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पुण्यतिथि विशेषः ख़लील जिब्रान, जिनकी रचनाओं ने मानव जाति को दी दिशा

हिंदी साहित्य का शायद ही कोई ऐसा पाठक हो जिसने ख़लील जिब्रान का नाम न सुना हो. ख़लील एक उम्दा गद्य लेखक होने के साथ-साथ एक कवि और एक चित्रकार के रूप में जाने गए. उनकी रचनाओं के अनुवाद दुनिया की अधिकांश भाषाओं में हुए हैं.

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जय प्रकाश पाण्डेयनई दिल्ली, 10 April 2019
पुण्यतिथि विशेषः ख़लील जिब्रान, जिनकी रचनाओं ने मानव जाति को दी दिशा ख़लील जिब्रान [ Getty Images ]

वह अपनी सूक्तियों के लिए प्रसिद्ध हैं, और विश्व साहित्य में उनका एक अप्रतिम स्थान है. लघु और लंबी कहानियों के साथ ही उन्होंने उम्दा कविताएं भी लिखीं. हम बात कर रहे हैं महान लेखक ख़लील जिब्रान की, जिनकी आज पुण्यतिथि है. हिंदी साहित्य का शायद ही कोई ऐसा पाठक हो जिसने ख़लील जिब्रान का नाम न सुना हो. ख़लील एक उम्दा गद्य लेखक होने के साथ-साथ एक कवि और एक चित्रकार के रूप में जाने गए. उनकी रचनाओं के अनुवाद दुनिया की अधिकांश भाषाओं में हुए और चित्रों की प्रदर्शनी भी कई देशों में लगी.

ख़लील जिब्रान का जन्म सीरिया देश के माउंट लेबनान प्रांत के बशरी नामक गांव में सन् 1883 में 6 फरवरी को हुआ था. वह मैरोनाइट चर्च संप्रदाय से जुड़े थे. पिता का नाम ख़लील और माता का नाम कामिला था. वह अपने माता-पिता की प्रथम संतान थे व उनका सबंध उत्तरी लेबनान के एक अमीर घराने से था. कहते हैं कि वह शुरू से ही क्रांतिकारी विचारों के थे और अपने दर्शन और चिंतन के कारण उन्हें समकालीन पादरियों और अधिकारी वर्ग का कोपभाजन होना पड़ा.

आलम यह हुआ कि पहले ख़लील जिब्रान को जाति से बहिष्कृत किया गया, जो बाद में देश निकाला तक पहुंच गया. 12 वर्ष की आयु में वह पहले अपने माता-पिता के साथ बाहर निकले और बेल्जियम, फ्रांस, अमेरिका आदि देशों में भ्रमण करते हुए अंततः साल 1912 में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में स्थायी रूप से रहने लगे. ख़लील जिब्रान ने चित्रकला का बहुत गहन अध्ययन किया था. अपनी सभी किताबों के लिए चित्र उन्होंने खुद बनाए. उनके जीवन की कठिनाइयों की छाप उनकी कृतियों में भी साफ दिखती है.

ख़लील जिब्रान ने अपने जीवन में अनेकों कहानियों की रचना की. इन कहानियों में इन्होंने समाज, व्यक्ति, धार्मिक पाखण्ड, वर्ग संघर्ष, प्रेम, न्याय, कला, आदि विषयों को आधार बनाया. इनकी कहानियों में पाखंड और मानवीय लालच के प्रति गहरा विद्रोह साफ दिखता है. इसके साथ ही उनकी रचनाओं में जीवन के प्रति गहरी अनुभूति, संवेदनशीलता, भावात्मकता व्यंग्य के पुट के साथ मौजूद है. उन्होंने अपनी रचनाओं में प्राकृतिक एवं सामाजिक वातावरण का चित्रण किया.

ख़लील जिब्रान के साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने जो कुछ भी लिखा, वह देश काल की सीमा में बंधा हुआ न होकर सबके लिए व हर काल के लिए था. हालांकि उन्हें आधुनिक अरबी साहित्य में प्रेम का संदेशवाहक माना जाता है, पर उनकी समस्त रचनाओं में सामाजिक अन्याय के प्रति बुलंद आवाज़ मिलती है.

उनकी रचनाओं में एक समूचा जीवन दर्शन दिखता है. उन्हें पढ़कर अनुभव होता है कि संसार में व्याप्त पीड़ा और विषमता के लिए स्वयं मनुष्य जिम्मेदार है और इन बुराइयों को दूर करने के लिए मनुष्य को स्वयं ही प्रयत्न करना होगा. उनकी लेखन शैली में कवि की कल्पना शक्ति, कलाकार की शालीनता और हृदय की संवेदनशीलता की झलक मिलती है.

ख़लील जिब्रान के बारे में यह चर्चित है कि उन्हें हर बात कहने के पहले एक या दो वाक्य सूत्र रूप में, सूक्तियों में कहने की आदत थी. ख़लील ने अपने विचार उच्च कोटि के सुभाषित या कहावतों रूप में अपने पाठकों के सामने रखे. कहा जाता है कि वह अपने विचारों को कागज के टुकड़ों, थिएटर कार्यक्रम के कागजों, सिगरेट की डिब्बियों के गत्तों तथा फटे हुए लिफाफों पर लिखकर रख देते थे. जिन्हें उनकी सेक्रेटरी बारबरा यंग इकट्ठा कर लेती थी और बाद में उन्हें संकलित कर प्रकाशित करवाती थीं.

उनकी प्रमुख कृतियों में, द निम्फ्स ऑव द वैली, स्प्रिट्स रिबेलिअस, ब्रोकन विंग्स, अ टीअर एंड अ स्माइल, द प्रोसेशन्स, द टेम्पेस्ट्स, द स्टॉर्म, द मैडमैन, ट्वेंटी ड्रॉइंग्स, द फोररनर, द प्रोफेट, सैंड एंड फोम, किंगडम ऑव द इमेजिनेशन, जीसस : द सन ऑव मैन, द अर्थ, गॉड्स, द वाण्डरर, द गार्डन ऑव द प्रोफेट, लज़ारस एंड हिज़ बिलवेड शामिल है.

ख़लील जिब्रान अद्भुत कल्पना शक्ति के स्वामी थे. उनकी रचनाएं 22 से अधिक भारतीय भाषाओं जिनमें हिंदी, गुजराती, मराठी, उर्दू शामिल है, में अनुवादित हो चुकी हैं. इनमें उर्दू तथा मराठी में उनके सर्वाधिक अनुवाद हुए हैं. वह ईसा के अनुयायी होकर भी पादरियों और अंधविश्वास के कट्टर विरोधी रहे.

हालांकि अपने देश से उनका निष्कासन हो गया था, फिर भी उनमें देशभक्ति की भावना कूटकूट कर भरी थी. उन्होंने मानवीय सामाजिक व्यवहार पर दर्शन, चिंतन के अलावा अपने देश के लिए भी लिखा. 48 वर्ष की आयु में कार दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के चलते 10 अप्रैल, 1931 को न्यूयॉर्क में उनकी मृत्यु हो गई. साहित्य आजतक की ओर से इस महान लेखक को नमन!

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