मुजीब रिज़वी के शोधग्रंथ 'सब लिखनी कै लिखु संसारा: पद्मावत और जायसी की दुनिया' का लोकार्पण

भक्ति काल की निर्गुण प्रेमाश्रयी धारा के कवि मलिक मोहम्मद जायसी और उनकी लेखनी को केंद्र बना कर प्रोफ़ेसर मुजीब रिज़वी का शोधग्रंथ अब किताब की शक्ल में 'सब लिखनी कै लिखु संसारा : पद्मावत और जायसी की दुनिया’  नाम से आया है.

Advertisement
aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 25 March 2019
मुजीब रिज़वी के शोधग्रंथ 'सब लिखनी कै लिखु संसारा: पद्मावत और जायसी की दुनिया' का लोकार्पण 'सब लिखनी कै लिखु संसारा: पद्मावत और जायसी की दुनिया' का लोकार्पण कार्यक्रम

नई दिल्ली: मलिक मोहम्मद जायसी भक्ति काल की निर्गुण प्रेमाश्रयी धारा के कवि के रूप में हिंदी साहित्य में अमर हैं उत्तर प्रदेश के जायस नामक स्थान पर उनका जन्म हुआ. अपनी एक पुस्तक 'आखिरी कलाम' में उन्होंने खुद अपने जन्मस्थान के बारे में लिखा था, जायस नगर मोर अस्थानू/ नगरक नांव आदि उदयानू/ तहां देवस दस पहुने आएऊं/ भा वैराग बहुत सुख पाएऊं.

जायसी की रचनाएं प्रेम और विरह का विंब प्रस्तुत करती हैं. अब तक ज्ञात उनकी इक्कीस रचनाओं में पद्मावत, अखरावट, आख़िरी कलाम, कहरनामा, चित्ररेखा आदि प्रमुख हैं, पर उनकी ख्याति का आधार ग्रंथ 'पद्मावत' ही है. इस पुस्तक को हाल में एक बार फिर संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावत' से खूब चर्चा मिली.

यह अचरज की ही बात है कि इस अत्यंत उच्चकोटि के सरल और उदार सूफ़ी महात्मा के आम लोगों के मानस पर लौटने की वजहें ऐतिहासिक न होकर, कमर्शियल और राजनीतिक थी. लेकिन, इतिहास और किंवदंती में झूलती जायसी की पद्मावती की कहानी हर दौर के लिये ख़ास है.

जायसी की 'पद्मावत' में पद्मावती की प्रेम कथा का रोचक वर्णन हुआ है. इस ग्रंथ में राजा रत्नसेन की पहली पत्नी नागमती के वियोग का भी अनूठा वर्णन है. इसकी भाषा अवधी है और इसकी रचना शैली पर आदिकाल के जैन कवियों की दोहा चौपाई पद्धति का प्रत्यक्ष प्रभाव दिखता है. खैर साहित्य की दुनिया में जायसी फिर से चर्चा में हैं, उन पर लिखी एक किताब को लेकर.

जायसी और उनकी लेखनी को केंद्र बना कर प्रोफ़ेसर मुजीब रिज़वी का शोधग्रंथ अब किताब की शक्ल में 'सब लिखनी कै लिखु संसारा : पद्मावत और जायसी की दुनिया’  नाम से आया है. प्रो. मुजीब रिज़वी, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के संस्थापक सदस्यों में से थे. उन्होंने जीवन के 40 साल जामिया में बिताये. इससे पहले वे अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में भी अध्यापन कर चुके थे. कई वर्षों की मेहनत के बाद तैयार की गई यह किताब ‘सब लिखनी कै लिखु संसारा: पद्मावत और जायसी की दुनिया’ एक शोध ग्रंथ है.

यह किताब प्रो. रिज़वी ने शोध ग्रंथ के रूप में लिखी थी जिसपर 1979 में अलीगढ़ यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि दी थी. यह शोध ग्रंथ न सिर्फ़ मलिक मुहम्मद जायसी की तमाम रचनाओं का एक मौलिक विश्लेषण पेश करता है अपितु सूफ़ी साहित्य की बहुत सी मान्यताओं और अभिव्यक्तियों से जायसी के माध्यम से पहली बार परिचित कराता है. मुजीब रिज़वी यह साबित कर देते हैं कि फ़ारसी और सूफ़ी साहित्य के ज्ञान के बिना जायसी को पढ़ना दुष्कर ही नहीं नामुमकिन भी है.

प्रो. रिज़वी के इसी ग्रंथ का लोकार्पण नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में हुआ, जिसमें प्रोफेसर असगर वजाहत, पुरुषोत्तम अग्रवाल, शाहिद मेहदी, अशोक चक्रधर, मुकुल केशवन, शाहिद अमीन, रविकांत, रवीश कुमार, अनुषा रिज़वी, सुमन केशरी, वंदना राग सहित कई साहित्यकार, इतिहासकार, विशेषज्ञ एवं पाठक मौजूद थे.

लोकार्पण कार्यक्रम में 'सब लिखनी कै लिखु संसारा : पद्मावत और जायसी की दुनिया.’  पर बात करते हुए पुरुषोत्तम अग्रवाल ने कहा, "हर किताब का अपना एक समय होता है. मुजीब रिज़वी की किताब आज इस दौर में प्रकाशित हुई है जब अवधेश और भारतदेश को एक दूसरे के खिलाफ़ खड़ा किया जा रहा है. हिन्दी साहित्य और आलोचना दोनों को समृद्ध करने वाली यह किताब आज बहुत प्रासंगिक है."

मुजीब रिज़वी को याद करते हुए सईद शाहिद मेहदी ने कहा, "वे एक ट्रांसपेरेंट शख्स थे. अगर किसी आदमी को आप सेक्युलर कह सकते हैं जो अपने ख़यालात में, अपनी आदतों मे सेक्युलर हो तो वो मुजीब थे. उनकी शख्सियत कभी नहीं बदली."

असग़र वजाहत ने कहा कि उनकी सूफ़ी साहित्य को फ़ारसी के रास्ते समझने की कोशिश काबीले तारीफ़ है. उन्होंने कहा, "मुजीब रिज़वी सिर्फ़ पद्मावत पर ही नहीं बल्कि तुलसी दास पर भी काम किया है. उनकी सबसे बड़ी बात यह थी कि उन्होंने रामचरित्र मानस को फ़ारसी सूत्रों से समझने की कोशिश की थी."

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मशहुर दास्तानगो महमूद फारूख़ी एवं दारेन शाहिदी द्वारा पद्मावत का पाठ रहा. दोनों ही दास्तानगो ने शानदार जुगलबंदी का नज़ारा पेश करते हुए पद्मावत की कहानी को जीवंत कर दिया.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay