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51 की जान बचा सलीम बना हीरो, वीरता पुरस्कार के लिए जाएगा नाम

अमरनाथ के बेगुनाह श्रद्धालुओं पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार करने वाले आतंकवादी भी कहने को तो मुसलमान थे, लेकिन इस्लाम और मुसलमान के असल मायने क्या होते हैं, ये पता चला इस आतंकवादी हमले की जगह यानी अनंतनाग से दो हज़ार किलोमीटर दूर गुजरात के वलसाड से आए एक दूसरे मुसलमान की बदौलत.
51 की जान बचा सलीम बना हीरो, वीरता पुरस्कार के लिए जाएगा नाम बस ड्राइवर सलीम शेख
गोपी घांघर [Edited By: मोहित ग्रोवर]सूरत, 14 July 2017

कहते हैं बचाने वाला, मारने वाले से कहीं ज़्यादा बड़ा होता है. अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा पर गए श्रद्धालुओं पर आतंकी हमले के दौरान लोगों ने ऐसे ही एक बचाने वाले को देखा. नाम है सलीम शेख. सलीम उस बस का ड्राइवर है, जिस पर सोमवार की रात आतंकवादियों ने हमला किया था लेकिन अंधाधुंध गोलियों की बौछार के बीच सलीम ने अपनी जान की परवाह किए बग़ैर जिस तरह से बस में बैठे श्रद्धालुओं की जान बचाने की कोशिश की, उस पर किसी को भी नाज़ हो सकता है.

अमरनाथ के बेगुनाह श्रद्धालुओं पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार करने वाले आतंकवादी भी कहने को तो मुसलमान थे, लेकिन इस्लाम और मुसलमान के असल मायने क्या होते हैं, ये पता चला इस आतंकवादी हमले की जगह यानी अनंतनाग से दो हज़ार किलोमीटर दूर गुजरात के वलसाड से आए एक दूसरे मुसलमान की बदौलत.

ये एक इत्तेफ़ाक ही था कि हाथों में बंदूक लिए जो आतंकवादी हिंदू श्रद्धालुओं की बस पर गोलियां चला रहे थे, उस बस को चलाने वाला कोई और नहीं, बल्कि एक मुसलमान ही था. नाम है सलीम शेख. इस आतंकवादी हमले के दौरान उसने वो काम किया, जो किसी भी इंसान का फर्ज था. उसने खुद अपनी ज़िंदगी की परवाह नहीं की और गोलियों की बौछार के बीच पूरी दिलेरी और जांबाज़ी के साथ अपनी बस चलाता रहा. और तो और हमले के दौरान एक बार फिर बस का टायर पंक्चर हो गया. लेकिन सलीम शेख ने बस नहीं रोकी और करीब डेढ़ किलोमीटर तक तब तक अपनी बस दौड़ाता रहा, जब तक वो आतंकवादियों की पहुंच से बाहर नहीं निकल गई.

इसके बाद सलीम ने अपने घर में टेलीफ़ोन कर उन्हें अपने सलामत होने की खबर तो दी, साथ ही ये भी कहा कि वो हरगिज़ टेलीविजन ना चलाएं, जिससे घर के दूसरे लोगों और खासकर बीमार लोगों को टेंशन हो. पत्नी ने बताया कि वो बस सिर झुकाकर बस चलाते रहे और उन्होंने बस को आतंकियों की पहुंच से दूर कर दिया.

जम्मू-कश्मीर से दूर गुजरात के वलसाड में हमले की शिकार हुई बस के ड्राइवर सलीम के घर एक अजीब सा माहौल है. एक तरफ तो उन्हें इस बात सुकून और गर्व है कि उनका अपना सलीम इस हमले में ना सिर्फ सलामत बच गया, बल्कि उसने अपनी बस भगा कर दूसरों की जिंदगी बचाने की भी कोशिश की. लेकिन इस हमले में जो लोग मारे गए, उनके लिए इस परिवार के दिल में भी एक अनकही तड़प सी है. शायद तभी सलीम के बहादुरी का किस्सा बताने की शुरुआत उसकी मां खुद को मुस्कुराती हुई करती है, लेकिन जवाब देते-देते आगे उनका गला रुंध जाता है और वो रोने लगती हैं.

मां को बेटे पर गर्व

उधर, सलीम की मां की तरह अस्पताल के बिस्तर पर पड़ी अब बहुत सी माताओं और बहनों के दिल से भी अब बस सलीम के लिए दुआएं निकल रही हैं. सचमुच अगर हमले के वक्त सलीम ने अपनी बहादुरी नहीं दिखाई होती, तो शायद आतंकवादियों की इस करतूत का अंजाम कहीं और भयानक होता.सलीम ने कहा कि खुदा ने मुझे वो ताकत दी कि मैं रुकूं नहीं और बस चलाता रहूं. लगातार फायरिंग हुई इसलिए मैं रुका नहीं, बस चलाता रहा.

कुल 7 लोगों की हुई मौत

अमरनाथ यात्रा को गए श्रद्धालुओं पर आतंकी हमले में 7 श्रद्धालुओं की मौत हुई. अनंतनाग के पास बेतांगू में आतंकियों ने बस पर गोलीबारी की. आतंकियों ने पहले पुलिस की गाड़ी पर गोलियां बरसाई और फिर बस पर. लेकिन बस के ड्राइवर सलीम शेख की सूझबूझ से कुल 51 यात्रियों की जान बच गई.

ड्राइवर सलीम शेख ने आजतक से खास बातचीत करते हुए पूरे किस्से को साझा किया. सलीम ने बताया कि सोमवार रात करीब 8.15 बजे बाइक पर सवार आतंकियों ने पहले पुलिस की गाड़ी पर गोलियां बरसाई, फिर बस पर गोलीबारी करने लगे. सलीम ने बताया कि जब आतंकी गोली चला रहे थे, तो उन्होंने नीचे झुक कर बस चलाना शुरू कर दिया. उन्होंने बताया कि उस स्थान से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर ही आर्मी कैंप था, उन्होंने सीधा वहां जाकर ही बस को रोका.

सूरत पहुंचे शव

अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकी हमले में मारे गए श्रद्धालुओं के शव गुजरात के सूरत शहर में पहुंच गए हैं. वायु सेना का विमान इन शवों को लेकर पहुंचा. गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी ने सभी मृतकों के लिए 10 लाख रुपये का ऐलान किया है. आपको बता दें कि आतंकी हमले में गुजरात के 5 लोग मारे गए थे. सीएम विजय रुपानी ने सभी घायलों से भी बात की. गुजरात के कुल 17 यात्री घायल हुए थे, सभी को सूरत के अस्पताल में भर्ती किया जाएगा. सीएम विजय रुपानी ने बहादुरी दिखाने के लिए बस ड्राइवर की सराहना की, उन्होंने कहा कि वे ड्राइवर को बहादुरी का अवॉर्ड दिलवाने की सिफारिश करेंगे.

अपने रिस्क कर रहे थे यात्रा

कश्मीर में आतंकियों का निशाना बने अमरनाथ यात्री अपने रिस्क पर बाबा बर्फानी के दर्शन को जा रहे थे. जानकारी के मुताबिक इस रास्ते पर हमले से 50 मिनट पहले ही सुरक्षा हटाई गई थी और 8.20 बजे आतंकियों ने श्रद्धालुओं की बस को निशाना बनाया डाला. इससे पहले श्रद्धालुओं का आधिकारिक काफिला शाम 4 बजे अमरनाथ गुफा के लिए निकला था. इसके बाद 7.30 बजे पेट्रोल पार्टी ने गश्त हटा ली. ऐसे में इन यात्रियों को सुरक्षा नहीं मिल पाई.

हमले का शिकार हुई बस की डिटेल

बस का रजिस्ट्रेशन नंबर - GJ09Z0976

मालिक का नाम - राकेश कुमार बाबूलाल शाह

मालिक का पता - एटी पीओ 13, महावीर सोसायटी कॉलेज रोड, तालोड़ सांबरकांटा

इंजिन नंबर - 91K77585

चेसिस नंबर - 91K58903

मॉडल - बोलेरा कैंपरऑ

टाइप - लाइट गुड व्हीकल

कलर - व्हाइट

कंपनी का नाम - एमएमटीडी माही एंड माही लिमिटेड

RTO = 9

 

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