआउट छोड़ना. इन सारे कारणों ने मिलकर टीम इंडिया की इस दुर्गति की जमीन तैयार की.

अश्विन-जडेजा का निराशाजनक प्रदर्शन
श्रीलंका दौरे के बाद साउथ अफ्रीका के भारत दौरे पर भी अश्विन ने अपनी बलखाती गेंदों से बल्लेबाजों को जमकर नचाया था. उनकी बॉलिंग का ऐसा खौफ था कि एबी डिविलियर्स, हाशिम अमला, फाफ डु प्लेसी जैसे बल्लेबाज भी प्रोटियाज को क्लीन स्वीप से नहीं बचा सके. अश्विन के भारतीय उपमहाद्वीप में किए इसी प्रदर्शन ने उन्हें टेस्ट में नंबर एक गेंदबाज की पदवी दी. लेकिन जब ये टेस्ट का नंबर एक बॉलर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उनकी सरजमीं पर खेलने उतरा तो इसकी वो धुनाई हुई कि लोगों को शक होने लगा कि ये अश्विन ही है. अश्विन ने इस सीरीज में अभी तक 19 ओवर डाले हैं जिनमें उन्होंने 6.73 की इकॉनमी से 128 रन लुटाते हुए महज दो विकेट झटके हैं. इनके अलावा साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में जबरदस्त बॉलिंग करने वाले रविंद्र जडेजा भी अपने 18 ओवरों में 6.16 की इकॉनमी से 111 रन लुटाते हुए बस एक विकेट हासिल कर पाए हैं. अब आपके मुख्य गेंदबाज अगर इतनी उदारता से रन लुटाते हुए विकेट भी नहीं लेंगे तो आपको कौन जिता सकता है.

पेस बैटरी का एकदम से डाउन रहना
हालांकि इस दौरे में ऑस्ट्रेलियाई पिचों में वो तेजी नहीं है जिसके लिए वो जानी जाती हैं. लेकिन फिर भी आपके पेसर्स अगर विकेट नहीं लेंगे तो कैसे काम चलेगा. टीम इंडिया के मुख्य तेज गेंदबाजों के अब तक के आंकड़े निराशाजनक हैं. उमेश यादव 20 ओवर 128 रन एक विकेट. ईशांत शर्मा 10 ओवर 60 रन एक विकेट. भुवनेश्वर कुमार नौ ओवर 42 रन कोई विकेट नहीं. आपके मुख्य तीन अनुभवी तेज गेंदबाज अगर ऐसी बॉलिंग करेंगे तो विपक्षी टीम के लिए आधा काम तो वैसे ही हो गया. ले देकर बचते हैं इस दौरे पर पदार्पण करने वाले बरिंदर सरन, सरन ने अब तक काफी अच्छी गेंदबाजी की है. हालांकि उन्हें दूसरे वनडे में कोई विकेट नहीं मिला लेकिन इस सीरीज में उनके ओवरऑल आंकड़ों की बात करें तो एक नए बॉलर के ये आंकड़े निश्चित तौर पर सराहनीय हैं. बरिंदर ने इस दौरे पर अब तक 18.2 ओवर में 107 रन देते हुए तीन विकेट अपने नाम किए हैं. इस सीरीज में भारत की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बरिंदर, भारतीय टीम की ओर से मेडेन ओवर फेंकने वाले इकलौते गेंदबाज भी हैं.

स्लॉग ओवरों में धीमी बैटिंग
आठ विकेट हाथ में रखकर अगर आप आखिरी के दस ओवरों में मात्र 75 रन जोड़ेंगे तो जीत तो आपको मिलने से रही. गौरतलब है कि आखिरी के दस ओवरों में टीम इंडिया ने 6 चौके और एक छक्का जड़ा, प्रति ओवर एक बाउंड्री से भी कम. इनमें से पांच चौके और एक छक्का तो अकेले रहाणे ने ही जमा दिए थे. अब सोचने वाली बात ये है कि वर्ल्ड क्रिकेट के सबसे तगड़े फिनिशर्स में से एक माने जाने वाले धोनी, आईपीएल के पहले भारतीय शतकवीर मनीष पांडेय, ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा तीनों मिलकर स्लॉग ओवर्स में एक चौका जड़ेंगे तो लुटिया तो डूबनी ही है. इनके अलावा रहाणे के आउट होते ही जैसे सभी को वापसी की जल्दी हो गई थी. रहाणे के बाद उसी ओवर में पांडेय और फिर अगले ओवर में अश्विन, जडेजा धीरे से निकल लिए. पहला मैच 307 बनाकर हारने के बाद भी स्लॉग ओवरों में आपका ये एटीट्यूड आपको डुबाने के लिए काफी है.

'तेजतर्रार' फील्डरों की खराब फील्डिंग
टीम इंडिया के सहायक फील्डिंग कोच आर. श्रीधर की मानें तो टीम इंडिया की मौजूदा इलेवन फील्डिंग में बहुत ही अच्छी है. उन्होंने बीते साल नवंबर में कहा था, 'रविंद्र जडेजा नैसर्गिक एथलीट है. हमारी टीम में प्रत्येक खिलाड़ी कुछ हटकर करता है जिससे वह सामूहिक तौर पर अच्छी क्षेत्ररक्षक इकाई बन गयी है. इसके अलावा विराट ऊर्जावान है, अजिंक्य करीबी क्षेत्ररक्षक के रूप में चपल है. कोई शांतचित रहता है तो शिखर गजब का एथलीट है. इसलिए यह क्षेत्ररक्षण में बहुत अच्छी टीम है.' अब अगर श्रीधर की बातों को सच मानें तो निश्चित तौर पर वो किसी और ही टीम की बात कर रहे थे. क्योंकि इस टीम ने तो कई आसान कैच और रनआउट के मौके गंवाए हैं. इस टीम की फील्डिंग की हालत दयनीय थी. लग ही नहीं रहा था कि ये वही टीम है श्रीधर जिसकी फील्डिंग की प्रशंसा करते नहीं थकते.
अगर हम ये कहें कि रोहित शर्मा के दो शतक, कोहली के दो अर्धशतक और रहाणे के 89 रनों पर पानी फेरने वाले यही मुख्य कारण हैं तो इसमें कुछ गलत नहीं होगा.

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