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डीआरएस नियमों में बदलाव का प्रस्ताव, भारत के मानने की उम्मीद

वर्ल्ड क्रिकेट की एक प्रभावी समिति ने डीआरएस यानी अंपायरों के निर्णय की समीक्षा प्रणाली में बदलाव के सुझाव के साथ ही उम्मीद जताई कि इन्हें भारत भी स्वीकार करेगा. इस समिति में स्टीव वॉ, रिकी पोंटिंग, रॉड मार्श और कुमार संगकारा जैसे दिग्गज शामिल हैं.

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aajtak.in
अभिजीत श्रीवास्तव नई दिल्ली, 27 November 2015
डीआरएस नियमों में बदलाव का प्रस्ताव, भारत के मानने की उम्मीद अंपायर डेरेल हार्पर

वर्ल्ड क्रिकेट की एक प्रभावी समिति ने डीआरएस यानी अंपायरों के निर्णय की समीक्षा प्रणाली में बदलाव के सुझाव के साथ ही उम्मीद जताई कि इन्हें भारत भी स्वीकार करेगा. इस समिति में स्टीव वॉ, रिकी पोंटिंग, रॉड मार्श और कुमार संगकारा जैसे दिग्गज शामिल हैं. यह मेरिलबोर्न क्रिकेट क्लब (एमसीसी) द्वारा प्रायोजित एक स्वतंत्र इकाई है.

इसके सदस्यों में शामिल आईसीसी के मुख्य कार्यकारी डेविड रिचर्डसन ने कहा कि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. ऐतिहासिक डे नाइट टेस्ट से ठीक पहले हुई समिति की इस बैठक में कई अन्य मसलों पर भी बात की गई.

समिति ने जारी बयान में कहा, ‘जब फील्डिंग कर रही टीम को यह लगता है कि बॉल सीधी स्टंप्स पर जा लगती और अंपायर का निर्णय नकारात्मक है तो इसकी समीक्षा किए जाने की अपील करने में कोई हानि नहीं है. 80 ओवर्स के बाद दो और समीक्षा के विकल्प हटाए जाने की अनुमति दी जा सकती है.’

यह मसला ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच पर्थ टेस्ट के दौरान एक बार फिर उठा, जब न्यूजीलैंड ने टेस्ट के पहले दिन अपनी अंतिम समीक्षा का उपयोग किया. बॉल ट्रैकिंग तकनीक ने बताया कि गेंद मिडिल स्टंप के ऊपरी सिरे को हिट कर रही थी. लेकिन टच तकनीक के मुताबिक 50 फीसदी गेंद विकेट को छू रही थी, इसके बाद निर्णय अंपायर को देना था.

एमसीसी ग्रुप ने उम्मीद जताई है कि डीआरएस के सटीकता पर मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नालजी की रिपोर्ट से भारत को भी इस पर यकीन हो जाएगा और इसे लागू किया जा सकेगा. समिति पूर्व अंपायर साइमन टफेल के उस रिपोर्ट से भी बहुत प्रभावित दिखी जिसमें नो बॉल की निगरानी के लिए तीसरे अंपायर को तकनीक देने की बात की गई है.

समित ने कहा, ‘क्रिकेट की बेहतरी के लिए एक तेज स्वचालित व्यवस्था का स्वागत है.’

समिति ने टेस्ट क्रिकेट में घरेलू पिच पर खेलने के अत्यधिक लाभ और बैट-बॉल के बीच संतुलन की कमी पर भी अपनी चिंता जाहिर की. यह समिति लंबे समय से डे-नाइट टेस्ट की पैरवी करती आ रही है. टेस्ट क्रिकेट में लोगों का रुझान बना रहे इसके लिए इसने पहले भी सुझाव दिए हैं.

समिति के बयान में बताया गया, ‘पिच की क्वालिटी, मार्केटिंग, टिकटों की कीमतें, बच्चों तक पहुंच, दर्शकों के अनुभव और प्रत्येक देश के बेहतरीन क्रिकेटर मैच के लिए उपलब्ध रहें उन तरीकों को इजाद करने जैसे अन्य पहलुओं पर विचार किया गया.’

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख जेम्स सदरलैंड और पूर्व अध्यक्ष वाली एडवर्ड्स उन सात लोगों में थे जिन्होंने बैठक में प्रेजेंटेशन दिया. दोनों ने सभी अंतरराष्ट्रीय मैचों को अधिक से अधिक महत्वपूर्ण बनाने पर जोर दिया.

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