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कोहली बोले- पिता को अपने सामने दम तोड़ते देखा, सपना था मैं इंडिया के लिए खेलूं

aajtak.in
08 September 2019
कोहली बोले- पिता को अपने सामने दम तोड़ते देखा, सपना था मैं इंडिया के लिए खेलूं
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टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने अपने जीवन के सबसे दुख भरे पल का खुलासा का किया है, जिसने पूरी तरह उनकी जिंदगी को बदल कर रखा दिया.
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एमी पुरस्कार विजेता पत्रकार ग्राहम बेनसिंगर ने भारत के सबसे लोकप्रिय और सक्रिय खिलाड़ी कोहली का इंटरव्यू लिया जिसमें कोहली ने पिता की मौत के दौरान अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बताया है.

 

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बता दें कि 19 दिसंबर 2006 को विराट कोहली के पिता प्रेम कोहली का 54 साल की उम्र में ब्रेन स्ट्रोक की वजह से निधन हो गया था. उस वक्त विराट महज 18 साल के थे और वह दिल्ली में रणजी ट्रॉफी में खेल रहे थे.
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दिल्ली का वह मैच कर्नाटक के खिलाफ था. कोहली ने दिल्ली को फॉलोऑन से बचाने के लिए 90 रनों की शानदार पारी खेली. उसके बाद ही वह अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल हुए.
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कोहली ने बताया कि उन्‍होंने पिता को आंखों के सामने आखिरी सांस लेते देखा. पिता की मौत ने उनकी जिंदगी पर सबसे ज्‍यादा असर डाला. उस समय उन्‍होंने अपने भाई से कहा था कि वह देश के लिए खेलना चाहते हैं और पिता का भी यही सपना था तो वे इसे पूरा करेंगे.
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कोहली ने बताया, 'मैं रणजी ट्रॉफी का मैच खेल रहा था और जब मेरे पिता का निधन हुआ तो मुझे टीम के लिए अगले दिन बल्‍लेबाजी करनी थी. सुबह के ढाई बजे पिता का देहांत हुआ. मैंने उन्‍हें आखिरी सांस लेते हुए देखा. हम आसपास के डॉक्‍टरों के यहां गए लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला. फिर हम उन्‍हें अस्‍पताल लेकर गए लेकिन दुर्भाग्‍य से डॉक्‍टर उन्‍हें बचा नहीं पाए. परिवार के सभी लोग टूट गए और रोने लगे लेकिन मेरी आंखों से आंसू नहीं आ रहे थे और मैं सन्‍न था.'
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कोहली ने बताया कि पिता की मौत ने उन्‍हें बुरे समय का सामना करना सिखाया. मेरे पापा हमेशा चाहते थे कि मैं इंडिया के लिए खेलूं. विराट कोहली की हमेशा से क्रिकेट के भगवान कह जाने वाले सचिन तेंदुलकर से तुलना की जाती है.
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इसका कारण कोहली की बेहतरीन बल्लेबाजी है. कोहली ने हालांकि हमेशा इस तुलना से दूरी बनाए रखी है और कहा है कि सचिन उनके बचपन के हीरो हैं. कोहली ने बताया कि उन्होंने कभी यह बात मानने से इनकार नहीं किया है कि वह हमेशा से सचिन की तरह बनना चाहते थे.
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कोहली ने बेनसिंगर से कहा, 'वह जो करते थे, वो प्योर स्किल्स होती थीं. वह जिस तरह से बल्लेबाजी करते थे वो बाकी सभी से अलग थी और इसी बात ने मुझे प्रभावित किया.'
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कप्तान कोहली ने कहा, 'मैं हमेशा कहता था कि यह काफी अलग है और यह इतना मनोहर था कि मैं अपनी आंखे नहीं हटा पाता था. मैं दुकान पर जाता था और चिप्स वगैरह खरीद के टीवी के सामने सिर्फ उन्हें देखने बैठता था. इसमें बेहद मजा आता था. मैं हमेशा लोगों से कहता था कि मैं सचिन की तरह बनना चाहता हूं.'
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कोहली को मौजूदा समय के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में गिना जाता है. उन्होंने कहा, 'मुझे एक चीज याद है कि जब मैं मैच देखता था और भारतीय टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए हार जाती थी तो मैं सोते समय यह सोचता था कि अगर मैं उस स्थिति में होता तो मैं मैच जिता ले जाता. और ऐसा मेरे करियर में अभी तक कई बार हो चुका है. मैं इस तरह के मैचों का हिस्सा रहा हूं और टीम को मैच जिता तक ले गया हूं.'
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