Sahitya AajTak
Sahitya AajTak

प्रेम इस तरह किया जाएः गीत चतुर्वेदी के जन्मदिन पर उनकी कविताएं

नामवर सिंह ने गीत चतुर्वेदी को इक्कीसवीं सदी के पहले दशक का अपना प्रिय कवि व कथाकार बताया था. उनके जन्मदिन पर साहित्य आजतक पर पढ़िए कुछ कविताएं.

Advertisement
aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 03 December 2019
प्रेम इस तरह किया जाएः गीत चतुर्वेदी के जन्मदिन पर उनकी कविताएं न्यूनतम मैं का कवर [सौजन्यः राजकमल प्रकाशन]

नामवर सिंह ने गीत चतुर्वेदी को इक्कीसवीं सदी के पहले दशक का अपना प्रिय कवि व कथाकार बताया था. गीत चतुर्वेदी 27 नवंबर 1977 को मुंबई में पैदा हुए और  'आलाप में गिरह' और 'न्यूनतम मैं' नामक कविता-संग्रहों से कवि के रूप में अपनी एक खास पहचान बनाई. इसी बीच उनकी कहानियों की दो किताबें सावंत आंटी की लड़कियाँ व पिंक स्लिप डैडी आई. कविता के लिए भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, गल्प के लिए कृष्ण प्रताप कथा सम्मान से नवाजे गए इस युवा रचनाकार के जन्मदिन पर साहित्य आजतक पर पढ़िए कुछ कविताएं.

ये कविताएं गीत चतुर्वेदी के संकलन 'न्यूनतम मैं' से ली गई हैं, जिसके बारे में विष्णु खरे ने लिखा था, 'गीत चतुर्वेदी की काव्य-निर्मिति और शिल्प की एक सिफत यह भी है कि वे 'यथार्थ' और 'कल्पित', ठोस और अमूर्त, संगत से विसंगत, रोज़मर्रा से उदात्त की बहुआयामी यात्रा एक ही कविता में उपलब्ध कर लेते हैं.' तो पढ़िए ये कविताएं

***
न्यूनतम मैं

वह फ़ोटो जो मैंने कभी नहीं खींचा
उसमें मैं सड़क पर भटक रहा
मैं एक पेड़ से कूद रहा
पानी से खौफ़ के बावजूद पानी में तैर रहा
 
उसमें मैं कुछ लोगों से छिप रहा
कुछ लोगों से कह रहा कि मुझे देख लो
कुछ लोग मुझे मार रहे थे
मैं भी कुछ लोगों को मार रहा था
 
उसमें एक गुमटी पर चाय पीता मैं
अचानक किसी जुलूस में शामिल हो गया
 
उसमें एक इमारत की बाल्कनी में सिर झुकाए बैठा मैं
सड़क पर भटकते मैं से लेकर
पेड़ से कूदते मैं तक
तमाम मैं को देख रहा था
 
जब भी मैं मैं लिखता हूँ
मैं न्यूनतम मैं होता हूँ*
 
वह फ़ोटो जो मैंने कभी नहीं खींची
उसमें एक दरवाज़े के किनारे स्टूल पर बैठा हूँ मैं
किसी दरबान की तरह
अनधिकार प्रवेश की चेष्टाओं को रोकता
 
मैं यह फ़ोटो कभी नहीं खींच पाया
मैं इस फ़ोटो से निकल जाना चाहता हूँ
 
बाहर का रास्ता भीतर वाले कमरे से होकर गुज़रता है
 
*ये दो पंक्तियाँ ऑस्कर वाइल्ड की कुछ बातों को जोड़ने से बनी हैं।
***

तुम्हारा शुक्रवार
तुमने कहा था कि तुम पेड़ इसलिए नहीं हो
कि तुमने कभी पत्ते नहीं पहने
फिर भी मैं तुम्हारी छाँह में बैठा
और तुम्हारे पत्तों से ढँका अँधेरा देखा
 
मैं तुम्हारी तस्वीर कभी नहीं बना सकता
कुछ आकार मैंने इससे पहले कभी नहीं जाने
इतने ज़्यादा कोण मिल जाएँ
तो सिर्फ़ वृत्त बनता है
 
जो हमने साथ गुज़ारा
इस पूरे दिन को भविष्य में प्रवेश के लिए
एक छद्म नाम चाहिए होगा

हम अपनी देह एक-दूसरे से छिपा ले जाएँगे
किसी दिन हम अपने शब्दों से बनाएँगे
एक-दूसरे का रूप
और बिना बताए अपने पास रख लेंगे
 
तुम हर सुबह मेरी आवाज़ सुनोगी
जो मैंने तुम्हारे कानों तक नहीं भेजी
एक दिन तुम्हारे पास अपनी कोई देह न होगी
सिर से पाँव तक मेरी लहराती हुई फुसफुसाहट होगी वह देह
मेरी आवाज़ की गूँज से बनी मीनार होगी तुम्हारी आत्मा
 
हम कभी नहीं मिले फिर भी
जो हमने साथ गुज़ारा
इस पूरे दिन को भविष्य में प्रवेश के लिए
भविष्य की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी
 
जैसे तुममें समाने के लिए तुम्हारी ज़रूरत भी कहाँ पड़ी थी मुझे
 
इस धरती पर तुम कहीं नहीं रहतीं सिवाय मेरी बातों के
और मैं भी कहीं नहीं हूँ सिवाय तुम्हारी बातों के
हम दोनों ने ही घर बदल लिया है
***
 
चोरी
प्रेम इस तरह किया जाए
कि प्रेम शब्द का कभी ज़िक्र तक न हो
 
चूमा इस तरह जाए
कि होंठ हमेशा गफ़लत में रहें
तुमने चूमा
या मेरे ही निचले होंठ ने औचक ऊपरी को छू लिया
 
छुआ इस तरह जाए
कि मीलों दूर तुम्हारी त्वचा पर
हरे-हरे सपने उग आएँ
 
तुम्हारी देह के छज्जे के नीेच
मुँह अँधेरे जलतरंग बजाएँ
 
रहा इस तरह जाए
कि नींद के भीतर एक मुस्कान
तुम्हारे चेहरे पर रहे
 
जब तुम आँख खोलो, वह भेस बदल ले
 
प्रेम इस तरह किया जाए
कि दुनिया का कारोबार चलता रहे
किसी को ख़बर तक न हो कि प्रेम हो गया
 
ख़ुद तुम्हें भी पता न चले
 
किसी को सुनाना अपने प्रेम की कहानी
तो कोई यक़ीन तक न करे
 
बचना प्रेमकथाओं का किरदार बनने से
वरना सब तुम्हारे प्रेम पर तरस खाएँगे
***
 
पंचतत्त्व
मेरी देह से मिट्टी निकाल लो और बंजरों में छिड़क दो
मेरी देह से जल निकाल लो और रेगिस्तान में नहरें बहाओ
मेरी देह से निकाल लो आसमान और बेघरों की छत बनाओ
मेरी देह से निकाल लो हवा और कारख़ानों की वायु शुद्ध कराओ
मेरी देह से आग निकाल लो, तुम्हारा दिल बहुत ठंडा है
***

पुस्तकः न्यूनतम मैं
लेखक: गीत चतुर्वेदी
विधा: कविताएं
प्रकाशन: राजकमल प्रकाशन
मूल्य: 300/- रुपए, पेपरबैक
पृष्ठ संख्या: 160

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay