'कुली लाइन्स' से प्रवीण कुमार झा ने इतिहास के वृत में छिद्र कर दियाः यतीन्द्र मिश्र

चर्चित लेखक यतीन्द्र मिश्र का कहना है कि 'कुली लाइन्स' किताब द्वारा प्रवीण कुमार झा ने इतिहास के वृत्त में छेद कर दिया है, और जब भी गिरमिटियों के इतिहास पर कोई शोध होगा तो इस किताब को आदर्श के तौर पर देखा जायेगा.

Advertisement
Aajtak.inनई दिल्ली, 01 August 2019
'कुली लाइन्स' से प्रवीण कुमार झा ने इतिहास के वृत में छिद्र कर दियाः यतीन्द्र मिश्र 'कुली लाइन्स' पर संवाद के दौरान मंच पर लेखक, प्रकाशक, बुद्धिजीवि

नई दिल्लीः अपने प्रकाशन के 75 दिनों के भीतर ही दूसरे संस्करण के चलते सराही जा रही प्रवीण कुमार झा की पुस्तक 'कुली लाइन्स' पर  इंडिया इंटरनेशनल सेंटर एनेक्स में एक संवाद आयोजित हुआ. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने की. मुख्य वक्ता के तौर पर यतीन्द्र मिश्र उपस्थित रहे. संचालन वाणी प्रकाशन की प्रधान संपादक रश्मि भारद्वाज ने किया.
 
लेखक प्रवीण कुमार झा ने पुस्तक के बारे में कहा कि वैसे तो कई लोगों ने गिरमिटियों का इतिहास लिखा है, और लिखा जा रहा है, लेकिन हिन्दी में पहली बार सभी द्वीपों के इतिहास को एक साथ रखने का प्रयास किया गया है. प्रवीण झा ने बताया कि गिरमिटिया अपनी छ: पीढ़ी के बाद भी अपने आपको भारतीय मानते हैं. शुरुआत में जो स्त्रियाँ गिरमिटिया मज़दूरों के रूप में बाहर गईं, उनके लिए उनकी मुक्ति प्रमुख थी, परंतु बाद में उन्होंने भी भारतीय संस्कृति को बचाने का प्रयास किया.
 
इस किताब के बारे में लेखक यतीन्द्र मिश्र ने कहा कि हर पन्ने में लेखक का मानस खुलता जाता है. इस किताब द्वारा प्रवीण ने इतिहास के वृत्त में छेद कर दिया है, और जब भी इस विषय पर कोई शोध होगा तो इस किताब को आदर्श के तौर पर देखा जायेगा. यतीन्द्र मिश्र के अनुसार एक ईमानदार, भावुक और सह्रदय लेखक प्रवीण के अंदर है, जो इस किताब के पन्नों से झलकता है.
 
मालिनी अवस्थी का कहना था कि किताब का विषय और शीर्षक दोनों ही आकर्षित करते हैं. प्रवीण ने उस समय के अंग्रेज़ों के मनोविज्ञान को छुआ है. उनका कहना था कि मॉरीशस और फिजी में भारतीयता ज़्यादा दिखाई देती है. अगर आपको जानना है कि आप क्या थे तो आप सूरीनाम और त्रिनिडाड जाइये, जहाँ के गिरमिटिया लोगों के वंशजों ने भारतीयता के मूल रूप को समरक्षित रखा है. मालिनी ने इस अवसर पर बिदेसिया गीत गाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया.

याद रहे कि यह पुस्तक विश्व के सबसे बड़े पलायन और आप्रवास का इतिहास है, जिसे लगभग भुला दिया गया. लाखों लोग समन्दर से जहाज़ पर भेजे गये, ऐसे काग़ज़ों पर हस्ताक्षर करवाकर जिन्हें न वे समझ सकते थे, न पढ़ सकते थे. यह कहानी है एक विशाल साम्राज्य के लालच की और हिन्दुस्तानियों के संघर्ष की. हिन्दुस्तान से दूर कई हिन्दुस्तानों की.

यह कहानी कई ग़ैर-अदालती सवाल पूछती है उन ब्रिटिश सरकारों से, जिन्होंने यह होने दिया. जिन लोगों को कभी इंसाफ़ नहीं मिल सका. जो लोग कभी लौट कर न आ सके. एक अनचाही दुनिया बसा ली. बिना किसी सरकारी मुआवज़े के, किसी सरकारी माफ़ी के. यह कर्ज़ ब्रिटेन पर रह ही गया.
 
इस किताब में सभी गिरमिटिया और कुली देशों-रियूनियन द्वीप, मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, कैरिबियन द्वीपों, पूर्वी और दक्षिण अफ्रीका के प्रवास की जानकारी के अतिरिक्त मलय और म्यांमार का भी भारतीय प्रवास का इतिहास है. एक अध्याय कनाडा के सिख प्रवास पर भी आधारित है.
 
भारतीय इतिहासकारों ने इस विषय पर कम लिखा. पुराने गिरमिटिया डिपो और ऑफ़िस रहे नहीं. गिरमिटियों के ऍग्रीमेण्ट के काग़ज़ अब भारत में पूरी तरह उपलब्ध नहीं. वे लन्दन, फ्रांस, नीदरलैण्ड और इन गिरमिटिया द्वीपों की कई आर्काइव फ़ाइलों में बन्द हैं. यह कुछ पहलुओं में प्रथम ऐसा विस्तृत प्रयास है, जिसमें सम्पूर्ण प्रवास के इतिहास को समेटने की कोशिश की गयी है.

बिहार में जन्मे प्रवीण कुमार झा कथेतर रुचि के लेखक हैं. उन्होंने एक सामाजिक व्यंग्य-संग्रह ‘चमनलाल की डायरी', और दो यात्रा संस्मरण-आइसलैण्ड और नीदरलैण्ड पर लिखे हैं. फिलहाल वह नॉर्वे में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं. कार्यक्रम के आरंभ में स्वागत भाषण के दौरान वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति माहेश्वरी ने प्रकाशन की युवा वाणी परियोजना से अवगत कराया. अंत में प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी के धन्यवाद ज्ञापन से कार्यक्रम का समापन हुआ.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay