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असगर वजाहत ने 'साहित्य आजतक' के मंच से कहानियों में बताई विकसित देशों की पहचान

कहानी पर बात करते हुए असगर वजाहत ने कहा कि जहां तक कहानी लेखन की बात है तो मैंने कहानी लिखना कई साल पहले छोड़ दिया था, अब मैं कहानी नहीं लिखता. मुझे लगा कि कहानी से बड़ा जीवन है और जीवन के वो प्रसंग हैं जो हम से और आप से जुड़े हुए हैं.

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aajtak.in नई दिल्ली, 05 November 2019
असगर वजाहत ने 'साहित्य आजतक' के मंच से कहानियों में बताई विकसित देशों की पहचान साहित्य आजतक के मंच पर लेखक असगर वजाहत

  • साहित्य आजतक का आज तीसरा और अंतिम दिन है
  • साहित्य आजतक में लेखक असगर वजाहत ने सीधी बात की
  • असगर वजाहत ने सुनाईं अपनी तमाम कहानियां और उससे जुड़े किस्से

साहित्य के सबसे बड़े महाकुंभ 'साहित्य आजतक 2019' के तीसरे और अंतिम दिन 'सीधी बात' मंच पर 'गरजत- बरसतः असगर वजाहत' सेशन में प्रसिद्ध कथाकार, नाटककार और अकादमी पुरस्कार विजेता लेखक असगर वजाहत ने अपनी कई कहानियां सुनाईं और देश में संवाद की जरूरत पर जोर दिया. इस सेशन का संचालन आजतक डिजिटल के एग्जिक्यूटिव एडिटर पाणिनि आनंद ने किया.


कहानी पर बात करते हुए असगर वजाहत ने कहा कि जहां तक कहानी लेखन की बात है तो मैंने कहानी लिखना कई साल पहले छोड़ दिया था, अब मैं कहानी नहीं लिखता. मुझे लगा कि कहानी से बड़ा जीवन है और जीवन के वो प्रसंग हैं जो हम से और आप से जुड़े हुए हैं. यह शुरू हुआ पिछली इमरजेंसी से उस दौरान कुछ ऐसी कहानियां लिखीं जो उस समय के यथार्थ को आगे लाती हैं. कहानी क्या है इसकी परिभाषा क्या है किसी को नहीं मालूम.

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इसके बाद उन्होंने अपनी कुछ कहानियां भी सुनाईं. कहानी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह गुरु-शिष्य संवाद है.  

हरिराम- ईमानदारी क्या है गुरुदेव
गुरु- यह एक भयानक जानलेवा बीमारी का नाम है
हरिराम- क्या ये हमारे देश में भी होती है
गुरु- हरिराम बहुत पहले प्लेग, टीवी और हैजे की तरह इसका भी कोई इलाज न था तो यह हमारे देश में फैलती थी और हजारों लोग को चट कर जाती थी
हरिराम- और अब गुरुदेव
गुरु- अब उस दवा का पता चल गया है जिसके कारण इस बीमारी को रोका जा सकता है.
हरिराम- उस दवा का क्या नाम है गुरुदेव
गुरु- आज बच्चे-बच्चे की जुबान पर वह नाम है, लालच

हरिराम- गुरुदेव अगर एक सुंदर स्त्री के पीछे उसके दो प्रेमी लड़ रहे हों तो सुंदर स्त्री को क्या करना चाहिए
गुरु- तीसरे प्रेमी की तलाश
हरिराम- क्यों गुरुदेव
गुरु- इसलिए कि सुंदर स्त्री के पीछे लड़ने वाले प्रेमी नहीं हो सकते

हरिराम- क्रांति क्या है गुरुदेव
गुरु- हरिराम क्रांति एक सुंदर चिड़िया का नाम है
हरिराम- ये कहां रहती है गुरुदेव
गुरु- चतुर लोगों की जुबान पर और सरल लोगों के हृदय में
हरिराम- चतुर लोग उसका क्या करते हैं
गुरु- चतुर लोग उसकी प्रशंसा करते हैं उसके गीत गाते हैं और समय आने पर उसे चबा जाते हैं
हरिराम- और सरल लोग उसका क्या करते हैं
गुरु- वह उनके हाथ कभी नहीं आती

हरिराम- गुरुदेव अगर एक हड्डी के लिए दो भूखे कुत्ते लड़ रहे हों तो उन्हें देख एक सरल आदमी क्या करेगा
गुरु- बीच-बचाव कराएगा
हरिराम- और एक चालाक आदमी क्या करेगा
गुरु- हड्डी लेकर भाग जाएगा
हरिराम- और एक राजनेता क्या करेगा
गुरु- दो भूखे कुत्ते वहां और छोड़ देगा

हरिराम- सबसे बड़ा दर्शन क्या है गुरुदेव
गुरु- हरिराम सबसे बड़ा दर्शन है चाटुकारिता
हरिराम- कैसे गुरुदेव
गुरु- इसलिए कि चाटुकार बड़े से बड़े दर्शन को चाट जाता है

