Sahitya AajTak

मी टू, ताजमहल, अयोध्या पर मुनव्वर राना के वे बोल, जिन्होंने सुर्खियां बटोरी

आइए जानते हैं मशहूर शायर मुनव्वर राना के कुछ ऐसे विवादों के बारे में जिन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी...

Advertisement
जय प्रकाश पाण्डेयनई दिल्ली, 06 February 2019
 मी टू, ताजमहल, अयोध्या पर मुनव्वर राना के वे बोल, जिन्होंने सुर्खियां बटोरी मुनव्वर राना (फोटो: आजतक)

मुनव्वर राना अपनी शायरी को लेकर तो मशहूर हैं ही, निजी जीवन में भी इतने बेलाग हैं कि हर बार एक नई बहस छेड़ सुर्खियों में आ जाते हैं. चाहे वह मीटू हो, ताजमहल, प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात, अयोध्या विवाद,  नोटबंदी, गौ-हत्या, हिंदी-उर्दू, मंचीय कविता या कुछ और… हर मसले पर उनकी खुद की ओपीनियन है. आप उनसे सहमत या असहमत तो हो सकते हैं, लेकिन उन्हें खारिज नहीं कर सकते. यही वजह है कि सियासत में एक दूसरे के घोर विरोधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव तक मुनव्वर राना से मिलने को हमेशा उत्सुक रहे.

‘साहित्य आजतक’ के पाठकों के लिए मुनव्वर राना के वे बयान, जिन्होंने तब तो सुर्खियां बटोरी ही, जब उन्होंने बोला था, पर वह  अब हमारे दौर के एक मशहूर शायर के विचारों के रूप में प्रासंगिक हैं.

मी टूः बॉलीवुड से लेकर राजनीति तक में तूफान खड़ा करने वाले मी टू के सवाल पर मुनव्वर राना ने मर्दों की हिमायत की. उनका तर्क था कि बहुत से मर्दों के साथ भी मी टू होता है, पर इसे कोई भी मानेगा नहीं. मर्द एक ऐसे दुकानदार की तरह होकर रह गया है, जो किसी को मारे या मार खाए, बेईमान दुकानदार ही कहलाएगा,

साम्प्रदायिकताः देश साम्प्रदायिकता के डेंगू का शिकार हो गया है, जो मुल्क के लिए अच्छा नहीं है. मुल्क साम्प्रदायिकता के गड्ढे में जाने लगा है, यह खतरनाक स्थिति है. आज देश के मुसलमान कुलसरात से गुजर रहे हैं जो तलवार से भी ज्यादा तेज है. हमें बिना किसी सबूत के निशाना बनाया जा रहा है.

शायरीः अब शायरी बाबा रामदेव का खिचड़ा बन गई है. अब कोई भी शायर पूरी गजल पढ़ने की हिम्मत नहीं कर पाता है. इस वक्त के शायर पहले सुनने वालों में करंट देखते हैं. शायर कव्वाल होकर रह गया है. पहले शायर लहजे से पहचाना जाता था. अब कोई अंदाज नहीं बचा है, सब तीरंदाज हो गए हैं. मुजरे होना बंद हुए तो तालियां शायरी में आ गईं. सुनने वाले कुछ भी करें, उससे सुनाने वाले का मयार खराब नहीं होना चाहिए.

देशभक्तिः हम हिंदुस्तानी हैं, यह प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं है. हमारे पूर्वज इसी मिट्टी में दफन हैं. जिन्हें शक हो वे हमारा डीएन चेक करवा लें.

राजनीतिः वर्तमान राजनीति देश को विभाजित करने का प्रयास कर रही है. लेकिन जरूरत है देश की एकता को बचाकर रखा जाए. कानून बनाकर जातीय राजनीति करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. तभी देश सुरक्षित रह पाएगा. इस देश की एकता हमें विरासत में मिली है लेकिन राजनेता अपने स्वार्थ के लिए देश को विभाजित करने पर तुले हैं.

ताजमहल, नोटबंदी, गौ-हत्याः ताजमहल देश की ऐतिहासिक धरोहर व संपत्ति है न कि किसी संप्रदाय की जागीर. कुछलोगों ने इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया.  देश में नोटबंदी तो हुई, लेकिन इसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाया. हां गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध का समर्थन करता हूं.

मोदी से मुलाकातः मुनव्वर राना भी सहिष्णुता को लेकर अवार्ड वापसी करने वालों में शामिल थे. फिर भी वह प्रधानमंत्री मोदी से मिलने गए थे. इस पर उनका बयान था, अवार्ड वापस करना मेरे गुस्से का इजहार था, लेकिन मेरी मां के इंतकाल पर पीएम मोदी ने अपने हाथ से लिखकर सांत्वना खत भेजा था. उनकी इस मोहब्बत का कर्जदार बन गया हूं मैं और यही सोचकर उनसे मुलाकात के लिए गया।

हिंदू-मुसलमानः इस वक्त मुल्क में रोज नए सियासी तमाशे हो रहे हैं. कोई न कोई मुद्दा शुरू हो जाता है. हिंदू-मुसलमान सामाजिक मसला नहीं है. मुसलमान सियासत के शिकार होते जा रहे हैं. हम अपने समाज की तहजीब से बाहर निकलने की कोशिश में आपस में भाईचारा खत्म करने के काम में लग गए हैं. वर्तमान में सबसे ज्यादा मुसलमानों को मुसलमानों से खतरा है.

मंदिर-मस्जिदः आस्था के फैसले अदालतों में नहीं होते. आज फिर मंदिर-मस्जिद के नाम पर सियासी शोर शुरू हो गया है. एक शायर की हैसियत से मुझे इन हालात पर एक आम आदमी के मुकाबले कहीं ज्यादा तकलीफ होती है. इस मुल्क की मिट्टी ने नफरत के बीज को बहुत गहराई तक नहीं जाने दिया है. सियासी उलट-पुलट में यह खत्म हो जाएगा. अगर नहीं भी होता है तो भी यह मुल्क पाकिस्तान नहीं बनेगा, मगर हिन्दुस्तान में कई हिन्दुस्तान बन जाएंगे.

उर्दू जुबानः जब कोई भाषा हुकूमत की मदद का इंतजार करने लगे तो उसका अंजाम भी वही होता है, जो सरकारी अस्पताल में गरीब मरीज का होता है. उर्दू शायरी में हिंदी को माइनस करने के बाद कुछ बचता ही नहीं है. हमारे यहां उर्दू वालो ने खासकर उर्दू को हिंदी से अलग करके देखा ही नहीं. हमने कभी ऐतराज नहीं किया, लोग कहते हैं हिंदी ग़ज़ल. हम कहते हैं, हिंदी ग़ज़ल क्या होती है. ग़ज़ल के मायने महबूब से बातें करना होता है. जो जुबान महबूब को आती हो, हम उसी जुबान में बात करेंगे.

समाजः अगर वक्त में पीछे जाकर कुछ बदलने का मौका मिले तो सामाजिक व्यवस्था को पहले जैसा करना पसंद करूंगा. जैसा कि 50-60 साल पहले मुहल्ले होते थे, कॉलोनियां नहीं. उन मुहल्लों में समाज के हर धर्म, वर्ग और तबके के लोग साथ रहते थे. आज कालोनियां बनाकर समाज को बांट दिया गया तो मुहब्बतें भी खत्म हो गयीं. आज हालात ये हैं कि एक मुल्क और शहर में रहकर जो लोग एक-दूसरे के त्यौहारों के बारे में नहीं जानते तो एक-दूसरे का गम कैसे जान पाएंगे.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
पाएं आजतक की ताज़ा खबरें! news लिखकर 52424 पर SMS करें. एयरटेल, वोडाफ़ोन और आइडिया यूज़र्स. शर्तें लागू
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay