Sahitya AajTak

साहित्यिक आलोचना के रचना पुरुष थे नामवर सिंह, राजनीति में भी आजमाया था हाथ

हिंदी साहित्यकार नामवर सिंह का दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया है. उनके लेखन पर जितनी चर्चा हुई, उतनी ही चर्चा उनके कथनों और भाषणों पर भी की गई थी.

Advertisement
aajtak.in [Edited By: मोहित पारीक]नई दिल्ली, 20 February 2019
साहित्यिक आलोचना के रचना पुरुष थे नामवर सिंह, राजनीति में भी आजमाया था हाथ नामवर सिंह

हिंदी के प्रख्यात साहित्यकार नामवर सिंह का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है. वे पिछले एक महीने से दिल्ली के एम्स अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती थे. नामवर सिंह हिंदी साहित्य में आलोचना के रचना पुरुष कहे जाते थे. उनके लेखन पर जितनी चर्चा हुई, उतनी ही चर्चा उनके कथनों और भाषणों पर भी की गई थी. उन्हें आलोचना और साक्षात्कार विधा को नई ऊंचाई देने का श्रेय जाता है. कविता के नए प्रतिमान के लिए 1971 में नामवर सिंह को साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया था.

नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई 1927 को जीयनपुर (अब चंदौली) वाराणसी में हुआ था. उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में एमए और पीएचडी की और उसके बाद उन्होंने कई वर्षों तक वहां पढ़ाया भी. बीएचयू के साथ ही उन्होंने सागर, जोधपुर विश्वविद्यालय, आगरा विश्वविद्यालय में अध्यापन किया था. फिर वो दिल्ली के जेएनयू में आ गए और वहीं से रिटायर हुए. नामवर सिंह उर्दू के भी बड़े जानकार थे.

वे 'आलोचना' त्रैमासिक के प्रधान संपादक रहे और उन्होंने 'जनयुग' साप्ताहिक (1965-67) का संपादन भी किया. साल 1992 से राजा राममोहन राय पुस्तकालय प्रतिष्ठान के अध्यक्ष रहे.

अध्यापन और लेखन के अलावा उन्होंने राजनीति में भी हाथ आजमाया था. साल 1959 में वे सक्रिय राजनीति में उतरे और उन्होंने इस साल चकिया-चंदौली सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के बैनर तले लोकसभा चुनाव लड़ा था. हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

आलोचना: बकलम खुद, हिंदी के विकास में अपभ्रंश का योग, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ, छायावाद, पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, दूसरी परंपरा की खोज, वाद विवाद संवाद.

साक्षात्कार: कहना न होगा

सम्पादित ग्रंथ: कहानी: नई कहानी, कविता के नये प्रतिमान, दूसरी परम्परा की खोज, वाद विवाद सम्वाद, कहना न होगा. चिंतामणि भाग-3, रामचन्द्र शुक्ल संचयन, हजारीप्रसाद द्विवेदी:संकलित निबन्ध, आज की हिन्दी कहानी, आधुनिक अध्यापन रूसी कविताएं, नवजागरण के अग्रदूत: बालकृष्ण भट्ट.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay