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ये तो बस अंगड़ाई है, ब्रह्मोस का अगला अवतार PAK-चीन के लिए होगा सबसे बड़ा शोक दिवस!

सुखोई और ब्रह्मोस की सुपर घातक जोड़ी, भारत के डिफेंस सिस्टम का वो डेडली कांबिनेशन है जिसे देखकर चीन-पाकिस्तान सबका दिल दहल जाएगा.

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aajtak.in
मंजीत सिंह नेगी नई दिल्ली, 23 November 2017
ये तो बस अंगड़ाई है, ब्रह्मोस का अगला अवतार PAK-चीन के लिए होगा सबसे बड़ा शोक दिवस! भारत की ताकत से चीन-पाकिस्तान घबराया

सुखोई और ब्रह्मोस की सुपर घातक जोड़ी, भारत के डिफेंस सिस्टम का वो डेडली कांबिनेशन है जिसे देखकर चीन-पाकिस्तान सबका दिल दहल जाएगा. इस घातक जोड़ी से ना तो पीओके के टेरर कैंप बचेंगे, ना कराची-इस्लामाबाद में बैठे आतंक के आकाओं की खैर रहेगी. चीन को भी चपेट में आने की चिंता सताएगी. आपके लिए य़े जानना जरूरी है कि आखिर हम सूखोई और ब्रह्मोस की जोड़ी को क्यों डेडली कांबिनेशन कहते हैं.

-ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है जो 290 किलोमीटर तक लक्ष्य भेद सकता है. सूखाई-30 फुल टैंक ईंधन के साथ 2500 किलोमीटर तक मार कर सकता है. वजन के साथ सुखोई-30 की क्षमता घटकर 1800 किलोमीटर रह जाती है, यानी सुखोई और ब्रह्मोस की जोड़ी 2100 किलोमीटर तक टारगेट हिट कर सकती है.

मंगलवार को परीक्षण के बाद ये तय हो गया कि ब्रह्मोस का पैनापन सातवें आसमान तक पहुंच चुका है. अब दुश्मनों पर सीधे आसमान से ब्रहोस का बज्र गिरेगा. ऐसी मार पड़ेगी कि दुश्मन पानी मांगने के भी काबिल नहीं बचेगा.

सुखोई और ब्रह्मोस की जोड़ी भविष्य में दुश्मनों के लिए और भी घातक साबित होने वाली है क्योंकि डीआरडीओ के साइंटिस्ट ब्रहोस की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहे हैं. जल्द ही वो दिन आएगा जब 290 किलोमीटर तक मार करने वाले ब्रहोस की क्षमता 600 किलोमीटर तक मार करने की हो जाएगी, वो दिन हमारे दुश्मनों के लिए सबसे बड़ा शोक दिवस होगा. 

चिंता जताते रह गए चीन-पाक, सुखोई पर सवार ब्रह्मोस ने उड़ा दिया टारगेट

ब्रह्मोस का निशाना अचूक है इसलिए इसे 'दागो और भूल जाओ' मिसाइल भी कहा जाता है. दुनिया की कोई भी मिसाइल तेज गति से हमले के मामले में इसकी बराबरी नहीं कर सकती, यहां तक की अमेरिका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके मुकाबले नहीं ठहरती. 

- ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है, ये कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है इसलिए रडार की पकड़ में नहीं आती.

- भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर ब्रह्मोस का नाम रखा गया है क्योंकि इसे डीआरड़ीओ ने भारत-रूस के ज्वाइंट वेंचर के तौर पर डेवलप किया.

- ब्रह्मोस 3700 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से 290 किलोमीटर तक के ठिकानों पर अटैक कर सकती है.

- ब्रह्मोस से 300 किलो वजन तक के न्यूक्लियर वारफेयर दुश्मनों के ठिकाने पर गिराए जा सकते हैं.

- 2007 में ब्रह्मोस को सैन्य बेड़े में शामिल किया गया आर्मी के पास फिलहाल इसकी तीन रेजिमेंट हैं.

- नेवी के 25 शिप पर ब्रह्मोस की तैनाती कर हो चुकी है.

- अप्रैल 2017 में पहली बार नेवी ने ब्रह्मोस को वॉरशिप से जमीन पर दागा था, ये टेस्ट कामयाब रहा, नेवी को इसका वॉरशिप वर्जन मिल चुकी है.

- भारत ने ब्रह्मोस को अरुणाचल प्रदेश में चीन से लगी सीमा पर तैनात किया था तब पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने एतराज जताया था.

अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे चीन और पाकिस्तान के लिए चिंताओं की खाई है क्योंकि डीआरडीओ ब्रह्मोस की मारक क्षमता को लगातार मांजने में लगा है. डीआरडीओ के वैज्ञानिक हाइपरसोनिक वर्जन यानी ध्वनि से पांच गुना तेज रफ्तार से उड़ने वाली ब्रह्मोस मिसाइल बनाने में लगी है.

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