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सबका साथ सबका विकास में क्या बुराई है? बोले जावेद अख्तर

हिन्दी का सबसे बड़ा महोत्सव साहित्य आजतक 2018 नई दिल्ली में चल रहा है. तीसरे और आखिरी दिन पहुंचे जावेद अख्तर ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी.

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aajtak.in [Edited by : अमित राय]नई दिल्ली, 19 November 2018
सबका साथ सबका विकास में क्या बुराई है? बोले जावेद अख्तर जावेद अख्तर [फोटो-आजतक]

मशहूर लेखक और शायर जावेद अख्तर साहित्य आजतक के मंच पर दर्शकों से रूबरू हुए. उन्होंने कई सवालों के बेबाकी से जवाब दिए तो कई पर बचते दिखे. अंजना ओम कश्यप के सवालों के जवाब देते हए जावेद ने कहा कि सबका साथ सबका विकास में क्या बुराई है? आखिर कुछ सोचा तो जा रहा है और सोचने में क्या बुराई है.

देश में हिंदुत्व खतरे में है इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जावेद ने कहा कि हिंदुत्व तो 2-3 साल से खतरे में आया है. इस्लाम तो बहुत पहले से खतरे में है. उन्होंने कहा कि मुझे परवाह नहीं है कि कोई मेरे बारे में क्या कहेगा. हमें किसी का डर नहीं है, पाकिस्तान में हम जाकर नहीं डरे. उन्होंने कहा कि कम्युनल मुसलमानों को सेक्यूलर हिंदू बुरे लगते हैं.

जावेद अख्तर ने कहा कि देश में ऐसा कोई नहीं हो सकता जिसे अपने मुल्क से प्यार ना हो, ये सब प्राकृतिक है. हर व्यक्ति को अपने शहर से प्यार होता है, हर किसी को देश से प्यार होता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि मैं किसी से नफरत करता हूं. हमारे सभ्यता में रहा है कि असहमत होना पाप नहीं है.

जावेद अख्तर बोले कि हर किसी को देश का छोटा सा हिस्सा दिया गया है, उस व्यक्ति के पास अपनी गली है मोहल्ला है लेकिन क्या वह अपनी उस जगह से प्यार करता है. बात देश से प्यार करने की हो रही है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग विचार होना जरूरी है, अगर एक विचार हो तो दिक्कत है. जो लोग देश को हिट करना चाहते हैं वो कम्युनल नहीं होंगे.

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