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कंप्यूटर साइंस: दिमाग का खेल

नास्कॉम-मैकिंसे की हाल की रिपोर्ट भारतीय आइटी इंडस्ट्री के लिए अगले 11 साल तक के लिए महत्वाकांक्षी परिदृश्य पेश करती है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत को सॉफ्टवेयर निर्यात से मिलने वाला कुल राजस्व 2020 तक 175 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा.

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Sahitya Aajtak 2018
संकलनः धीरेंद्र प्रताप सिंह और मानसी शर्मानई दिल्‍ली, 02 August 2009
कंप्यूटर साइंस: दिमाग का खेल

नास्कॉम-मैकिंसे की हाल की रिपोर्ट भारतीय आइटी इंडस्ट्री के लिए अगले 11 साल तक के लिए महत्वाकांक्षी परिदृश्य पेश करती है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत को सॉफ्टवेयर निर्यात से मिलने वाला कुल राजस्व 2020 तक 175 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा. और घरेलू बाजार से मिलने वाला राजस्व 2008 के 12 अरब डॉलर से चार गुना बढ़कर 2020 में 50 अरब डॉलर तक हो जाएगा. ऐसे में कंप्यूटर साइंस के पेशेवरों के लिए संभावनाओं का बखूबी अंदाजा लगाया जा सकता है. कंप्यूटर साइंस में एक स्तरीय संस्थान कैसा हो, इस सवाल के जवाब में आइआइटी कानुपर में कंप्यूटर साइंस ऐंड इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर संजीव अग्रवाल कहते हैं, ''किसी भी संस्थान के अप-टू-द-मार्क होने के लिए वहां शोध की सुविधाएं और फैकल्टी गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए.''

समय से साथ अपडेट रहना जरूरी
आज लगातार बदलती प्रौद्योगिकी के दौर में कंप्यूटर साइंस की स्तरीय शिक्षा के लिए किसी संस्थान में अच्छी शिक्षण सुविधाएं होने के साथ ही यह देखना भी जरूरी है कि वह भविष्य की जरूरतों के मुताबिक खुद को अपडेट रखता है या नहीं. कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में शिक्षा देने के लिए कई प्रकार के निजी संस्थान भी खुल चुके हैं जहां सर्टिफिकेट कोर्स से लेकर किसी विदेशी विश्वविद्यालय के साथ अनुबंध करते हुए डिग्री भी दी जाती है. आकर्षक विज्ञापन छात्रों को उत्तेजित करते हैं. लेकिन झंसी स्थित बुंदेलखंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी में कंप्यूटर साइंस ऐंड इंजीनियरिंग विभाग के प्राध्यापक आर.एन. वर्मा कहते हैं, ''किसी भी संस्थान में प्रवेश लेने के पहले छात्र को अपने वरिष्ठ सहपाठियों से संस्थान में पढ़ाई की गुणवत्ता और प्लेसमेंट की संभावनाओं को लेकर आश्वस्त होना जरूरी है.'' कंप्यूटर साइंस के वे संस्थान उपयोगी माने जाते हैं जो अपने पाठ्यक्रम में सूचना प्रद्योगिकी, टेलीकॉम, आइटी आधारित उद्योगों आदि में काम आने वाले विषयों मसलन-डिवाइस ड्राइवर्स, चिप डिजाइनिंग, वायरलेस नेटवर्किंग, ई-कॉमर्स, क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम, नेटवर्क सिक्युरिटी जैसे विषयों को शामिल कर रहे हैं. सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली स्थित आईआईटी वीएलएसआइ डिजाइन टूल्स ऐंड टेक्नोलॉजी में काफी स्पेशलाइज्ड और इंडस्ट्री ओरिएंटेड कार्यक्रम चला रहा है. यहां अच्छी फैकल्टी को प्रोत्साहित करने के लिए 'आउटस्टैडिंग यंग फैकल्टी फैलोशिप' जैसे पुरस्कार शुरू किए गए हैं.

जरूरत के हिसाब से बिठाएं तालमेल
हैदराबाद स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान उन विशिष्ट संस्थाओं में से एक है जहां शोध कार्य सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं. संस्थान ने इलेक्ट्रिक ग्रिड का निर्माण करने वाली कंपनी एबीबी और अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक कॉरपोरेशन के साथ समझैता किया है. शोध और विकास के प्रोत्साहन पर सिस्को इंडिया के डायरेक्टर सुभाष राव का मानना है, ''आज जबकि बाजार प्रोडक्ट आधारित नए-नए प्रयोगों पर केंद्रित हो गया है, ऐसे में उन छात्रों के लिए संभावनाएं बढ़ जाती हैं जो व्यावहारिक ज्ञान के आधार पर अपनी दक्षता बढ़ाते हैं. उद्योगों की जरूरतों के मुताबिक तालमेल बिठाना छात्रों की तरक्की की संभावनाओं के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होगा.'' कंप्यूटर साइंस में अब मास्टर्स प्रोग्राम और पीएचडी की भी मांग है. अग्रवाल कहते हैं कि सिर्फ बैचलर कोर्स के लिए बुनियादी ढांचे के आधार पर संस्थानों का आकलन ठीक नहीं है. कंप्यूटर साइंस तेजी से विकसित हो रहा क्षेत्र है. इसलिए इस क्षेत्र में मास्टर्स प्रोग्राम और पीएचडी कोर्सेस में प्रवेश से पहले बुनियादी ढांचे और फैकल्टी की पड़ताल जरूरी है.

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