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इसके बाद उन्होंने अपनी एक सीरीज विकसित देशों की पहचान में से कुछ कहानियां सुनाईं. इसमें गुरू शिष्य से सवाल करता है

गुरु- विकसित देशों की कोई पहचान बताओ हरिराम
हरिराम- विकसित देशों में कपड़ा नहीं बनता गुरुदेव
गुरु- तब वे क्या बनाते हैं
हरिराम- वे हथियार बनाते हैं
गुरु- तब वे अपना नंगापन कैसे ढंकते हैं
हरिराम- हथियारों से ही उनकी नंगई ढंक जाती है

गुरु- विकसित देशों की कोई पहचान बताओ हरिराम
हरिराम- विकसित देश के लोग खाना नहीं पकाते
गुरु- तब वे क्या खाते हैं
हरिराम- वे फास्ट-फूड खाते हैं
गुरु- हमारे खाने और फास्ट-फूड में क्या अंतर है हरिराम
हरिराम- फास्ट-फूड खाने वाले के पास दौड़ा चला आता है और हमें अपने खाने के पास जाना पड़ता है

गुरु- विकसित देशों की कोई पहचान बताओ हरिराम
हरिराम- विकसित देशों में आदमी जानवरों से बड़ा प्रेम करते हैं
गुरु- क्यों...
हरिराम- क्योंकि जानवर आदमियों से बड़ा प्रेम करते हैं
गुरु- वहां आदमी-आदमी से और जानवर-जानवर से प्रेम क्यों नहीं करते
हरिराम- क्योंकि विकसित देशों में आदमी को आदमी और जानवरों को जानवर नहीं मिलते

गुरु- विकसित देशों की कोई पहचान बताओ हरिराम
हरिराम- विकसित देश विकासशील देशों को दान देते हैं
गुरु- और फिर...
हरिराम- फिर कर्ज देते हैं
गुरु- और फिर...
हरिराम- फिर ब्याज को ही कर्ज में देते हैं
गुरु- और फिर...
हरिराम- फिर ब्याज ही कर्ज में चलता रहता है
गुरु- और फिर...
हरिराम- और फिर विकसित देश विकासशील देशों को विकसित मान लेते हैं.

गुरु- विकसित देशों की कोई पहचान बताओ हरिराम
हरिराम- विकसित देशों में बूढ़े अलग रहते हैं
गुरु- और जवान...
हरिराम- जवान भी अलग रहते हैं
गुरु- और अधेड़
हरिराम- अधेड़ भी अलग रहते हैं
गुरु- तब वहां साथ-साथ कौन रहता है
हरिराम- सब अपने साथ-साथ रहते हैं

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मिलिए हमारे मेहमान से
असगर वजाहत ने कहानी, नाटक, उपन्यास, यात्रा-वृत्तांत, फिल्म तथा चित्रकला आदि विभिन्न क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण रचनात्मक योगदान किया है. ये दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रह चुके हैं. असगर वजाहत के लेखन में अनेक कहानी संग्रह, पांच उपन्यास, आठ नाटक और कई अन्य रचनाएं शामिल हैं. इनकी कहानियों के अनुवाद अंग्रेजी, इतालवी, रूसी, फ्रेंच, ईरानी, उज्बेक, हंगेरियन, पोलिश आदि भाषाओं में हो चुके हैं. इनके नाटकों का देश भर में मंचन और प्रदर्शन हुआ है. इनके नाटकों का निर्देशन हबीब तनवीर, एम के रैना, दिनेश ठाकुर, राजेंद्र गुप्ता, वामन केंद्रे, शहीम किरमानी तथा टाम आल्टर जैसे निर्देशकों ने किया है. 'जिन लाहौर नईं वेख्या ओ जम्याइ नईं' ने देश एवं देश के बाहर भी लोकप्रियता के नए मानदंड कायम किए. असगर वजाहत नियमित रूप से अखबारों और पत्रिकाओं के लिए भी लिखते रहे हैं.

शुक्रवार को यूं हुई कार्यक्रम की शुरुआत
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की सरस्वती वंदना और इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने कार्यक्रम के उद्घाटन संबोधन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई . इस बार 'साहित्य आजतक' में सात मंच हैं जहां से लगातार तीन दिन 200 हस्तियां आपसे रू-ब-रू होंगी. साहित्य, कला, संगीत, संस्कृति का यह जलसा 3 नवंबर तक चलेगा.

इस बार कई भारतीय भाषाओं को किया गया है शामिल
इस बार साहित्य आजतक में कई और भारतीय भाषाओं के दिग्गज लेखक भी आ रहे हैं. जिनमें हिंदी, उर्दू, भोजपुरी, मैथिली, अंग्रेजी के अलावा, राजस्थानी, पंजाबी, ओड़िया, गुजराती, मराठी, छत्तीसगढ़ी जैसी भाषाएं और कई बोलियां शामिल हैं.

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