क्रूर आक्रांता था औरंगजेब या सरहदों को फैलाने वाला, लोग ही तय करेंगे

आगरा के लेखक अफसर अहमद की किताब औरंगजेब (बचपन से तत्ता संघर्ष तक) के पहले संस्करण का हुआ विमोचन. छह संस्करण में ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर औरंगजेब के बारे में कई रोचक जानकारियां मिलेंगी.

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aajtak.in नई दिल्ली, 09 June 2019
क्रूर आक्रांता था औरंगजेब या सरहदों को फैलाने वाला, लोग ही तय करेंगे कैसा था औरंगजेब का व्यक्तित्व, किताब से कई बातें पता चलेंगी.

ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर लिखी गई किताब औरंगजेब (बचपन से सत्ता तक) में भारतीय इतिहास की उस शख्सियत को सही मायने में जानने और समझने में मदद मिलेगी, जिसे एक क्रूर खलनायक या फिर इस्लाम का सच्चाई से पालन करने वाले महान बादशाह के रूप में देखा जाता रहा है. लगभग 300 वर्ष से विवादों से घिरे बादशाह के जीवन पर आगरा निवासी लेखक व पत्रकार अफसर अहमद द्वारा लिखी गई किताब के छह खंडों के पहले संस्करण का विमोचन होटल गोवर्धन में सेंट जॉन्स कॉलेज के इतिहास के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. आरसी शर्मा ने किया.

लेखक अफसर अहमद ने किताब पर प्रकाश डालते हुए कहा कि औरंगजेब का किरदार भारतीय समाज में दशकों से तीखी बहस का विषय बना हुआ है. उसकी नीतियों को लेकर अकसर सवाल उठते रहे हैं. औरंगजेब का नाम आते ही आमतौर पर हमारे जहन में उन्मादी शासक, हिन्दू विरोधी, क्रूर आक्रांता, मूर्ति-मंदिर भंजक, भाइयों का हत्यारा जैसी बातें आती हैं. वह एक ऐसा बादशाह भी था, जिसने हिन्दुस्तान की सरहदों को नई मंजिलें दीं.

करीब 50 वर्ष तक हुकूमत के दौरान अफगानिस्तान से लेकर दक्षिण भारत तक मुगल साम्राज्य का विस्तार किया. उसने प्रेम किया. उसकी दो हिन्दू पत्नियां भी थीं. वह संस्कृत भाषा का ज्ञाता भी था. उसकी यह यात्रा काफी दिलचस्प थी. यह किताब वास्तव में उन आरोपों और सवालों की हकीकत जानने की एक मजबूत कोशिश है. इसमें हर उस सवाल का जवाब है जो बीते वर्षों में औरंगजेब को लेकर उठे हैं.

अफसर अहमद कहते हैं, बेशक जवाब तलाशना आसान नहीं रहा. क्योंकि बाद के इतिहासकारों में कुछ ही निष्पक्ष रह पाए. इसलिए पूरी सीरीज में अधिकतर औरंगजेब पर लिखे गए मूल संदर्भ ग्रंथों का सहारा लिया गया है. हमने सही और गलत दोनों पक्षों को तथ्यों के साथ पेश किया है. औरंगजेब नायक था या खलनायक, किताब को पढ़कर यह निर्णय पाठकों को करना है. जल्दी ही इसके अन्य संस्करण भी उपलब्ध होंगे.

डॉ. आरसी शर्मा ने किताब के लिए शुभकामनाएं दीं. वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल ने बताया कि इस किताब में नए तरह का इतिहास लेखन है. जो विभिन्न तथ्यों को एकत्र कर वैज्ञानिक प्रक्रिया पर आधारित है. इससे पहले हिन्दी में ऐसी कोई प्रमाणिक पहल नहीं हुई.अफसर अहमद ने इस मौके पर बताया कि किताब के 145 पेज का पहला खंड औरंगजेब की शुरुआती जिंदगी से जुड़ा है.

इसमें उसकी व्यक्तिगत जिन्दगी से जुड़ी हैरतअंगेज जानकारियां हैं, जो पहले कभी सामने नहीं आईं. मसलन उसका संस्कृत भाषा का ज्ञान, उसका एक लड़की को देखकर बेहोश हो जाना, उसकी हिन्दू पत्नियां, उसके युद्ध के मैदान के किस्से और उसके पिता शाहजहां के बीच सत्ता संघर्ष से पहले महत्वपूर्ण पत्र व्यवहार, जो दोनों के बीच रिश्तों की हकीकत को सामने लाता है. पहले खंड से यह साफ होता है कि मुगलों में इतना भयंकर खूनी संघर्ष क्यों हुआ.

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