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राजीव के प्रेम प्रसंग से अवगत था गांधी-नेहरू परिवार

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सोनिया से प्रेम प्रसंग की बात जब उनकी मां इंदिरा गांधी को पता चली तो वह भी कम चकित नहीं थीं और उन्होंने अपनी एक करीबी रिश्तेदार को बेहद दिलचस्प अंदाज में अपने पुत्र के इस संबंध के बारे में जानकारी दी थी.

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भाषानई दिल्‍ली, 19 August 2009
राजीव के प्रेम प्रसंग से अवगत था गांधी-नेहरू परिवार राजीव गांधी

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सोनिया से प्रेम प्रसंग की बात जब उनकी मां इंदिरा गांधी को पता चली तो वह भी कम चकित नहीं थीं और उन्होंने अपनी एक करीबी रिश्तेदार को बेहद दिलचस्प अंदाज में अपने पुत्र के इस संबंध के बारे में जानकारी दी थी.

राजीव के प्रेम ने कई सुंदर लड़कियों को दिया झटका
इंदिरा गांधी ने एक बार फोन कर अपनी बुआ विजय लक्ष्मी पंडित से कहा था कि क्या वह हल्का झटका खाने को तैयार हैं. इस पर पंडित ने कहा कि निश्चित तौर पर अब हम सभी लोग झटके खाने के आदि हो चुके हैं. पंडित ने अपनी आत्मकथा ‘‘द स्कोप आफ हैप्पीनैस’’ में लिखा है कि इंदिरा ने उनसे कहा कि आप बैठकर मेरी बात सुनिये. राजीव ने लिखा है कि उसे एक इतालवी लड़की (सोनिया) से प्यार हो गया है. इस पर पंडित ने फौरन कहा कि मैं इसे आश्चर्य नहीं कहूंगी, लेकिन मेरा मानना है कि इस खबर से हमारी कई (भारतीय) सुंदर लड़कियों को झटका लगेगा.

गांधी-नेहरु परिवार को पता था प्रेम प्रसंग
राजीव के इस रिश्ते से एक बात तो स्पष्ट है कि सोनिया से उनके प्यार को लेकर न केवल उनकी मां इंदिरा गांधी, बल्कि पूरा गांधी-नेहरू परिवार काफी उत्साहित था. इन दोनों की पहली मुलाकात 1965 में इंग्लैंड में हुई थी और 1968 में दोनों विवाह के बंधन बंध गये.

मीठे व्यंजनों के बड़े शौकीन थे राजीव
राजीव गांधी से जुड़ीं अपनी यादों को ताजा करते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं क्रांग्रेस के वरिष्ठ नेता वसंत साठे ने बताया कि बहुत कम लोग यह बात जानते होंगे कि राजीव मीठे व्यंजनों के बड़े शौकीन थे. उन्होंने बताया कि 1991 में जब वह वर्धा से चुनाव लड़ रहे थे उनके समर्थन में प्रचार करने के लिए राजीव गांधी को एक चुनावी सभा में आना था. साठे के मुताबिक, व्यस्त कार्यक्रम के कारण राजीव गांधी निश्चित समय पर नहीं पहुंच सके लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके आने की उम्मीद नहीं छोड़ी. राजीव अंतत: रात दो बजे वर्धा पहुंचे और उन्होंने रात ढाई बजे जनसभा को संबोधित किया.

रसगुल्ले और मराठी व्यंजन के दिवाने थे राजीव
साठे ने बताया कि उस जनसभा में राजीव ने लोगों से उन्हें जिताने की अपील करते हुए कहा था कि साठेजी कांग्रेस के उन गिने-चुने नेताओं में से हैं जो मुझसे नाराज हो जाते हैं. मैं इनकी नाराजगी की इसलिए परवाह करता हूं क्योंकि इनके अनुभवों से मुझे काफी लाभ मिलता है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने बताया कि जनसभा के बाद जब उनकी पत्नी जयश्री साठे ने राजीव से पूछा कि क्या आप खाना खायेंगे तो उन्होंने कहा कि अवश्य खाउंगा क्योंकि आज मैंने खाना ही नहीं खाया है. किसी ने मुझसे खाने के लिए पूछा हीं नहीं. साठे के अनुसार इसके बाद राजीव गांधी वर्धा के रेस्ट हाउस में गये और वहां उन्होंने खाना खाया. साठे ने बताया कि राजीव ने खाने की बजाय मिठाइयां विशेषकर रसगुल्ले और मराठी व्यंजन पूरण पोड़ी चाव से खायी और उसकी काफी तारीफ की.

राजीव का आखिरी चुनाव
साठे ने बताया कि वर्धा से चलते समय राजीव गांधी ने उनसे एक विचित्र बात कही थी जिसे सोचकर वह आज भी हैरान होते हैं. राजीव ने उनसे कहा था कि साठे जी, इन चुनावों में कई लोगों से काफी विचित्र अनुभव मिले हैं और चुनाव के बाद आप मुझे एक बदला हुआ व्यक्ति पायेंगे. उन्होंने कहा कि राजीव की इस बात का क्या अर्थ है, वह आज तक नहीं समझ पाये लेकिन इस घटना के महज तीन दिन बाद ही उनकी मृत्यु का दुखद समाचार मिला. गौरतलब है कि 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में एक चुनावी सभा में लिट्टे उग्रवादियों के आत्मघाती विस्फोट में राजीव गांधी की महज 44 वर्ष की उम्र मे मृत्यु हो गयी थी.

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