Sahitya AajTak
Sahitya AajTak

साहित्य आजतक 2019: 'मुश्किलों में घिरा और अभावों में पका इंसान कभी कमजोर नहीं होता'

साहित्य के सबसे बड़े महाकुंभ साहित्य आजतक 2019 के जिंदगी जिंदाबाद विषय पर आयोजित गोष्ठी में शामिल युवा लेखकों ने माना कि मुश्किलों से युवाओं को नहीं डरना चाहिए. शुरुआती संघर्षों का सामना करने वाले युवाओं को हताश नहीं होना चाहिए बल्कि इसे हथियार बनाकर आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए.

Advertisement
aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 05 November 2019
साहित्य आजतक 2019: 'मुश्किलों में घिरा और अभावों में पका इंसान कभी कमजोर नहीं होता' 'जिंदगी जिंदाबाद' विषय पर आयोजित गोष्ठी में शामिल 2 युवा लेखक (साहित्य आजतक)

  • लेखक ललित कुमार ने देशी भाषाओं से जुड़ी वेबसाइट कविताकोश शुरू की
  • मेरठ के निशांत जैन ने हिंदी मीडियम से IAS परीक्षा पास की, 13वीं रैंक पाई
  • 'रुक जाना नहीं' किताब मेरी पहली नाकामी पर आधारित किताबः निशांत जैन

साहित्य के सबसे बड़े महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019' के 'जिंदगी जिंदाबाद' विषय पर आयोजित गोष्ठी में शामिल युवा लेखकों ने माना कि मुश्किलों से युवाओं को नहीं डरना चाहिए. शुरुआती संघर्षों का सामना करने वाले युवाओं को हताश नहीं होना चाहिए बल्कि इसे हथियार बनाकर आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए. खासकर हिंदी मीडियम के छात्रों को अपनी इस भाषा से निराश नहीं होना चाहिए बल्कि इसे हथियार बनाकर लड़ना चाहिए.

'जिंदगी जिंदाबाद' विषय पर आयोजित गोष्ठी में शामिल लेखक ललित कुमार ने अपनी यात्रा के बारे में कहा, 'मैं भी हिंदी मीडियम का छात्र रहा हूं. अब तक के करियर में 8 बार अपना करियर बदल चुका हूं. मैं कुछ समय पहले तक प्रोफेशनल ब्लॉगर रहा हूं और पिछले 5-6 सालों से तकनीक विषय पर लिख रहा हूं. बाद में मैंने अपना यूट्यूब चैनल खोल लिया.'

जीवन में कई तरह की चुनौतियांः ललित
उन्होंने आगे बताया कि यूट्यूब चैनल खोलने के दौरान उनके पास कई तरह की मुश्किलें थीं. उनके पास कोई विशेष अनुभव नहीं था. कैमरा, ट्राइपोड आदि बेहद जरूरी चीजें भी नहीं थीं. शुरुआत में कई तरह की दिक्कतों से लड़ते हुए आगे बढ़ा और आज की तारीख में यूट्यूब चैनल पर 1 लाख से ज्यादा सबस्क्राइबर हैं.

ललित कुमार साहित्य से जुड़ी लोकप्रिय वेबसाइट कविताकोश के संस्थापक हैं. कविता कोश के बारे में ललित ने बताया कि स्वयंप्रयास के जरिए देशी भाषाओं से जुड़ी यह देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन वेबसाइट है जिसमें कई भाषाओं से जुड़ी साहित्य शामिल है. यह विकीपीडिया की तरह है जिसमें लोगों का सहयोग भी रहा है.

दूसरी ओर, हिंदी मीडियम से अपने दूसरे प्रयास में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में ओवरऑल 13वीं रैंकिंग और देशी भाषा में टॉप करने वाले निशांत जैन ने कहा, 'रुक जाना नहीं किताब लिखे जाने के पीछे मुख्य मकसद युवाओं को हतोत्साहित नहीं होने देने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास है. मुझमें यह दायित्वबोध इसलिए आया क्योंकि मैं हिंदी मीडियम से था और मुझमें कोई न कोई कमी थी.'

उन्होंने आगे कहा, 'जो भी छात्र हिंदी मीडियम का होता है वो किसी न किसी संघर्ष या मुश्किलों का सामना कर चुका होता है और यही दायित्वबोध था कि जिस संघर्ष का सामना किया उसी में कुछ चीजों को चुनकर आज के युवाओं को देने की कोशिश की गई है.'

साहित्य आजतक 2019 में ललित कुमार ने कहा, 'विटामिन जिंदगी मेरी लिखी हुई एक किताब है जो मेरी निजी जिंदगी से जुड़ा संस्मरण है और मैं भी हिंदी मीडियम से पढ़ा, लेकिन वक्त के साथ-साथ कुछ न कुछ नई चीज सीखता रहा. लोगों ने कहा कि अंग्रेजी नहीं तो कामयाबी नहीं मिलेगी. इसके लिए मैंने अंग्रेजी सीखी. फिर इंग्लैंड से एक विषय में गोल्ड मेडेल हासिल किया.

