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कविता के खत्म होने के बाद गूंजते अनुनाद जैसी होती है तस्वीरः बंदीप सिंह

पाणिनि आनंद के सवाल कि टेक्नोलॉजी क्रांति ने फोटोग्राफी के क्षेत्र क्या चुनौतियां पेश की है. बंदीप सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में हाथ में मोबाइल लिए हर व्यक्ति एक फोटोग्राफर है. बंदीप ने बताया कि एक अच्छी फोटो टेक्नोलॉजी के इस युग में कोई भी खींच सकता है. अच्छी फोटो प्रोफेश्नल या अमैच्योर कैमरे से भी खींची जा सकती है.

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राहुल मिश्रनई दिल्ली, 19 November 2018
कविता के खत्म होने के बाद गूंजते अनुनाद जैसी होती है तस्वीरः बंदीप सिंह साहित्य आजतक 2018, नई दिल्ली

साहित्य आजतक 2018 में इंडिया टुडे के अहम मंच पर फोटोग्राफी सत्र में इंडिया टुडे ग्रुप के प्रमुख छायाकार बंदीप सिंह से चर्चा हुई. इस सत्र का संचालन आजतक डॉट इन के संपादक पाणिनि आनंद ने किया.

इस सत्र में फोटोग्राफी पर चर्चा के दौरान बंदीप सिंह ने कहा जिस तरह एक कविता को सुनने के बाद उसके शब्द मन में गूंजते हैं वही गूंज तस्वीर होती है. चर्चा के दौरान बंदीप ने ब्लैक एंड व्हाइट फोटो और कलर फोटो के कई हुनर साझा किए. इस सत्र में फोटोग्राफी और खासतौर पर प्रोफेश्नल फोटोग्राफी पर अहम चर्चा हुई.

पाणिनि आनंद के सवाल कि टेक्नोलॉजी क्रांति ने फोटोग्राफी के क्षेत्र में क्या चुनौतियां पेश की हैं. बंदीप सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में हाथ में मोबाइल लिए हर व्यक्ति एक फोटोग्राफर है. बंदीप ने बताया कि एक अच्छी फोटो टेक्नोलॉजी के इस युग में कोई भी खींच सकता है. अच्छी फोटो प्रोफेश्नल या अमैच्योर कैमरे से भी खींची जा सकती है.

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हाल ही में इंडिया टुडे मैगेजीन के कवर पेज पर प्रकाशित बाबा रामदेव की योग आसन करती तस्वीर को बनदीप सिंह ने क्लिक किया है. इस तस्वीर को बतौर न्यूज फोटो खींचने पर बनदीप ने कहा कि बाबा रामदेव कहते हैं कि वह एफएमसीजी सेक्टर को उल्टे सिर खड़ा कर देंगे. वहीं बाबा रामदेव देशभर में योग शिविर के लिए भी जानें जाते हैं. लिहाजा, इस तस्वीर के जरिए बाबा रामदेव को योग साधना में खींचा गया.

प्रोफेश्नल फोटोग्राफी के क्षेत्र में चुनौतियों पर बंदीप ने बताया कि डिजिटल कैमरा आने से पहले एक प्रोफेश्नल फोटोग्राफर को लाइट और टेंपर कंट्रोल की कला के लिए लंबी प्रैक्टिस करनी पड़ती थी. मौजूदा समय में डिजिटल कैमरा के साथ आप महज एक एप की मदद से लगभग सबकुछ कंट्रोल कर सकते हैं.

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गौरतलब है कि साहित्य आजतक 2018 को इंडिया टुडे समूह ने आयोजित किया. साहित्य और कला के क्षेत्र में तीन दिनों तक चले इस महाकुंभ में 200 से अधिक विद्वान, कवि, लेखक, संगीतकार, अभिनेता, प्रकाशक, कलाकार, व्यंग्यकार और समीक्षक ने शिरकत की.

महाकुंभ में सजे पांच मंचों पर तीन दिनों के दौरान इन लोगों को सुनने के लिए कई लाख साहित्य, कला, संगीत, कविता, नाटक समेत सियासत और संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शक पहुंचे.

तीन दिनों तक इस कार्यक्रम में हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, अवधी, भोजपुरी, पंजाबी साहित्य और कला से जुड़ी बड़ी-बड़ी हस्तियां भी जुटीं. साहित्य आजतक में छेत्रीय भाषाओं के मंचों पर खासी रुचि देखने को मिली.

गौरतलब है कि साहित्य आजतक 2018 की शुरुआत इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी के वेलकम स्पीच से हुई थी. कली पुरी ने कहा कि कार्यक्रम को मिला समर्थन ही इंडिया टुडे ग्रुप की ताकत है. कली पुरी ने 'जय हिंद जय हिंदी' के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की. देखिए कली पुरी की पूरी स्पीच.

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