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भारत में नहीं चला है मुरली का ‘दूसरा’

दुनिया में सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने वाले मुथया मुरलीधरन और शेन वार्न की बलखाती गेंदों का स्पिनरों की मददगार रही भारतीय पिचों पर कभी जादू नहीं चल पाया तथा श्रीलंकाई स्पिनर की वर्तमान श्रृंखला में असफलता ने इस तथ्य को मजबूती दी है.

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भाषानई दिल्‍ली, 01 December 2009
भारत में नहीं चला है मुरली का ‘दूसरा’ मुथया मुरलीधरन

" "दुनिया में सर्वाधिक टेस्ट विकेट लेने वाले मुथया मुरलीधरन और शेन वार्न की बलखाती गेंदों का स्पिनरों की मददगार रही भारतीय पिचों पर कभी जादू नहीं चल पाया तथा श्रीलंकाई स्पिनर की वर्तमान श्रृंखला में असफलता ने इस तथ्य को मजबूती दी है. यह आलम तब है जबकि भारतीय पिचें शुरू से ही स्पिनरों के मुफीद रही हैं और आंकड़ा भी इसे सही साबित करता है. भारतीय सरजमीं पर सर्वाधिक विकेट लेने वाले 11 गेंदबाजों में नौ स्पिनर हैं लेकिन मुरली और वार्न को भारत की पिचें कभी रास नहीं आयी और यहां इन दोनों का रिकार्ड बहुत बुरा रहा है.

मुरलीधरन ने वर्तमान श्रृंखला के पहले दो मैच में 79 . 20 की औसत से पांच विकेट लिये हैं. अहमदाबाद में खेले गये पहले टेस्ट मैच में उन्होंने 221 रन देकर तीन विकेट लिये जबकि कानपुर में दूसरे मैच में उन्हें 175 रन खर्च करने के बाद केवल दो विकेट मिले. इनमें से दूसरे मैच में पिच स्पिनरों को मदद दे रही थी तथा जो 28 विकेट गेंदबाजों के खाते में जुड़े उनमें से 20 विकेट स्पिनरों ने लिये थे.

ऐसा पहली बार नहीं है जबकि मुरलीधरन भारत में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाये हों. इससे पहले जब भी वह भारतीय दौरे पर आये तब उन्हें मुंह की खानी पड़ी. अब तक अपने कैरियर में 131 मैच में 22.58 की औसत से रिकार्ड 788 विकेट लेने वाले मुरलीधरन ने भारत में दस टेस्ट मैच खेले हैं और उनमें उनके नाम पर 45.08 की औसत से केवल 36 विकेट दर्ज हैं.

इस आफ स्पिनर के नाम पर एक पारी में सर्वाधिक 66 बार पांच या इससे अधिक विकेट तथा मैच में 22 बार दस या इससे अधिक विकेट लेने का रिकार्ड है लेकिन भारत में वह केवल दो बार पारी में पांच विकेट ले पाये जबकि दस विकेट के आंकड़े तक तो वह पहुंच ही नहीं पाये हैं. मुरलीधरन की टेस्ट मैचों में श्रीलंका की 53 जीत में भूमिका है लेकिन इनमें भारतीय धरती पर दर्ज की गयी कोई जीत शामिल नहीं है. उनकी मौजूदगी में श्रीलंका ने भारत में जो दस मैच खेले उनमें से छह में उसे हार मिली और इनमें से चार मैच में तो वह पारी के अंतर से पराजित हुआ." "भारत के लगातार चौथे दौरे में असफल रहने के बाद मुरलीधरन इतना निराश हो गये हैं कि अब 2011 विश्व कप से पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने की सोच रहे हैं.

उन्होंने कहा,‘‘मैं 37 साल का हूं और 15..16 ओवर करने के बाद थक जाता हूं. ...यदि मुझे लगता है कि मेरे साथ सब कुछ सही नहीं चल रहा है तो मैं विश्व कप से पहले खेल के सभी प्रारूप से संन्यास ले सकता हूं.’’ मुरलीधरन से पहले टेस्ट विकेटों के शिखर पर काबिज रहे वार्न की गेंदों की भारतीय पिचों पर जिस कदर धुनाई हुई उससे इस लेग स्पिनर को दिन में ही तारे दिखने लगे थे. उनके लिये भारत का प्रत्येक दौरा दु:स्वप्न से कम नहीं रहा. कलाईयों के इस जादूगर ने भारत में नौ टेस्ट मैच में 43.11 की औसत से 34 विकेट लिये और केवल एक बार उन्हें पारी में पांच से अधिक विकेट लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

वार्न का ओवरआल रिकार्ड 145 मैच में 25.41 की औसत 708 विकेट है. उन्होंने 37 बार पारी में पांच या इससे अधिक तथा मैच में दस बार दस या इससे अधिक विकेट लिये हैं. वार्न के रहते हुए आस्ट्रेलिया ने 92 मैच जीते हैं लेकिन इनमें से भारतीय धरती पर केवल चार मैच में उसे जीत मिली और उसमें भी उसके तेज गेंदबाजों का अहम योगदान रहा. यहीं नहीं इनमें से चार मैच में आस्ट्रेलिया को हार का सामना भी करना पड़ा. भारतीय धरतीं पर सर्वाधिक विकेट लेने वाले विदेशी गेंदबाजों में मुरलीधरन या वार्न का नाम शामिल नहीं लेकिन यह रिकार्ड एक स्पिनर डेरेक अंडरवुड के नाम पर दर्ज है. इंग्लैंड के बायें हाथ के स्पिनर अंडरवुड ने भारतीय धरती पर 16 मैच में 26.51 की औसत से 54 विकेट लिये हैं.

यही नहीं वार्न की तरह लेग स्पिनर और उनके हमवतन रिची बेनो तो भारत में खासे सफल रहे हैं. उन्‍होंने भारत में आठ मैच में 18.38 की औसत से 52 विकेट चटकाये हैं जबकि वेस्टइंडीज के आफ स्पिनर लास गिब्स के नाम पर नौ मैच में 23.38 की औसत से 39 विकेट दर्ज हैं. भारतीय धरती पर सर्वाधिक विकेट भारत के लेग स्पिनर अनिल कुंबले (350) के नाम दर्ज हैं और उनके बाद आफ स्पिनर हरभजन सिंह (221)का नंबर आता है.

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