Sahitya AajTak
Sahitya AajTak

मानवता के कण-कण में बिराजते भगवान राम पर किताबें कितनी?

राम जन-जन के राम हैं. वह लोगों के दिलों में बसते हैं, तभी उन्हें लोकनाथ कहा जाता है. इस भूलोक और संस्कृति दोनों में राम समाहित हैं. आखिर राम पर कितनी हैं किताबें. विजयादशमी पर

Advertisement
aajtak.in
जवाहर लाल नेहरू नई दिल्ली, 07 October 2019
मानवता के कण-कण में बिराजते भगवान राम पर किताबें कितनी? फाइल फोटो

राम जन-जन के राम हैं. वह विश्व के हर इंसान के अंदर रचे बसे हैं. राम लोगों के दिलों में बसते हैं, तभी उन्हें लोकनाथ कहा जाता है. इस भूलोक और संस्कृति दोनों में राम समाहित हैं. राम के प्रभाव का मूल है रामकथा. तभी तो कहा जाता है, राम से बड़ा राम का नाम. जनमानस में राम कथा क्यों रची-बसी है? इसलिए कि राम का चरित्र आदर्श पुत्र, आदर्श शिष्य, आदर्श भाई, आदर्श मित्र, आदर्श वीर और आदर्श राजा के रूप में सभी को आकर्षित करता है.

भक्त प्रहलाद ने कहा था, हममें तुममें खड़ग खंभ में, सबमें व्यापत राम. कोई एक व्यक्ति तो हर जगह व्याप्त नहीं हो सकता न? राम को इसीलिए भगवान माना जाता है. यह कोई यों ही नहीं है कि दुनियाभर में 300 से ज्यादा रामायण प्रचलित हैं. यहां हम विभिन्न रूपों में, लोक कथाओं में, लोक नाट्य और रीति-नीति में प्रचलन की तो बात ही नहीं कर रहे. बात रामायण की हो रही, जिनमें वाल्मीकि रामायण, कंबन रामायण और रामचरित मानस, अद्भुत रामायण, अध्यात्म रामायण और आनंद रामायण सबसे ज्यादा प्रचलित हैं.

भारत के अलावा चीन, मलेशिया, कंबोडिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका, बाली, जावा, सुमात्रा, नेपाल, लाओस, कंपूचिया और थाईलैंड आदि देशों की लोक-संस्कृति व ग्रंथों में आज भी राम जिंदा हैं. वहां रामकथाएं गाई जाती हैं, और कई जगह बाकायदा रामलीला खेली जाती है. नृत्य नाटिकाओं में भी भगवान राम की कथा का मंचन बहुतायत में होता है,

वाल्मीकी के रामायण को सबसे पुराना रामायण कहा जाता है. भारतीय साहित्यिक परंपरा में इसे उपजिव्य काव्य भी कहा जाता है, क्योंकि इस महाग्रंथ के आधार पर अन्य साहित्य विकसित हुआ है. इसके बाद तुलसीदास के द्वारा लिखा गया रामचरितमानस का स्थान आता है. चीन में रामायण का एक अलग ही रूप है. रामायण के हर पात्र के नाम वहां अलग है और चीन में श्रीराम कथा के मायने भी अलग हैं. 'दशरथ कथानम्' के अनुसार राजा दशरथ जंबू द्वीप के सम्राट थे और उनके पहले पुत्र का नाम लोमो था. तो वहीं तिब्बत में रामकथा को किंरस-पुंस-पा कहा जाता है. वहां के लोग प्राचीनकाल से वाल्मीकि रामायण की मुख्य कथा से परिचित थे.

मलयेशिया में रामकथा पर आधारित एक विस्तृत रचना है 'हिकायत सेरीराम'. हिकायत सेरीराम विचित्रताओं का अजायबघर है. भारतीय रामायण से इतर यहां राम कथा की शुरुआत रावण के जन्म से होती है. शायद इसीलिए मलेशिया को रावण के नाना के राज्य के रुप में माना गया है.
रामकथा पर आधारित इंडोनेशिया के जावा की प्राचीनतम कृति 'रामायण काकावीन' है. काकावीन की रचना कावी भाषा में हुई है. यह जावा की प्राचीन शास्त्रीय भाषा है, तो वहीं श्रीलंका में 'जानकी हरण' के रूप में रामकथा प्रचलित है.

अरब से लेकर यूरोप तक के साहित्य में राम कथा का कोई न कोई रूप मिलता है. बेल्जियम के कामिल बुल्के रामायण और रामकथा से इतने प्रभावित थे कि खुद भारत आकर और यही रहकर 'रामकथा का विकास' विषय पर शोध भी किया. फादर कामिल बुल्के ने अपने शोध ग्रंथ ‘रामकथा उत्पत्ति और विकास’ में रामायण और रामकथा के एक हजार से ज्यादा प्रतिरूप होने की बात कही है.

मिशनरी जे. फेनिचियो ने वर्ष 1609 में लिब्रो डा सैटा नाम से राम कथा का अनुवाद किया था. ए. रोजेरियस ने 'द ओपेन रोरे' नाम से डच भाषा में राम कथा का अनुवाद किया. जेवी टावर्निये ने 1676 में फ्रेंच में राम कथा का अनुवाद किया था. वानश्लेगेन ने 1829 में रामायण का लैटिन में अनुवाद किया था. 1840 में सिंगनर गोरेसिउ ने इटैलियन में राम कथा का अनुवाद किया. विलियम केटी ने 1806 में यही काम अंग्ररेजी में शुरू किया था, जिसे बाद में मार्शमैन, ग्रिफिथ, व्हीलर ने पूरा किया. रूसी विद्वान वारान्निकोव ने 20वीं सदी में रामचरितमानस का रूसी भाषा में अनुवाद किया था.

पूरी दुनिया में लोकप्रिय है राम और उनकी कथाएं बिल्कुल इस कहावत की तर्ज पर-  हरि अंनत हरिकथा अनंता. राम देश के जनमानस में गहरे रचे-बसे हैं. आज भी टीवी और फिल्म, कंम्प्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल, सोशल मीडिया के प्रचलन के बाद राम कथा लोगों को इस कदर आकर्षित करती है कि वे उनकी कथा को बार-बार सुनने को लालायित रहते हैं. ऐसा इसीलिए है, क्योंकि राम का सारा जीवन आदर्श के सबसे ऊंचे मानकों पर आधारित हैं. उन्होंने जीवन में जो कुछ किया, अपने लिए नहीं, औरों के लिए किया. राम के लिए हमेशा 'स्वहित' से ज्यादा, परहित, समाजहित और राज्यहित मायने रखता था. शायद इसीलिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जब भारत को ब्रिटिश हुकुमत से आजादी दिलाने की लड़ाई लड़ रहे थे तो रामराज्य की संकल्पना को साकार करना चाहते थे. राम का आदर्श गांधी को संबल प्रदान करने का काम करता रहा था.

राम का रामत्व उनकी संघर्षशीलता में है, न कि देवत्व में. राम के संघर्ष से साधारण जनता को एक नई शक्ति मिलती है. कभी न हारने वाला मन, विपत्तियां हजार हैं. पत्नी दुश्मनों के घेरे में है. राम रोते हैं, बिलखते हैं, पर हिम्मत नहीं हारते हैं. राम उदारता, अंत:करण की विशालता एवं भारतीय चारित्रिक आदर्श की साकार प्रतिमा है. विजयादशमी पर साहित्य आज तक की हार्दिक बधाई!

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay