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दरियागंज की किताबी शाम में 'कटिहार से केनेडी' पुस्तक पर लेखक संजय कुमार से हुई चर्चा

'दरियागंज की किताबी शाम' कार्यक्रम की पांचवी कड़ी 'कटिहार से केनेडी: राह जिसके मुसाफ़िर कम थे' विषय पर थी, जिसमें डॉ. संजय कुमार से काजल कर्ण का संवाद हुआ.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 22 July 2019
दरियागंज की किताबी शाम में 'कटिहार से केनेडी' पुस्तक पर लेखक संजय कुमार से हुई चर्चा दरियागंज की किताबी शाम में काजल कर्ण से संवाद करते हुए लेखक संजय कुमार

नई दिल्लीः 'दरियागंज की किताबी शाम' कार्यक्रम की पांचवी कड़ी 'कटिहार से केनेडी: राह जिसके मुसाफ़िर कम थे' विषय पर थी, जिसमें डॉ. संजय कुमार से काजल कर्ण का संवाद हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत में वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति माहेश्वरी-गोयल ने वक्ताओं का परिचय दिया.

संजय कुमार वर्तमान में द लक्ष्मी मित्तल एंड फ़ैमिली साउथ एशियन इंस्टीट्यूट, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के भारतीय निदेशक हैं. कटिहार के डॉ. संजय कुमार को अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने मास्टर इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पीजी पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद मैसन फैलो उपाधि से सम्मानित किया.

स्व. बैद्यनाथ प्रसाद सिंह एवं शीला देवी के पुत्र संजय ने स्कूली शिक्षा शहर के हरिशंकर नायक उच्च विद्यालय से पूरी की. इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीतिशास्त्र में पीजी एवं जेएनयू से एमफिल एवं पीएचडी की उपाधि प्राप्त की. सेवा भारत संस्था से जुड़ कर उन्होंने असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों के लिए देश के विभिन्न प्रदेशों में कई काम किये. राष्ट्रीय अख़बारों में वह निरन्तर सामाजिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं.

काजल कर्ण ने डॉ. संजय कुमार से उनकी पुस्तक 'कटिहार टू कैनेडी' लिखने के पीछे की प्रेरणा पर रोशनी डालने का आग्रह किया. डॉ. संजय कुमार ने बताया कि किताब को लिखने का मुख्य कारण बच्चों को प्रेरित करना है. कम संसाधनों में भी अच्छी शिक्षा मिल सकती है, इस पुस्तक में यही सन्देश है. लेखक की यात्रा बिहार के 'कटिहार' ज़िले से शुरू होती है, और हार्वर्ड कैनेडी स्कूल तक का सफ़र पुस्तक में दर्शाया है.
 
डॉ. संजय कुमार ने कहा कि वह महादलितों के साथ कार्य करते रहे हैं और उन्हें संगठित कर स्वावलम्बी बनाने की भी कोशिश की. लेकिन करप्शन की वजह से सफल नहीं हुए. लेखक ने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन पर भी कटाक्ष किया, जिसमें हर प्रकार का करप्शन है. बिहार की शिक्षा व्यवस्था वेंटिलेटर पर है. कटिहार स्कूल से हार्वर्ड कैनेडी स्कूल के सफ़र के बाद संजय कुमार ने बिहार की सरकारी व्यवस्था को सुधारने के लिए नयी योजना शुरू की है, इसी कड़ी में ‘शिक्षा यात्रा’ भी शुरू होने जा रही है.
 
डॉ. संजय कुमार ने शिक्षा को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने के अपने प्रयासों के बारे में जानकारी दी और इस किताब का उद्देश्य बताया जो कि हाशिए पर पड़े लोगों के जीवन में बदलाव लाना है. अपनी मिट्टी से जो जज़्बा उन्होंने पाया, उसे वही प्रतिदान देना है. शिक्षा का उजाला और उसकी अहमियत हर बच्चे के जीवन तक पहुँचे यही इस किताब का उद्देश्य है.
 
याद रहे कि दक्षिण एशिया के सबसे बड़े और पुराने किताबी गढ़ 'दरियागंज' की विस्मृत साहित्यिक शामों को विचारों की ऊष्मा से स्पन्दित करने के लिए वाणी प्रकाशन द्वारा एक विचार श्रृंखला 'दरियागंज की किताबी शाम' की शुरुआत की गयी है. इसमें विमर्श की ऊष्मा के साथ गर्म चाय की चुस्कियाँ, कागज़ की ख़ुशबू और पुरानी दिल्ली का अपना ख़ास पारम्परिक फ़्लेवर परोसा जाता है..

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