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रूह कंपा देने वाला मोटापा, एक फैसले ने बदली जिंदगी

रूह कंपा देने वाला मोटापा, एक फैसले ने बदली जिंदगी
Aajtak.in [Edited by: दिनेश अग्रहरि]नई दिल्ली, 16 October 2017

न तो वो ट्रेन से सफर कर सकता था और न ही हवाई यात्रा. बैठते ही सो जाना और फिर खर्राटों की ऐसी गूंज जो दूसरे यात्रियों के लिए बन जाती थी परेशानी का सबब. उसका शरीर भले ही सो जाता था, लेकिन दिमाग इस कदर जाग जाता था कि देखने वालों की रूह कांप जाती थी. 6 घंटे की नींद में 453 बार दिमाग जाग जाता था और एक मिनट 10 सेकंड तक के लिए तो सांसें भी थम जाती थीं. यह कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है, उस शख्स की जो मोटापे की वजह से स्लीप एप्निया का  इस कदर शिकार हो चुका था कि उसकी जिंदगी ही नर्क बन गई थी.

रूह कंपा देने वाली ये कहानी है धनबाद में रहने वाले कोल मर्चेन्ट मुकेश कुमार की. मुकेश कुमार की उम्र करीब 40 साल है. बीते साढ़े चार साल से वह अपने मोटापे औऱ स्लीप एप्निया की वजह से विकलांगों की तरह जिंदगी जी रहे थे. बड़ी मेहनत से खुद अपने पैरों पर खड़े होने के बाद उन्होंने अपने कारोबार को जमाया है. मुकेश को साल 2013 के बाद मोटापे ने इस तरह जकड़ा कि उसका सीधा असर धंधे पर दिखने लगा. उनका वजन 131 किलो हो गया. मुकेश कुमार मोटापे की वजह से स्लीप एप्निया से ग्रस्त हो गए. चौबीसों घंटों नींद जैसा लगना, आलस आना, बैठे-बैठे सो जाना, नींद से जाग जाना, नींद में ऑक्सीजन का रुक जाना, सिर में दर्द रहना, भयकंर खर्राटे लेना जैसे और कई लक्षणों से वह जिंदगी से तंग हो चुके थे.

हालात यहां तक बिगड़ गए कि ट्रेन में बाकी मुसाफिरों के साथ उनके लिए सोना तक दुश्वार हो गया. ट्रेन में सफर के दौरान पूरी बोगी के मुसाफिरों की शामत आ जाती. खर्राटों की आवाज बाकी लोगों के लिए बर्दाश्त से बाहर हो जाती थी. इस परेशानी के चलते एक हजार किलोमीटर तक का सफर ट्रेन को छोड़ कार से करना मजबूरी बन गया था. धनबाद से दिल्ली तक कई नामी-गिरामी डॉक्टरों को दिखाया. स्लीप स्टडी की तो पता चला कि 6 घंटे 10 मिनट की नींद के दौरान ऑक्सीजन की कमी के कारण 453 बार दिमाग जाग जाता है और ऊंची आवाज वाले 3500 खर्राटे आते हैं. नींद में 1 मिनट 10 सेकंड तक सांस रुकने लगी थी. डॉक्टरों की सलाह पर सोते वक्त सीपअप मशीन (ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली मशीन) लगाई गई, लेकिन दो साल बात उससे भी बात नही बनी. पूरा घर उनकी बीमारी से परेशान हो चुका था. घर में पत्नी औऱ दो बच्चे खर्राटे सुनने के आदी हो चुके थे.

मोटापे की वजह से उनके पैरों औऱ कमर मे दर्द होने लगा था. कारोबार को अपग्रेड करने में 90 फिसदी की गिरावट आ गई. ब्रांडेड कपड़े पहनने के शौकीन मुकेश कुमार को कपड़े के शो रूम से भी निराशा हाथ लगने लगी थी. उनकी साइज 48 हो चुकी थी, जबकि आमतौर पर 44 से बड़ा साइज नहीं मिलता था. पूरे दिन तीखा मिर्च-मसाला वाला खाना खाने का मन करता था. मुकेश बोझ बन चुकी जिंदगी को जैसे-तैसे काट रहे थे. मगर नींद में सांस रुक जाने की बीमारी ने उन्हें ऊपर से नीचे तक झकझोर के रख दिया. ये कोई साधारण बीमारी नहीं थी. आनन-फानन में डॉक्टर से परामर्श लिया. पूरी जांच करने के बाद डॉक्टर ने साफ कह दिया कि या तो वो सांस की नली के ऊपर जमी हुई चर्बी को ऑपरेशन करवाकर उसे निकलवा दें, या फिर 6 महीने में वजन कम कर लें, वरना उनके शरीर का कोई अंग डैमेज हो जाएगा. डॉक्टर की कही यह बात वाकई डराने वाली थी. तब मुकेश कुमार ने खुद ही बेरियाट्रिक सर्जरी के बारे में पता करना शुरू कर दिया.

   बेरियाट्रिक सर्जरी के लिए उन्होंने तमाम जांच पड़ताल के बाद मोहक हास्प‍िटल इंदौर को चुना. घर से बगैर किसी को बताए चुपचाप अपने दोस्त के साथ मुकेश इंदौर चले आए. डॉ मोहित भंडारी ने उनके हर सवाल का जवाब दिया. उन्हें भरोसा जगा और सीधे सर्जरी के लिए राजी हो गए. 25 मई 2017 को सर्जरी से एक घंटे पहले उन्होंने घर वालों को फोन कर बताया. सर्जरी से तीन दिन बाद जो रात आई वह उनके लिए जन्नत जैसी खुशियां लेकर आई. साढ़े चार साल बाद उन्होंने चैन की नींद ली. आज महज 4 महीने में उन्होंने सर्जरी से 33 किलो वजन घटा लिया. अब उनका वजन 98 किलो है औऱ वजन का गिरना लगातार जारी है. अब उनका कारोबार दिन दूनी-रात चौगुनी तरक्की कर रहा है और ऐसा लग रहा है मानो उन्हें दुसरा जन्म मिला हो. उनका कहना है कि बेरियाट्रिक सर्जरी के लिये मोहक हास्प‍िटल देश का सबसे भरोसेमंद अस्पताल साबित हो चुका है.

मुकेश कुमार की पूरी कहानी नीचे दिए वीडियो में आप देख सकते हैं.

क्या है बेरियाट्रिक सर्जरी

 बहुत ज्यादा मोटे लोग जो चल नही पाते, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ होती हो, ब्लड प्रेशर की बीमारी हो, डायबिटीज हो, ऐसे लोगों के परीक्षण के बाद बेरियाट्रिक सर्जरी की जाती है. यह सर्जरी तीन तरह की होती है. पहला होता है कि यदि कोई व्यक्ति ज्यादा खाना खा रहा होता है तो उसकी डाइट को कम करने के लिए यानी पेट को छोटा करने के लिए. इसे रेस्ट्रिक्टिव सर्जरी कहा जाता है. दूसरी सर्जरी है माल एक्जाप्टिव सर्जरी. इसमें शरीर में खाना जा रहा होता है, लेकिन वह पच नही पाता.  तीसरी तरह की होती है मेटाबालिक सर्जरी. यह सर्जरी डायबिटिक मरीजों के लिए होती है. ये तीनों तरह की सर्जरी बेहद सफल है. मेटाबॉलिक सर्जरी से बड़ी संख्या में लोगों को कारगर इलाज मिला है और डायबिटीज से हमेशा के लिये छुटकारा मिला है. मौजूदा वक्त में भारत में डायबिटीज के 95 फीसदी मरीज टाइप-2 डायबिटीज से ग्रसित हैं. इसमें इन्सुलिन की कमी मरीज को नही होती, लेकिन शरीर में घूमने वाला इन्सुलिन ठीक तरीके से काम नही कर रहा होता है, क्योंकि यह रोग प्रतिरोधक बन जाता है. यह सब हार्मोनल गड़बड़ि‍यों की वजह से होता है. इस सर्जरी के जरिये हार्मोन का संतुलन बना कर इन्सुलिन को एक्टिव बनाते हैं. इससे डायबिटीज की बीमारी पूरी तरह से खत्म हुई है.

कैसे होती है बेरियाट्रिक सर्जरी

बेरियाट्रिक सर्जरी लायपोसेक्शन सर्जरी नही है. यानी शरीर के किसी भी सर्फेस से फैट नहीं निकाला जाता बल्कि पेट के अनवांटेड साईज को कम कर या पाचन तंत्र को ठीक कर किया जाता है. साथ ही सर्जरी के जरिए बहुत से हार्मोनल बदलाव भी करते हैं. यह सर्जरी बेहद सुरक्षित है. भारत में यह सर्जरी करने वाले मोहक बेरियाट्रिक्स ऐंड रोबोटिक्स की टीम ने इसकी विशेष ट्रेनिंग फ्रांस के प्रतिष्ठित संस्थान से ली है. मोहक अस्पताल, इंदौर में रोबोट के जरिए भी इस सर्जरी को पूरा किया जाता है.  रोबोटिक्स सर्जरी मैन्यूअल की तुलना में बेहद एक्यूरेसी वाली सर्जरी है. इस सर्जरी में आधे से एक घंटा लगता है और दो से तीन दिन के बाद मरीज की अस्पताल से छुट्टी भी हो जाती है. सर्जरी के दूसरे दिन से ही हर दिन तेजी से वजन घटने लगता है औऱ 3 से 4 महीने में 30 से 40 किलो वजन घट जाता है.

भारत में भी मोटापा अब बनने लगा जानलेवा, दुनिया में भारत तीसरे नंबर पर

भारत में अब तक गरीबी औऱ कुपोषण एक गंभीर समस्या थी, लेकिन अब तेजी से बढ़ रहा मोटापा महामारी का रूप ले सकता है. यह बात भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के एक अध्ययन में कही गई है. अभी तक दुनिया के बाकी देशों में ही मोटापे की समस्या पैर पसार रही थी, लेकिन अब भारत में भी मोटापा बढ़ता जा रहा है. एक महत्वपूर्ण अध्ययन के मुताबिक देश की सवा सौ करोड़ आबादी में से करीब 13 फीसदी लोग मोटापे से पीडित हैं. कुपोषण के मुकाबले मोटापा आने वाले दिनों में एक गंभीर चुनौती के रुप में सामने आएगा. पश्चिमी सभ्यता के चलते जंक फुड, फास्ट फुड, सॉफ्ट ड्रिंक्स, खान-पान की अनियमितता और बदलती लाइफ स्टाइल की वजह से भारत में भी कई लोग तेजी से मोटापे के शिकार हो रहे हैं. मोटापे की वजह से कई गंभीर बीमारियां लोगों के शरीर में घर कर रही हैं. इनमें ब्लड-प्रेशर, दिल की बीमारी, डायबिटीज, स्लीप एप्निया, जोड़ों का दर्द औऱ थायराइड जैसी कई जानलेवा बीमारी होती है. औसत से ज्यादा मोटापे की वजह से यह बीमारियां खुद-ब-खुद चली आती हैं. यही वजह है कि मोटापा जानलेवा साबित हो जाता है.

दुनिया में 15 फीसदी लोग गंभीर मोटापे से ग्रसित हैं. भारत मोटापे के मामले में तीसरे नंबर पर है. पहले पायदान पर यूनाइटेड स्टेट आफ अमेरिका है जहां 15 से 18 फीसदी लोग मोटापे की चपेट में हैं. चीन में ऐसे लोगों का हिस्सा 10 फीसदी है, तो तीसरे नंबर पर भारत है जहां 5 से 8 प्रतिशत लोग मोटापे की समस्या से जुझ रहे हैं. टाइप-2 डायबिटीज से देश के 5 करोड़ लोग ग्रसित हैं. डब्ल्यूल्यूएचओ यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक फिलहाल देश में इस बीमारी से पीड़ित मध्यम औऱ निम्न मध्यमवर्गीय 80 फीसदी लोगों की मौत हो जाती है और यह आंकड़ा 2016 से 2030 के बीच दोगुना हो जाएगा. इसी प्रकार 'द लांस ग्लोबल हेल्थ' के मुताबिक दुनिया में हार्ट अटैक से मरने वालों की सबसे ज्यादा तादात भारत में है. भारत में इसकी मृत्युदर 23 फीसदी, जबकि साउथ-ईस्ट एशिया में 15 फीसदी, चीन में 7, साउथ अफ्रीका में 9 और वेस्ट एशिया में 9 फीसदी है. दोनों ही गंभीर बीमारियों के पीछे सबसे बड़ी वजह मोटापा ही है.

  ऐसी तमाम गंभीर बीमारियों से ग्रसित मोटे व्यक्ति का मोटापा दूर होते ही ये बीमारियां भी गायब हो जाती हैं. औसत से अधिक मोटे यानी जिनका बॉडी मास इंडेक्स 32.5 से अधिक हो, उनके लिये बेरियाट्रिक सर्जरी बड़ी कारगर है.

बेरियाट्रिक सर्जरी के लिए देश के ख्यातनाम सर्जन डॉ. मोहित भंडारी से वर्ल्ड ओबेसिटी डे पर खास बातचीत...

सवाल- पूरी दुनिया में मोटापा कितनी बड़ी समस्या है. भारत में मोटापे की स्थिति क्या है?

जवाब-  दुनिया में 15 फीसदी लोग गंभीर मोटापे से पीडित हैं. भारत इसमें तीसरे स्थान पर है. पहला स्थान यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका (यूएसए) का है, जहां 15 से 18 फीसदी लोग मोटापे की चपेट में है, दूसरा स्थान चीन का है, जहां 7 फीसदी लोग से मोटापे से ग्रसित हैं. भारत तीसरे नंबर पर है जहां 5 से 8 फीसदी लोगों को मोटापे ने घेर रखा है. इससे साफ जाहिर है कि भारत में मोटापा किस तरह से अपनी जगह बना रहा है. मोटापे के साथ कई बीमारियां आती हैं, जो धीरे-धीरे जानलेवा बन जाती हैं.

सवाल- गंभीर मोटापे से मुक्ति का क्या इलाज है. सर्जरी कितनी कारगर है?

जवाब- मोटापे की इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन औऱ मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के मुताबिक गंभीर मोटापे का इलाज सर्जरी ही है. क्लास वन ओबेसिटी ऐसी है जिसका मेडिकली इलाज संभव है, लेकिन क्लास-2 और क्लास-3 ओबेसिटी का इलाज सिर्फ और सिर्फ सर्जरी यानी बेरियाट्रिक सर्जरी ही है. जिस भी मरीज का बॉडी मास इंडेक्स 32.5 के उपर है और उनमें डायबिटीज, हाइपरटेंशन औऱ स्लीप एप्निया जैसी गंभीर बीमारी है, तो उनकी सर्जरी की जा सकती है.

सवाल- दुनिया के बाकी देशों की तुलना में भारत सर्जरी में कितना आगे है?

जवाब- भारत में यह सर्जरी तेजी से बढ़ रही है. देश के कई हिस्सों में इसे किया जा रहा है. इंश्योरेंस इस सर्जरी को कवर नही करता है, यदि यह सर्जरी कवर होने लगेगी, तो भारत में इसकी संख्या औऱ भी बढ़ जाएगी. सबसे ज्यादा सर्जरी अमेरिका में की जाती है. पूरे विश्व में एक साल के अंदर 25 से 30 लाख सर्जरी होती है.  अमेरिका में ढाई लाख सर्जरी होती है, यूरोप में करीब 90 हजार सर्जरी होती है. भारत अभी इस सर्जरी में बहुत पीछे है. भारत में हर साल 15 से 20 हजार सर्जरी होती है. इनमें से डेढ़ से दो हजार सर्जरी हमारी संस्था मोहक अस्पताल में हमारे द्वारा की जाती है.

सवाल-  वेट लॉस सर्जरी और तकनीक के तौर पर कितना बदलाव आया है?

जवाब- वेट लॉस सर्जरी औऱ तकनीक में दिनोदिन बदलाव होता जा रहा है. ये सर्जरी पहले बड़ा चीरा लगा कर की जाती थी, लेकिन आजकल दो या तीन छोटे-छोटे छेद कर की जाती है. इस सर्जरी को सिंगल इंसिशन लेप्रोस्कोपिक ओबेसिटी सर्जरी (एसआईएलएस) कहते हैं और इसे रोबोट के जरिए भी किया जाता है.

सवाल- इस सर्जरी को लेकर लोगों में बेहद संशय है. क्या इसके कोई साइड इफेक्ट हैं? सर्जरी के बाद लोग सामान्य जीवन जी सकते हैं?

जवाब- इस सर्जरी में पेट के आकार को छोटा किया जाता है और खाने को बायपास किया जाता है. लोगों को लगता है कि इसमें या तो बहुत ज्यादा वजन कम हो जाएगा या बिलकुल भी वजन कम नही होगा या इस सर्जरी से कुछ काम्पलिकेशन्स होंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है. असल में ये सर्जरी बिलकुल सुरक्षित है. इस सर्जरी में उतना ही वजन कम किया जाता है, जितना कि किसी व्यक्ति के लिये जरूरी होता है. सर्जरी में 80 फीसदी अतिरिक्त वजन को ही कम किया जाता है. इससे ज्यादा या कम नही किया जा सकता. सर्जरी के बाद पोषण की सलाह दी जाती है. उसे पूरा करने पर शरीर में किसी भी प्रकार के विटामिन्स या प्रोटीन्स की कमी नही होती है.

सवाल- भविष्य में यह सर्जरी क्या औऱ एडवांस हो सकती है?

जवाब- भविष्य में ये सभी सर्जरी रोबोटिक पद्धति द्वारा होंगी. बड़ी-बड़ी कंपनिया अच्छे प्लेटफार्म ला रही हैं. अब ये सर्जरी मुंह के रास्ते होगी. इसमें मुंह के जरिए एक लेपरोस्क डाल कर पेट का आकार छोटा किया जाएगा. इससे शरीर पर किसी तरह का कोई निशान नही होगा. इसे लेप्रोस्कोपिक पद्धति कहा जाएगा.

मोहक बेरियाट्रिक्स एंड रोबोटिक्स में अभी तक दस हजार सफल बेरियाट्रिक सर्जरी हो चुकी है. झारखंड के मुकेश कुमार की कहानी उन्हीं में से एक है. ऐसे कई लोग मोटापे से छुटकारा पाकर स्वस्थ जीवन जी रहे हैं. बेरियाट्रिक सर्जरी करने वाले ख्यातनाम सर्जन डॉ मोहित भंडारी खुद ओटी से लाइव बता रहे हैं कि ये सर्जरी कैसे होती है, इसके क्या फायदे हैं, कौन लोग इसे करा सकते हैं, कितना खर्च आता है, क्या इस सर्जरी का कोई साइड इफेक्ट होता है, सर्जरी के लिए मोहक अस्पताल, इंदौर को क्यों चुनें. इन सभी सवालों के जवाब औऱ मुकेश कुमार की कहानी देखने-सुनने के नीचे दिया गया वीडियो देखें. आप हमारी वेबसाइट www.indiaobesity.in पर भी विजिट कर सकते हैं या फिर मोबाइल नंबर 09893037790 पर संपर्क कर सकते हैं.

(आजतक लाइव टीवी देखने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.)

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