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हमारी संस्कृति, परंपरा और कला का जश्न है साहित्य आजतक: कली पुरी

शब्दों के ताने-बाने को बचाने, संगीत को और सुरीला करने, साहित्यकारों का सम्मान और कलाकारों को मंच देने के लिए साहित्य का सबसे बड़ा महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019 ' आज यानी शुक्रवार से शुरू हुआ. अगले तीन दिनों तक साहित्य, संगीत और कला की सरलता, सहजता और सुगमता से पूरे देश के लोग रूबरू होंगे.

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aajtak.in नई दिल्ली, 02 November 2019
हमारी संस्कृति, परंपरा और कला का जश्न है साहित्य आजतक: कली पुरी साहित्य आजतक में संबोधित करतीं इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी. (फोटोः बंदीप सिंह)

  • अगले तीन दिनों तक चलता रहेगा साहित्य आजतक
  • देशभर से आईं 200 हस्तियां होंगी इसमें शामिल

शब्दों के ताने-बाने को बचाने, संगीत को और सुरीला करने, साहित्यकारों का सम्मान और कलाकारों को मंच देने के लिए साहित्य का सबसे बड़ा महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019 ' आज यानी शुक्रवार को 11.45 बजे सुबह शुरू हुआ. अगले तीन दिनों तक साहित्य, संगीत और कला की सरलता, सहजता और सुगमता से पूरे देश के लोग रूबरू होंगे. सबसे पहले मां सरस्वती की वंदना हुई.

साहित्य आजतक की पूरी कवरेज यहां देखें

इसके बाद, इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने कार्यक्रम के उद्घाटन संबोधन में सबसे पहले यहां आए सभी साहित्यकारों, संगीतज्ञों, कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि आप सबका साहित्य आजतक का चौथा संस्करण आ गया है. लेकिन ऐसा लगता है अभी इस कार्यक्रम को शुरू हुए एक साल ही हुआ है. इस साल चुनाव हो रहे थे और पता नहीं चला कि साल कब बीत गया. अच्छी बात है कि हमारी और आपकी ये साहित्य की विशेष तारीख जल्दी आ गई.

चुनावी साल एक चैनल के लिए बहुत जरूरी होता है. जिसे कहते हैं मेक या ब्रेक ईयर. हमारा ओलंपिक्स. आपके सहयोग और हौसले के साथ हमारी पूरी टीम गोल्ड मेडल ही गोल्ड मेडल लेकर आई है. एग्जिट पोल हो या प्रधानमंत्री का इंटरव्यू या ग्राउंड रिपोर्ट, कुछ भी कसर नहीं छोड़ी. पूरी टीम ने जान लगाकर काम किया. और आपने हमारे काम को जम कर पसंद किया.

और इसलिए, साहित्य का ये तोहफा हमारी तरफ से आपके लिए इस साल और भी शानदार है. इस साल हमने पूरा ग्राउंड ही ले लिया. अब तीन दिन, सात मंचों से 200 हस्तियों के साथ ये सुहाना सफर चलेगा. लगातार कविताएं, शेर, शायरी, कहानी, संगीत, नाटक, मुशायरा, भारत के हर कोने से आपको देखने को मिलेगा. ये एक जश्न है हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारी कला का.

एक मंच का मैं जिक्र करना चाहूंगी, वो अद्भुत है. माइक के लाल. ये मंच है जहां हमारे राइजिंग स्टार अपना हुनर दिखा सकते हैं. अपने टैलेंट को शेयर कर सकते हैं. तो अगर आप में एक कवि या गायक छिपा है तो इस माइक का पूरा लाभ उठाइए. क्या पता अगले साल आप इस बड़े मंच के स्टार हों.

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वैसे तो आजतक हिंदी जगत का सरताज है पर इस समय हमने हिंदी के साथ भोजपुरी, मैथिली, उर्दू, अवधी, असमिया, उड़िया, गुजराती, मराठी, राजस्थानी और पंजाबी साहित्य के लेखकों को भी सम्मान दिया है. और एक मंच इंग्लिश के लेखकों के भी तैयार किया है. बीच में कला को भी जोड़ा है. लल्लनटॉप अड्डा जो एक पेड़ के नीचे शुरू हुआ था अब बड़े मंच पर प्रमोट हो गया है.

ये सब आपकी मेहरबानी है. आपके विश्वास के लिए मैं और मेरी पूरी टीम हमेशा आपकी आभारी है. आपके अटूट साथ की कीमत तो हम नहीं चुका सकते, पर साहित्य आजतक एक छोटी सी कोशिश है, आपका शुक्रिया करने के लिए. तो चलिए इसे शुरू करते हैं, इस साल का दमदार संस्करण आपके साथ. जय हिंद, जय हिंदी.

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