निशांत ने दूसरे प्रयास में IAS में किया पास
निशांत जैन ने अपने संघर्षों के बारे में बताया, 'मैं मेरठ में पला-बढ़ा. हिंदी मीडियम में पढ़ाई की. पढ़ाई में बेहद गंभीर था. पढ़ाई के अलावा एक्स्ट्रा एक्टिविटी करता रहता था. कविता, कहानी आदि लिखा करता था. 12वीं के बाद मैं दिल्ली आना चाहता था, लेकिन तब मेरठ से दिल्ली आने के लिए मेरे पास संशाधन नहीं थे. फिर मैंने अपनी पढ़ाई मेरठ में ही पूरी की. पोस्ट ऑफिस में क्लर्क की भी नौकरी की. इस दौरान एक दोस्त ने मेरी मदद की और उनकी सलाह पर पोस्ट ऑफिस की नौकरी छोड़ी. फिर जेआरएफ क्लियर किया और स्कॉलरशिप मिला जिसकी बदौलत दिल्ली चला आया. संसद में नौकरी मिली और यहां सम्मान भी मिला.'

आईएएस निशांत जैन ने बताया कि मुश्किलों में घिरा और अभावों में पका इंसान कभी कमजोर नहीं होता. यही मेरे साथ ही हुआ जो बाद में इस किताब लेखन को लेकर प्रेरणा बनी. उन्होंने आगे कहा, 'किताब में आईएएस परीक्षा में पहले प्रयास में प्री क्लियर नहीं करने पर जो निराशा आई उसी पर यह किताब लिखी. मैंने अपने जीवन में पहली बार असफलता का स्वाद चखा और इस नाकामी के बाद जीवन में घोर निराशा आई. लेकिन दोस्तों और घरवालों ने मेरी खूब मदद. इसी नाकामी की वजह से मुझे इस किताब को लिखने की प्रेरणा मिली.

मुझे बचपन में पोलिया हो गयाः ललित कुमार
कविताकोश के संस्थापक और लेखक ललित कुमार ने अपने शुरुआती दौर के बारे में बताते हुए कहा, 'मेरा जन्म दिल्ली के महरौली गांव में हुआ था. मेरा परिवार लोअर मिडिल क्लास का था. मुझे बचपन में ही पोलियो हो गया. हालांकि परिजनों ने मेरी पढ़ाई नहीं रोकी. अगर जिंदगी में कामयाबी हासिल करनी है तो शिक्षा बेहद अहम भूमिका निभाता है.'

ललित कुमार ने आगे कहा, 'खेल, कला आदि के जरिए भी आप कामयाबी हासिल कर सकते हैं, लेकिन यह बेहद प्रतिभाशाली लोगों के लिए है. हालांकि इसमें भी शिक्षा जरूरी होती है. मुझे विज्ञान बेहद पसंद है और 11वीं में दाखिला लेने के दौरान मैंने विज्ञान विषय में दाखिल ले लिया, लेकिन तब पता नहीं था कि इसकी पढ़ाई हिंदी में नहीं बल्कि अंग्रेजी में होती थी, फिर मेहनत करते हुए अपने क्लास में अंग्रेजी मीडियम से अपने क्लास में टॉप किया.'

उन्होंने कहा कि आगे चलकर कई काम किया. मेरा सपना यूएन के लिए काम करना था और अंततः उसमें काम करने का मौका मिला. यूएन में मुझे वैश्विक परिपेक्ष्य मिला. भारत के अलावा श्रीलंका और पाकिस्तान के लिए भी काम करता था. इस तरह से दुनियाभर के लिए काम करने का मौका मिला.

साहित्य आजतक में रजिस्ट्रेशन के लिए यहां क्लिक करें

साहित्य के सबसे बड़े महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019' का आज तीसरा और अंतिम दिन है. राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में चल रहे 3 दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन रविवार को कार्यक्रम की शुरुआत भजन सम्राट अनूप जलोटा के रसमई गायन के साथ हुई. उन्होंने कई भजन गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इसके बाद पंकज उधास ने भी अपनी गायकी से समा बांधा.

अनूप जलोटा और पंकज उधास के गायन के बाद आज तीसरे भी कई और सत्र का आयोजन किया जाएगा. आज शाम को मुशायरा का कार्यक्रम होगा, जिसमें वसीम बरेलवी, राहत इंदौरी समेत कई शायर शिरकत करेंगे. साहित्य आजतक 2019 कार्यक्रम की समाप्ति प्रख्यात गायिका शुभा मुद्गल की संगीतमय की प्रस्तुति के साथ होगी.

साहित्य आजतक की पूरी कवरेज यहां देखें

2016 में पहली बार 'साहित्य आजतक' की शुरुआत हुई थी. साहित्य आजतक 2019 के दूसरे दिन साहित्य, सिनेमा, राजनीति और कला जगत के कई दिग्गजों ने शिरकत की थी.

साहित्य आजतक 2019 के पहले दिन शुक्रवार को इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने अपने उद्घाटन संबोधन में सभी साहित्यकारों, संगीतज्ञों और कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि आप सबका साहित्य आजतक का चौथा संस्करण आ गया है. लेकिन ऐसा लगता है अभी इस कार्यक्रम को शुरू हुए एक साल ही हुआ है. इस साल चुनाव हो रहे थे और पता नहीं चला कि साल कब बीत गया. अच्छी बात है कि हमारी और आपकी ये साहित्य की विशेष तारीख जल्दी आ गई.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay