Sahitya AajTak
Sahitya AajTak

वीएस नायपॉलः आजीवन करते रहे लेखन, जीवन में नहीं चुना दूसरा काम

त्रिनिडाड में पले-बढ़े भारतीय मूल के वीएस नायपॉल ने ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी. लेखन की दुनिया में उन्होंने काफी प्रसिद्धि हासिल रही. ए बेंड इन द रिवर' और 'अ हाउस फ़ॉर मिस्टर बिस्वास' उनकी चर्चित कृतियों में हैं.

Advertisement
aajtak.in
वरुण शैलेश लंदन/नई दिल्ली, 12 August 2018
वीएस नायपॉलः आजीवन करते रहे लेखन, जीवन में नहीं चुना दूसरा काम वीएस नायपॉल (फाइल फोटो)

त्रिनिदाद में जन्मे वीएस नायपॉल ने अध्ययन के दौरान ऑक्सफोर्ड में चार साल बिताने के बाद लिखना शुरू किया और फिर जीवन में कोई दूसरा व्यवसाय नहीं चुना. कहानी और इससे जुड़ी विधाओं में उन्होंने करीब 30 किताबें लिखीं और कई प्रतिष्ठि‍त पुरस्कारों से सम्मानित हुए.

विद्याधर सूरज प्रसाद नायपॉल यानी वीएस  नायपॉल के पूर्वज ट्रिनिडाड गए थे और वहीं बस गए. उनकी शिक्षा-दीक्षा इंग्‍लैंड में हुई और वह अंतिम समय तक लंदन में ही रहे. साहित्‍य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्‍हें दुनियाभर में कई पुरस्‍करों से नवाजा गया. 2008 में द टाइम्‍स ने 50 महान ब्रिटिश लेखकों की सूची में नायपॉल को सातवां स्‍थान दिया था. खास बात यह थी कि इस सूची में 1945 से बाद की कृतियों को जगहों दी जानी थी.

नायपॉल की कुछ उल्‍लेखनीय कृतियों में इन ए फ्री स्‍टेट (1971), ए वे इन द वर्ल्‍ड (1994), हाफ ए लाइफ (2001), मैजिक सीड्स (2004) जैसी किताबें शामिल हैं. उक्त परिचय इसलिए जरूरी है क्योंकि आम तौर पर पढ़ने के शौकीन तबके का एक बड़ा हिस्सा बुक स्टॉल पर लेखक बारे में जानने के बाद ही किताब खरीदता है. हालांकि भारतीय मूल के नायपॉल किसी परिचय के मोहताज नहीं रहे, लेकिन यह परिचय और परिचय में यह लिखना कि लेखक ने लेखन के अलावा कोई और व्यवसाय नहीं चुना, जरूरी है.

उनकी एक किताब 'ए राइटर्स पीपुल' है,  जो काफी दिलचस्प है. जैसा कि नाम से ही स्प्ष्ट है कि यह किताब उन लोगों के बारे में है, जिससे लेखक का संबंध रहा है, जिनसे उनके लेखन का संबंध रहा है या फिर यह कि वह जिन्होंने उन्हें लिखने के लिए प्रेरित किया. नायपॉल ने इस किताब में अपनी लेखन यात्रा को समेटने का काम किया है. यह एक कहानी है, उस 10 साल के बच्चे की जो लेखक बनना चाहता है, लिखना चाहता है. इसकी शुरुआत वह अपनी डायरी से करता है और फिर रमा रहता है इस सोच में इसमें क्या लिखे, क्या नहीं लिखे. यह किताब एक लेखक के रूप में नायपॉल की सोच है. वह कहते हैं, 'मैं अपनी पूरी जिंदगी देखने के तरीकों के बारे में सोचता रहा हूं और यह कि ये दुनिया की रूपरेखा को किस तरह बदल देते हैं.'

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay