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Sahitya aajtak 2019- बेगम अख्तर ने ब्लाउज की डिजाइन के लिए मीना कुमारी की फिल्म की रील कटवा लिया था

गायिकी के क्षेत्र से जुड़ी कई किताब लिखने वाले यतींद्र मिश्रा ने बेगम अख्तर से जुड़े संस्करण को याद करते हुए कहा कि बेगम अख्तर दरबारों में गाया करती थीं. वह उनके राजपरिवार में भी नियमित अंतराल में गाने आया करती थीं. एक बार बेगम अख्तर को फिल्म चौदहवीं का चांद में मीना कुमारी का एक ड्रेस बेहद पसंद आया.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 05 November 2019
Sahitya aajtak 2019- बेगम अख्तर ने ब्लाउज की डिजाइन के लिए मीना कुमारी की फिल्म की रील कटवा लिया था 'हाय अख़्तरी' विषय पर आयोजित गोष्ठी में भाग लेते 2 लेखक (साहित्य आजतक)

  • बेगम अख्तर की सलाह पर ड्रेस के लिए दर्जियों को राजमहल बुलाया गयाः यतींद्र
  • विद्या शाहः मेरी गुरु शांति बेगम अख्तर की बेहद करीबी और पसंदीदा शिष्य रहीं
  • पर्दा गिरवाकर मंच पर कैप्सटन सिगरेट पिया करती थीं बेगम अख्तरः यतींद्र मिश्रा

साहित्य के सबसे बड़े महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019' के 'हाय अख़्तरी' विषय पर आयोजित गोष्ठी में गजल गायक बेगम अख्तर के बारे में चर्चा की गई जिसमें कई अनछुए पहलु सामने आई और उनके जीवन में गायिकी के इतर कई शानदार वाकयों को याद किया गया. बेगम अख्तर से जुड़ी किताब लिखने वाले यतींद्र मिश्रा ने बताया कि एक बार बेगम साहिबा को मीना कुमारी का एक ड्रेस बेहद पसंद आया तो उन्होंने उनकी मां से यही ड्रेस सिलवाने को कहा, जिसके लिए फिल्म से रील ही कटवा ली थी.

'हाय अख़्तरी' गजल गायिका बेगम अख्तर पर आधारित गोष्ठी थी. बेगम अख्तर एक महान फनकारा रही हैं और गजल गायिकी में उनकी कोई सानी नहीं है.

बेगम अख्तर को पंसद आया ड्रेसः यतींद्र
गायिकी के क्षेत्र में कई अजीम फनकारों पर किताब लिखने वाले यतींद्र मिश्रा ने बेगम अख्तर से जुड़े संस्करण को याद करते हुए कहा कि बेगम अख्तर दरबारों में गाया करती थीं. वह उनके राजपरिवार में भी नियमित अंतराल में गाने आया करती थीं. एक बार बेगम अख्तर को फिल्म चौदहवीं का चांद में मीना कुमारी का एक ड्रेस बेहद पसंद आया. मीना कुमारी ने इस सीन में पफ वाला एक ब्लाउज पहन रखा था. बेगम ने उनकी मां के सलाह दी कि वह ऐसा ही ड्रेस पहनें.

yatindra_110319065700.pngलेखक यतींद्र मिश्र (साहित्य आजतक)

बेगम अख्तर की सलाह के बाद मां ने यह ड्रेस सिलवाने के लिए तमाम दर्जियों को राजमहल में बुलवाया. लेकिन वो कई प्रयासों के बाद मीना कुमारी की पहनी ड्रेस की नकल नहीं ले पाए क्योंकि फिल्म का सीन आगे बढ़ जाता. इस बारे में जब बेगम अख्तर को जानकारी मिली तो उन्होंने फिल्म में उस सीन से जुड़ी रील ही कटवा लिया. फिल्म निर्माता को जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने परिवार पर केस कर दिया. उन्होंने बताया कि बेगम साहिबा बेहद साफ दिमाग और खुले दिमाग वाली महिला थी, जो कुछ भी पसंद होता उस पर अपनी राह जाहिर कर देती थीं.

बेगम अख्तर के गाए गजलों को उनके ही अंदाज में गाने वाली गायिका, संगीतकार और लेखिका विद्या शाह ने कहा, 'मेरी गुरु शांति गुरु हीरानंद जी बेगम अख्तर की बेहद करीबी शिष्य रही हैं. शांति जी का उनके साथ बेहद करीबी रिश्ता रहा और उनके साथ उनसे लंबा नाता साथ रहा और यही कारण है कि बेगम अख्तर के साथ उनका इतना गहरा लगाव हुआ. साथ ही बेगम के प्रति लगाव का दूसरा कारण यह भी रहा कि बेगम अख्तर का रुख महिलावादी रहा और मैं भी इससे जुड़ी रही.'

साउंड इंजीनियर ने सुझाया था नाम
बेगम अख्तर पर अख्तरी नाम की किताब लिखने वाले यतींद्र मिश्रा ने बताया कि बेगम साहिबा मेरे यहां दरबार लगाया करती थी. लेकिन उनका जन्म अख्तरी के निधन के बाद हुआ. इसलिए उनके बारे में किताब लिखने के लिए उनके दौर में रहे बड़े फनकारों से मुलाकात की और उनसे जुड़े संस्मरणों और गायिकी के बारे में बात करके किताब लिखने की कोशिश की. उन्होंने साफ किया कि यह किताब उनकी लिखी हुई नहीं है बल्कि संपादित है. संपादित इसलिए क्योंकि मैंने लोगों से बात कर उनकी राय रखी है.

साहित्य आजतक 2019 में यतींद्र ने कहा, 'हर किरदार पर माहौल और परिवेश का असर होता है. मैं जब भी बड़े और दिग्गज हस्तियों से बात करता था तो उनके लहजे का ध्यान रखता था. लता मंगेशकर से बेगम अख्तर के बारे में बात करता तो उनकी बोली में मराठी पुट रहता था इसी तरह बिस्मिल्लाह खान की मुहावरेनुमा शैली और सोनम मानसिंह के अंदाज को उनके ही स्टाइल से बनाए रखा. ताकि वहां का पता चल सके.

गायिका और संगीतकार विद्या शाह ने बताया कि बेगम अख्तर पहले अख्तरी बाई फैजाबादी के नाम से जानी जाती थीं, लेकिन बाद में उनका नाम बेगम अख्तर हो गया. बेगम अख्तर नाम कहां से आया इस पर विद्या शाह ने बताया कि विवाह के दौरान हताशा के दौर से बाहर निकलने के बाद जब वह गायिकी की फील्ड में वापस लौटीं तो उनका पहला कार्यक्रम लखनऊ आकाशवाणी में था, तब यह चर्चा हुई कि उनका नाम क्या रखा जाए. इस बीच साउंड इंजीनियर ने यह नाम सुझाया. कोयलिया मत कर पुकार नाम के लिए बेगम अख्तर का नाम सामने आया. इस नए नाम के साथ 'कोयलिया मत कर पुकार' गाया.

vidhya_110319065758.pngगायिका, संगीतकार और लेखिका विद्या शाह (साहित्य आजतक)

पर्दा गिराकर सिगरेट पीती थीं बेगम साहिबाः यतींद्र
यतींद्र मिश्रा ने कहा कि बेगम अख्तर अपनी शर्तों पर जीती थीं. मंच पर प्रस्तुति के दौरान वह पर्दा गिराकर कैप्स्टन सिगरेट पीती थीं और उनके पीने तक श्रोता इंतजार करता रहता था. वह किसी की फरमाइश नहीं लेती थी. जो मर्जी होती थी वही गाती थी. वह तब तक नहीं गाती थी जब तक उन्हें यह ऐहसास न हो जाए कि श्रोता सुनने की स्थिति में आ गया है. उनकी महफिल में देरी से आने वाले श्रोता को पीछे ही बैठना पड़ता था.


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विद्या शाह ने कहा कि बेगम अख्तर की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह लोगों के साथ संवाद बनाए रखती थीं. दोनों लेखकों ने यह भी बताया कि बेगम अख्तर एक बेहद शानदार महिला थीं, लेकिन जल्द ही परेशान और खुश हो जाने वाली महिला भी थीं.

इससे पहले साहित्य आजतक 2019 के तीसरे दिन 'जिंदगी जिंदाबाद' विषय पर आयोजित गोष्ठी में शामिल युवा लेखकों ने माना कि मुश्किलों से युवाओं को नहीं डरना चाहिए. शुरुआती संघर्षों का सामना करने वाले युवाओं को हताश नहीं होना चाहिए बल्कि इसे हथियार बनाकर आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए.

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हिंदी मीडियम से अपने दूसरे प्रयास में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में ओवरऑल 13वीं रैंकिंग और देशी भाषा में टॉप करने वाले निशांत जैन ने कहा, 'रुक जाना नहीं किताब लिखे जाने के पीछे मुख्य मकसद युवाओं को हतोत्साहित नहीं होने देने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास है. मुझमें यह दायित्वबोध इसलिए आया क्योंकि मैं हिंदी मीडियम से था और मुझमें कोई न कोई कमी थी.' उन्होंने आगे कहा, 'जो भी छात्र हिंदी मीडियम का होता है वो किसी न किसी संघर्ष या मुश्किलों का सामना कर चुका होता है और यही दायित्वबोध था कि जिस संघर्ष का सामना किया उसी में कुछ चीजों को चुनकर आज के युवाओं को देने की कोशिश की गई है.'

साहित्य आजतक 2019 का तीसरा दिन
साहित्य के सबसे बड़े महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019' का आज तीसरा और अंतिम दिन है. राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में चल रहे 3 दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन रविवार को कार्यक्रम की शुरुआत भजन सम्राट अनूप जलोटा के रसमई गायन के साथ हुई. उन्होंने कई भजन गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इसके बाद पंकज उधास ने भी अपनी गायकी से समा बांधा.

अनूप जलोटा और पंकज उधास के गायन के बाद आज तीसरे भी कई और सत्र का आयोजन किया जाएगा. आज शाम को मुशायरा का कार्यक्रम होगा, जिसमें वसीम बरेलवी, राहत इंदौरी समेत कई शायर शिरकत करेंगे. साहित्य आजतक 2019 कार्यक्रम की समाप्ति प्रख्यात गायिका शुभा मुद्गल की संगीतमय की प्रस्तुति के साथ होगी.

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2016 में पहली बार 'साहित्य आजतक' की शुरुआत हुई थी. साहित्य आजतक 2019 के दूसरे दिन साहित्य, सिनेमा, राजनीति और कला जगत के कई दिग्गजों ने शिरकत की थी.

साहित्य आजतक 2019 के पहले दिन शुक्रवार को इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने अपने उद्घाटन संबोधन में सभी साहित्यकारों, संगीतज्ञों और कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि आप सबका साहित्य आजतक का चौथा संस्करण आ गया है. लेकिन ऐसा लगता है अभी इस कार्यक्रम को शुरू हुए एक साल ही हुआ है. इस साल चुनाव हो रहे थे और पता नहीं चला कि साल कब बीत गया. अच्छी बात है कि हमारी और आपकी ये साहित्य की विशेष तारीख जल्दी आ गई.

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